- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- PAU में ब्रिटेन के विशेषज्ञ ने दिया व्याख्यान, कृषि अर्थशास्त्र और पुरातत्व के संबंधों पर साझा किए श...
PAU में ब्रिटेन के विशेषज्ञ ने दिया व्याख्यान, कृषि अर्थशास्त्र और पुरातत्व के संबंधों पर साझा किए शोध निष्कर्ष
यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के वरिष्ठ व्याख्याता एडम एस. ग्रीन ने सिंधु सभ्यता के उदाहरणों से कृषि विकास, आर्थिक असमानता और संसाधन प्रबंधन पर डाला प्रकाश
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विभाग में यूनाइटेड किंगडम के यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के वरिष्ठ व्याख्याता एडम एस. ग्रीन ने कृषि अर्थशास्त्र, पुरातत्व और सतत संसाधन प्रबंधन पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने सिंधु सभ्यता के साक्ष्यों के माध्यम से कृषि और आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
PAU में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ का व्याख्यान, कृषि अर्थशास्त्र और पुरातत्व के मेल पर हुई चर्चा
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विभाग में यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के सस्टेनेबिलिटी विषय के वरिष्ठ व्याख्याता (एसोसिएट प्रोफेसर) एडम एस. ग्रीन ने विशेष व्याख्यान दिया।
उन्होंने “Archaeology and Agricultural Economics: Economic Growth, Inequality and Resources” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए बताया कि पुरातत्व और कृषि अर्थशास्त्र का समन्वय कृषि विकास, आर्थिक असमानता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अंतर्विषयक शोध के महत्व पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष जेएम सिंह ने अतिथि वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि विकास और सतत संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अंतर्विषयक (Interdisciplinary) शोध की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का साझा अध्ययन भविष्य की कृषि नीतियों और अनुसंधान को नई दिशा दे सकता है।
पुरातत्व और अर्थशास्त्र के समन्वय पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अर्थशास्त्र के प्रोफेसर कमल वट्टा ने वक्ता का परिचय कराया और उनके साथ पूर्व में किए गए शोध सहयोग का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पुरातत्व और अर्थशास्त्र को एक साथ जोड़कर कृषि और समाज के विकास को अधिक व्यापक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।
सिंधु सभ्यता के उदाहरणों से समझाया कृषि विकास
एडम एस. ग्रीन ने दक्षिण एशिया, विशेष रूप से सिंधु सभ्यता से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर कृषि और आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने व्याख्यान में निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से चर्चा की—
व्याख्यान के प्रमुख विषय
- कृषि प्रणालियों का विकास
- आर्थिक वृद्धि (Economic Growth)
- आर्थिक असमानता (Inequality)
- बहुफसली खेती (Multi-Cropping)
- पशुपालन का महत्व
- ग्रामीण समृद्धि और संसाधन प्रबंधन
उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक साक्ष्यों के अध्ययन से वर्तमान कृषि नीतियों और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की जा सकती है।
सतत कृषि विकास के लिए शोध की भूमिका अहम
व्याख्यान के दौरान यह भी बताया गया कि कृषि अर्थशास्त्र, इतिहास और पुरातत्व जैसे विषयों का संयुक्त अध्ययन भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने में उपयोगी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों ने छात्रों और शोधार्थियों को बहुविषयक अनुसंधान अपनाने के लिए प्रेरित किया।
Key Highlights:
- PAU में यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क के विशेषज्ञ एडम एस. ग्रीन ने विशेष व्याख्यान दिया।
- व्याख्यान का विषय कृषि अर्थशास्त्र, पुरातत्व और संसाधन प्रबंधन रहा।
- अंतर्विषयक शोध के महत्व पर जोर दिया गया।
- सिंधु सभ्यता के उदाहरणों से कृषि और आर्थिक विकास की व्याख्या की गई।
- आर्थिक वृद्धि, असमानता, बहुफसली खेती और पशुपालन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
- छात्रों और शोधार्थियों को बहुविषयक अनुसंधान के लिए प्रेरित किया गया।
FAQ Section:
Q1. व्याख्यान किसने दिया?
उत्तर: यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क (यूके) के वरिष्ठ व्याख्याता (एसोसिएट प्रोफेसर) एडम एस. ग्रीन ने व्याख्यान दिया।
Q2. कार्यक्रम का आयोजन कहां हुआ?
उत्तर: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विभाग में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
Q3. व्याख्यान का मुख्य विषय क्या था?
उत्तर: "Archaeology and Agricultural Economics: Economic Growth, Inequality and Resources" विषय पर व्याख्यान दिया गया।
Q4. किन विषयों पर चर्चा की गई?
उत्तर: कृषि प्रणालियों का विकास, आर्थिक वृद्धि, असमानता, बहुफसली खेती, पशुपालन और ग्रामीण समृद्धि जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
Q5. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: कृषि अर्थशास्त्र और पुरातत्व के समन्वय के माध्यम से कृषि विकास और सतत संसाधन प्रबंधन की बेहतर समझ विकसित करना।
Conclusion:
PAU में आयोजित यह व्याख्यान कृषि, अर्थशास्त्र और इतिहास के बीच संबंधों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतर्विषयक शोध और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अध्ययन से आधुनिक कृषि नीतियों और सतत विकास के लिए नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

