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पंजाब के माझा क्षेत्र में एथलेटिक्स सुविधाओं की कमी, एशियन गेम्स में खिलाड़ियों की कम मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
माझा क्षेत्र में केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक, GNDU में प्रस्तावित 400 मीटर ट्रैक की योजना तकनीकी कारणों से हुई रद्द
पंजाब के माझा क्षेत्र में एथलेटिक्स के आधुनिक बुनियादी ढांचे की कमी खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में बड़ी चुनौती बन रही है। क्षेत्र में फिलहाल केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक मौजूद है, जबकि गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में प्रस्तावित ट्रैक का निर्माण सरकारी मंजूरी मिलने के बावजूद पूरा नहीं हो सका।
एशियन गेम्स में माझा के खिलाड़ियों की कम मौजूदगी से उठे सवाल
पंजाब के माझा क्षेत्र से एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों की कम मौजूदगी ने खेल सुविधाओं और एथलेटिक्स के बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल से जुड़े लोगों का मानना है कि खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और बेहतर खेल मैदान बेहद जरूरी हैं।
एक समय था जब मिट्टी के ट्रैक पर अभ्यास करने वाले धावक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश और पंजाब का नाम रोशन करते थे। लेकिन अब आधुनिक एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं की जरूरतों को देखते हुए सिंथेटिक ट्रैक की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो गई है।
माझा क्षेत्र में केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, माझा क्षेत्र में फिलहाल केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक है। यह ट्रैक तरनतारन के पुलिस लाइंस परिसर में स्थित है। इसके निर्माण में पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल की भूमिका रही थी।
क्षेत्र में सीमित सुविधाओं के कारण ट्रैक एंड फील्ड के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है।
GNDU में प्रस्तावित ट्रैक की योजना क्यों नहीं हुई पूरी?
अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) में भी सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाने की योजना प्रस्तावित थी। वर्ष 2019 में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया योजना के तहत इस परियोजना के लिए अनुदान को मंजूरी दी थी।
तत्कालीन अवर सचिव ओपी चंचल की ओर से जारी पत्र में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के प्रस्ताव को मंजूरी देने की जानकारी दी गई थी।
परियोजना की अनुमानित लागत 8.31 करोड़ रुपये थी। मंत्रालय ने इसके लिए 7 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जबकि शेष राशि विश्वविद्यालय को वहन करनी थी।
2.10 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी हुई
सरकारी पत्र के अनुसार, GNDU में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण के लिए 2.10 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने की मंजूरी दी गई थी। यह राशि खेलो इंडिया योजना के सामान्य घटक के तहत दी जानी थी।
आगे की किस्त जारी करने के लिए परियोजना की प्रगति रिपोर्ट, खर्च का विवरण और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक था।
हालांकि, परियोजना टेंडरिंग के चरण में ही रद्द हो गई। GNDU के खेल विभाग के निदेशक कंवर मंदीप सिंह के अनुसार, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए परियोजना रद्द कर दी थी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली किस्त के रूप में मिली राशि तुरंत वापस कर दी थी।
GNDU में कैसा ट्रैक बनाने की थी योजना?
विश्वविद्यालय की योजना 400 मीटर लंबा सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाने की थी। इसमें सीधे हिस्से में 10 लेन और बाकी ट्रैक में आठ लेन प्रस्तावित थीं।
इसके अलावा, खिलाड़ियों के वार्म-अप के लिए अलग घुमावदार ट्रैक की भी योजना थी। इसका उद्देश्य ट्रैक को क्लास-वन स्तर का बनाना था, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के योग्य हो सके।
हालांकि, परियोजना रद्द होने के बाद GNDU में इस ट्रैक का निर्माण आगे नहीं बढ़ पाया।
खिलाड़ियों के लिए आधुनिक खेल सुविधाएं क्यों जरूरी?
एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की गति, सहनशक्ति और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए नियमित अभ्यास के साथ उचित सतह और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं भी अहम होती हैं। सिंथेटिक ट्रैक खिलाड़ियों को प्रतियोगिता जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करने का अवसर देते हैं।
माझा क्षेत्र में आधुनिक ट्रैक की सीमित उपलब्धता को देखते हुए खेल सुविधाओं के विस्तार की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है। बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार होने से स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण के अधिक अवसर मिल सकते हैं और उन्हें उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
Key Highlights
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माझा क्षेत्र में फिलहाल केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक होने की जानकारी है।
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यह ट्रैक तरनतारन के पुलिस लाइंस परिसर में स्थित है।
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GNDU में सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना को 2019 में खेलो इंडिया योजना के तहत मंजूरी मिली थी।
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परियोजना की अनुमानित लागत 8.31 करोड़ रुपये थी और मंत्रालय ने 7 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
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पहली किस्त के रूप में 2.10 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई थी।
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GNDU के अनुसार, तकनीकी कारणों से टेंडरिंग चरण में परियोजना रद्द हो गई और राशि वापस कर दी गई।
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प्रस्तावित ट्रैक 400 मीटर का था, जिसमें सीधे हिस्से में 10 लेन और बाकी हिस्से में आठ लेन होनी थीं।
FAQ
प्रश्न 1: पंजाब के माझा क्षेत्र में कितने सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक हैं?
उत्तर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, माझा क्षेत्र में फिलहाल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक है, जो तरनतारन के पुलिस लाइंस परिसर में स्थित है।
प्रश्न 2: GNDU में एथलेटिक ट्रैक बनाने की योजना क्यों रद्द हुई?
उत्तर: GNDU के खेल विभाग के निदेशक कंवर मंदीप सिंह के अनुसार, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए परियोजना टेंडरिंग के चरण में रद्द कर दी थी।
प्रश्न 3: GNDU के प्रस्तावित ट्रैक की लागत कितनी थी?
उत्तर: परियोजना की अनुमानित लागत 8.31 करोड़ रुपये थी। मंत्रालय ने 7 करोड़ रुपये मंजूर किए थे और बाकी राशि विश्वविद्यालय को वहन करनी थी।
प्रश्न 4: GNDU को पहली किस्त के रूप में कितनी राशि मिली थी?
उत्तर: सरकारी पत्र में 2.10 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने की मंजूरी का उल्लेख था। विश्वविद्यालय के अनुसार, परियोजना रद्द होने के बाद यह राशि वापस कर दी गई।
प्रश्न 5: प्रस्तावित सिंथेटिक ट्रैक की क्या विशेषताएं थीं?
उत्तर: योजना में 400 मीटर का ट्रैक, सीधे हिस्से में 10 लेन, बाकी हिस्से में आठ लेन और वार्म-अप के लिए अलग घुमावदार ट्रैक शामिल था।
Conclusion
पंजाब के माझा क्षेत्र में एथलेटिक्स के सीमित बुनियादी ढांचे और GNDU में प्रस्तावित सिंथेटिक ट्रैक परियोजना के रद्द होने से आधुनिक खेल सुविधाओं की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण अवसर देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से क्षेत्र में खेल ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

