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एलआईसी फगवाड़ा शाखा ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का किया समर्थन, श्रम संहिता बिल के खिलाफ कामकाज ठप
एआईआईईए के आह्वान पर बीमा कर्मचारियों की हड़ताल, श्रमिक अधिकारों पर हमले का आरोप
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की फगवाड़ा शाखा ने बुधवार को ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIIEA) के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया। कर्मचारियों ने कामकाज पूरी तरह बंद रखकर श्रम संहिता बिल के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की फगवाड़ा शाखा ने बुधवार को श्रम संहिता विधेयक के विरोध में आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सक्रिय भागीदारी की। इस हड़ताल का आह्वान ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIIEA) द्वारा किया गया था।
नॉर्दर्न जोन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन के शाखा अध्यक्ष दीपक कुमार दुग्गल और सचिव दीपक जोशी के नेतृत्व में एलआईसी कर्मचारियों ने पूर्ण कार्य बहिष्कार किया, जिससे शाखा का आधिकारिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा।
संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के आह्वान पर हड़ताल
दुग्गल और जोशी ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हड़ताल एलआईसी और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) के श्रेणी तृतीय और चतुर्थ कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। यह आंदोलन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनें तथा बीमा और बैंकिंग क्षेत्र के कई महासंघ शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों से समझौता कर रही है, जबकि कर्मचारियों के लिए “ईज़ ऑफ लिविंग” सुनिश्चित करने में विफल रही है।
श्रम संहिता पर गंभीर आरोप
नेताओं ने कहा कि श्रम संहिता विधेयक के तहत
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श्रमिक की परिभाषा बदली जा रही है
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फिक्स्ड टर्म रोजगार को कानूनी रूप दिया जा रहा है
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हायर एंड फायर नीति लागू करने की कोशिश की जा रही है
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यूनियन पंजीकरण के नियमों को सख्त किया जा रहा है
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महिला कर्मचारियों के लिए अनिवार्य रात्रि पाली
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कार्य अवधि को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने का प्रावधान
उन्होंने कहा कि ये सभी प्रावधान उद्योगपतियों के हित में हैं, जबकि इससे श्रमिक वर्ग और आम जनता को नुकसान होगा।
वेतन समझौते में देरी पर नाराजगी
शाखा कोषाध्यक्ष शिव कुमार अलवाड़ी ने कहा कि चार महीने पहले तय हुआ वेतन संशोधन समझौता अब तक सरकार द्वारा अधिसूचित नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शाखा का काम केवल एक-दो कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ डालकर चलाया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
