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PAU ने किसानों के लिए फल, सब्जी और सजावटी पौधों की खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया
39 किसानों और महिला किसानों ने लिया प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेती और स्वरोजगार के नए अवसरों पर दिया गया व्यावहारिक मार्गदर्शन
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कौशल विकास केंद्र ने किसानों और महिला किसानों के लिए फल, सब्जियों और सजावटी पौधों की वैज्ञानिक खेती पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों से खेती को लाभदायक और स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बनाना था।
PAU का किसानों के लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, फल, सब्जी और सजावटी पौधों की वैज्ञानिक खेती पर मिला मार्गदर्शन
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विस्तार शिक्षा निदेशालय (Directorate of Extension Education) के अंतर्गत कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centre) ने किसानों और महिला किसानों के लिए “फल, सब्जियों एवं सजावटी पौधों की खेती” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. माखन सिंह भुल्लर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें 39 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें इन गतिविधियों को आय एवं स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।वैज्ञानिक खेती और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहा विशेष जोर
एसोसिएट डायरेक्टर (स्किल डेवलपमेंट) डॉ. रुपिंदर कौर ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों और महिला किसानों को फल, सब्जियों तथा सजावटी पौधों की वैज्ञानिक एवं कुशल खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर दिए व्याख्यान
तकनीकी समन्वयक जसविंदर सिंह बराड़ ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की, जिनमें शामिल हैं—
प्रशिक्षण के प्रमुख विषय
- पंजाब में फलों की वैज्ञानिक खेती
- बागों की योजना (Orchard Planning)
- पौधरोपण की आधुनिक तकनीकें
- नए पौधों की देखभाल एवं प्रबंधन
- आम और लीची का उत्पादन
- छोटे फलों (Minor Fruits) की खेती
- घरेलू बगीचों (Home Gardens) की योजना, पौधरोपण और रखरखाव
फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग पर भी मिला प्रशिक्षण
तकनीकी समन्वयक सिमरत सिंह ने बताया कि फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग विभाग के विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों को सजावटी पौधों की खेती और उसके व्यावसायिक महत्व के बारे में जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने फ्लोरीकल्चर के महत्व, सजावटी पौधों के उत्पादन, रखरखाव और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया, जिससे किसान खेती के साथ-साथ फूलों और सजावटी पौधों के व्यवसाय को भी आय का अतिरिक्त स्रोत बना सकें।
किसानों को स्वरोजगार के लिए किया गया प्रेरित
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि फल, सब्जी और सजावटी पौधों की खेती पारंपरिक कृषि के साथ अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प बन सकती है। विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर प्रबंधन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन पर जोर दिया।
Key Highlights:
- PAU ने किसानों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
- 39 किसानों और महिला किसानों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
- फल, सब्जी और सजावटी पौधों की वैज्ञानिक खेती पर दिया गया प्रशिक्षण।
- बागवानी, आम-लीची उत्पादन और होम गार्डनिंग पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
- फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग के व्यावसायिक अवसरों पर भी चर्चा।
- आधुनिक खेती के माध्यम से स्वरोजगार और आय बढ़ाने पर जोर।
FAQ Section:
Q1. प्रशिक्षण कार्यक्रम किस संस्था ने आयोजित किया?
उत्तर: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कौशल विकास केंद्र, विस्तार शिक्षा निदेशालय ने यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
Q2. प्रशिक्षण कितने दिनों का था?
उत्तर: यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिनों तक आयोजित किया गया।
Q3. कितने प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया?
उत्तर: कुल 39 किसानों और महिला किसानों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया।
Q4. प्रशिक्षण में किन विषयों पर जानकारी दी गई?
उत्तर: फलों की खेती, बागवानी योजना, पौधरोपण तकनीक, आम और लीची उत्पादन, होम गार्डनिंग, फ्लोरीकल्चर और सजावटी पौधों की खेती सहित कई विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।
Q5. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना।
Conclusion:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों और महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वैज्ञानिक खेती, बागवानी और फ्लोरीकल्चर जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक ज्ञान मिलने से किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं और कृषि को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।

