- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
‘डंप विरोधी मोर्चा’ ने आबादी से दूर प्लांट लगाने की मांग उठाई, नगर निगम ने आधुनिक तकनीक और प्रदूषण नियंत्रण का दिया भरोसा
पटियाला के धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ‘डंप विरोधी मोर्चा’ ने विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से परियोजना को कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की, जबकि अधिकारियों ने दावा किया कि यह अत्याधुनिक और प्रदूषण-मुक्त तकनीक पर आधारित परियोजना होगी।
धूधर गांव में बायोगैस प्लांट का विरोध तेज, ग्रामीणों ने परियोजना स्थानांतरित करने की उठाई मांग
पटियाला के धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ‘डंप विरोधी मोर्चा’ ने अपना विरोध तेज कर दिया है। सोमवार को ग्रामीणों और मोर्चा के प्रतिनिधियों ने पटियाला के डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर परियोजना को कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि प्लांट को आबादी से दूर स्थापित किया जाए तो स्थानीय लोगों पर इसके संभावित प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कम आबादी वाले क्षेत्र में प्लांट लगाने की मांग
ज्ञापन में ‘डंप विरोधी मोर्चा’ ने सुझाव दिया कि बायोगैस प्लांट को ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाए, जहां आबादी कम हो या कोई बस्ती न हो। उनका कहना है कि इससे आसपास रहने वाले लोगों पर संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को न्यूनतम किया जा सकेगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से परियोजना पर पुनर्विचार करने की भी अपील की।
नगर निगम अधिकारियों ने दिया भरोसा
बाद में प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त पूजा स्याल ग्रेवाल और संयुक्त आयुक्त मनरीत राणा से भी मुलाकात की।
अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट आधुनिक उच्च तकनीक (High-Tech) पर आधारित होगा, जिसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोका जा सके।
मंडी गोबिंदगढ़ प्लांट का दौरा करने का दिया निमंत्रण
नगर निगम आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की स्पीकरफोन पर मंडी गोबिंदगढ़ स्थित एक समान बायोगैस प्लांट के संचालक से बातचीत भी कराई।
इसके साथ ही अधिकारियों ने ग्रामीणों को उस प्लांट का दौरा करने का निमंत्रण दिया, ताकि वे वहां की कार्यप्रणाली और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को स्वयं देख सकें।
100 करोड़ रुपये की परियोजना
अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित की जा रही है।
उनका कहना है कि परियोजना का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसके संचालन से प्रदूषण न फैले और पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन हो।
हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
Key Highlights:
- धूधर गांव के ग्रामीणों ने प्रस्तावित बायोगैस प्लांट का विरोध किया।
- डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा गया।
- ग्रामीणों ने परियोजना को कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की।
- नगर निगम ने दावा किया कि प्लांट अत्याधुनिक और प्रदूषण-मुक्त तकनीक पर आधारित होगा।
- मंडी गोबिंदगढ़ स्थित समान प्लांट का दौरा करने का निमंत्रण दिया गया।
- HPCL की लगभग 100 करोड़ रुपये की निवेश वाली परियोजना है।
FAQ Section:
Q1. ग्रामीण बायोगैस प्लांट का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट आबादी के नजदीक होने से संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
Q2. ज्ञापन किसे सौंपा गया?
उत्तर: प्रतिनिधिमंडल ने पटियाला के डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा।
Q3. प्रशासन ने क्या जवाब दिया?
उत्तर: अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित बायोगैस प्लांट आधुनिक तकनीक से लैस होगा और इसे प्रदूषण तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
Q4. परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
उत्तर: अधिकारियों के अनुसार, HPCL इस परियोजना में लगभग 100 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।
Q5. क्या ग्रामीणों को किसी अन्य प्लांट का दौरा करने का प्रस्ताव दिया गया?
उत्तर: हां। नगर निगम अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को मंडी गोबिंदगढ़ स्थित समान बायोगैस प्लांट का दौरा करने का निमंत्रण दिया।
Conclusion:
धूधर गांव में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। जहां स्थानीय लोग परियोजना को आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि आधुनिक तकनीक से तैयार यह परियोजना पर्यावरणीय मानकों का पालन करेगी। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच संवाद और तकनीकी जानकारी इस मुद्दे के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

