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झोटा हत्याकांड के बाद फिर सुर्खियों में मानसा, किसान संघर्षों से लेकर नशा विरोधी आंदोलन तक का लंबा इतिहास
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में पंजाब बंद, ऐतिहासिक किसान आंदोलनों और राजनीतिक प्रतिरोध की धरती मानसा में न्याय और जवाबदेही की मांग तेज
पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। गुरुवार को पंजाब बंद के आह्वान के बीच मानसा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। किसान संघर्षों, जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलनों और राजनीतिक प्रतिरोध का लंबा इतिहास रखने वाला यह जिला अब नशे के खिलाफ लड़ाई और न्याय की मांग को लेकर सुर्खियों में है।
पंजाब के मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। इस घटना के विरोध में गुरुवार को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। किसान संगठनों, व्यापारियों, कर्मचारी यूनियनों और विपक्षी दलों के समर्थन से यह मामला राज्य की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन गया है।
झोटा हत्याकांड ने मानसा को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कपास की खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले का इतिहास किसान आंदोलनों, सामंती व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष और सत्ता से सवाल करने वाली राजनीतिक परंपराओं से जुड़ा रहा है। अब नशे के खिलाफ अभियान और न्याय की मांग ने इस ऐतिहासिक क्षेत्र को एक नए आंदोलन के केंद्र में ला खड़ा किया है।
H2: किसान संघर्षों और राजनीतिक प्रतिरोध की ऐतिहासिक धरती है मानसा
पंजाब के दक्षिणी हिस्से में स्थित मानसा का इतिहास लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों से जुड़ा रहा है। जिले के कुछ हिस्से ऐतिहासिक रूप से पटियाला और कैथल जैसी रियासतों से जुड़े रहे हैं। कैथल अब हरियाणा में है।
19वीं सदी के दौरान इस क्षेत्र में नामधारी या कूका आंदोलन का प्रभाव भी पहुंचा। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन और सामाजिक अन्याय के खिलाफ व्यापक संघर्ष का हिस्सा बना।
समय के साथ मानसा में किसान आंदोलनों और वामपंथी राजनीतिक गतिविधियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि इस जिले की पहचान केवल कृषि तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे संघर्ष और जन आंदोलनों से भी जोड़ा जाता है।
H2: 1949 में चार मुजारा किसानों की मौत ने इतिहास बदल दिया
मानसा जिले का किशनगढ़ गांव पंजाब के कृषि इतिहास में विशेष स्थान रखता है। यहां 19 मार्च 1949 को पेप्सू मुजारा आंदोलन के दौरान चार किरायेदार किसानों की मौत हो गई थी।
यह आंदोलन सामंती भूमि व्यवस्था और किसानों के शोषण के खिलाफ था। उस दौर में मुजारा किसान जमीन पर खेती करते थे, लेकिन जमीन के अधिकार और उपज पर नियंत्रण को लेकर जमींदारों के साथ उनका संघर्ष चलता था।
इस आंदोलन ने भूमि सुधारों की मांग को मजबूत किया। इसके बाद 1953 में पेप्सू ऑक्यूपेंसी टेनेंट्स एक्ट जैसे कानूनों के जरिए किरायेदार किसानों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
मानसा का यह इतिहास आज भी क्षेत्र में किसान आंदोलनों और सामाजिक न्याय की चर्चा के दौरान याद किया जाता है।
H2: नक्सली गतिविधियों से लेकर किसान आंदोलन तक सक्रिय रहा क्षेत्र
मुजारा आंदोलन के बाद भी मानसा में सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों की परंपरा जारी रही। जिले में नक्सली आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां देखने को मिलीं। बाद के वर्षों में भी यह क्षेत्र किसान संगठनों और वामपंथी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण बना रहा।
2020-2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी मानसा और आसपास के इलाकों से व्यापक भागीदारी देखने को मिली।
ऐतिहासिक रूप से जागीर सिंह जोगा, भगवान सिंह लोंगोवालिया और तेजा सिंह स्वतंत्र जैसे नेताओं ने सामंती भूमि व्यवस्था के खिलाफ संघर्षों में भूमिका निभाई। इन आंदोलनों ने पंजाब में भूमि अधिकारों, किसानों की स्थिति और सामाजिक बराबरी से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया।
H2: पूर्व विधायक हरदेव सिंह अरशी ने बताया मानसा का महत्व
मानसा जिले के बुधलाडा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे हरदेव सिंह अरशी ने कहा कि इस क्षेत्र ने कई शहीद दिए हैं और ऐतिहासिक आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई है।
अरशी के अनुसार, झोटा के लिए न्याय की मांग के साथ-साथ नशे के खिलाफ अभियान भी अब पंजाब की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
उन्होंने द ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि मानसा एक बार फिर पंजाब में नशे के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व करने वाला क्षेत्र बन सकता है।
H2: पंजाब की राजनीति में मालवा क्षेत्र की निर्णायक भूमिका
मानसा पंजाब के मालवा क्षेत्र का हिस्सा है। राज्य की राजनीति में मालवा का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से 69 सीटें आती हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने मालवा क्षेत्र की 69 में से 66 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस परिणाम ने एक बार फिर साबित किया कि मालवा का चुनावी रुझान पंजाब की सत्ता का रास्ता तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
ऐसे में मानसा में उठने वाला कोई बड़ा सामाजिक या राजनीतिक मुद्दा राज्यव्यापी बहस का रूप ले सकता है। झोटा हत्याकांड के बाद नशे की समस्या और सरकार की जवाबदेही को लेकर उठे सवाल भी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखे जा रहे हैं।
H2: फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या का आरोप
परविंदर सिंह झोटा कथित तौर पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चला रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक केमिस्ट की दुकान के बाहर टकराव के दौरान फेसबुक पर घटना को लाइव-स्ट्रीम करते समय उन्हें गोली मार दी गई।
उनकी हत्या के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों और विभिन्न संगठनों ने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने तथा राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
यह मामला अब केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नशे की समस्या, कथित अवैध बिक्री और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी बहस के केंद्र में हैं।
H2: न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़ा परिवार
झोटा के परिवार ने न्याय मिलने तक उनके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी नहीं करने का फैसला किया है। परिवार की इस मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
किसान संगठनों, व्यापारियों, कर्मचारी यूनियनों और विपक्षी दलों ने भी पंजाब बंद के आह्वान का समर्थन किया। इससे स्पष्ट है कि घटना को लेकर कई वर्गों में नाराजगी है।
अब इस मामले में जांच की दिशा, परिवार की मांगों और सरकार की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। हालांकि, हत्या से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की अंतिम स्थिति जांच तथा कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
Key Highlights
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परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में गुरुवार को पंजाब बंद का आह्वान।
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मानसा का इतिहास किसान संघर्षों, भूमि अधिकार आंदोलनों और राजनीतिक प्रतिरोध से जुड़ा है।
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किशनगढ़ गांव में 19 मार्च 1949 को मुजारा आंदोलन के दौरान चार किरायेदार किसानों की मौत हुई थी।
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1953 के पेप्सू ऑक्यूपेंसी टेनेंट्स एक्ट को भूमि अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों में गिना जाता है।
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मानसा ने नक्सली गतिविधियों और 2020-2021 के किसान आंदोलन में भी भागीदारी की।
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पूर्व विधायक हरदेव सिंह अरशी ने नशे के खिलाफ अभियान को पंजाब की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बताया।
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झोटा की हत्या के मामले में CBI जांच और सरकार की जवाबदेही की मांग उठी।
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परिवार ने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही।
FAQ
Q1. परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब बंद क्यों बुलाया गया?
उत्तर: झोटा की हत्या के विरोध में न्याय, निष्पक्ष जांच और राज्य सरकार की जवाबदेही की मांग को लेकर पंजाब बंद का आह्वान किया गया।
Q2. मानसा का किसान आंदोलनों से क्या संबंध है?
उत्तर: मानसा का इतिहास पेप्सू मुजारा आंदोलन, सामंती भूमि व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष और बाद के किसान आंदोलनों से जुड़ा रहा है। 2020-2021 के किसान आंदोलन में भी इस क्षेत्र की भागीदारी रही।
Q3. किशनगढ़ गांव ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: 19 मार्च 1949 को यहां पेप्सू मुजारा आंदोलन के दौरान चार किरायेदार किसानों की मौत हुई थी। यह घटना पंजाब में भूमि अधिकारों और किसान संघर्षों के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Q4. झोटा हत्याकांड में प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: प्रदर्शनकारी CBI जांच, मामले में जवाबदेही और नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Q5. पंजाब की राजनीति में मालवा क्षेत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: मालवा क्षेत्र में पंजाब विधानसभा की 117 में से 69 सीटें हैं। 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने यहां 69 में से 66 सीटें जीती थीं, जिससे राज्य की राजनीति में इस क्षेत्र का महत्व स्पष्ट होता है।
Conclusion
परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने मानसा को एक बार फिर पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। किसान संघर्षों, भूमि अधिकारों और सत्ता से सवाल करने की ऐतिहासिक परंपरा वाले इस जिले में अब नशे के खिलाफ अभियान, न्याय और जवाबदेही की मांग जोर पकड़ रही है। पंजाब बंद और विभिन्न संगठनों के समर्थन के बीच इस मामले की जांच तथा सरकार की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

