पंजाब की सर्कल कबड्डी को मिलेगी ग्लोबल पहचान? 2027 से 2036 तक का रोडमैप तैयार, एशियन गेम्स और ओलंपिक पर नजर

गांवों के खेल मैदानों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की तैयारी, खिलाड़ियों, कोचों और प्रमोटरों ने पेशेवर ढांचा तैयार करने पर दिया जोर

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पंजाब की पारंपरिक सर्कल स्टाइल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए खेल जगत से जुड़े लोगों ने 2027 से 2036 तक का रोडमैप तैयार करने की पहल की है। इसका उद्देश्य इस खेल को दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचाना और भविष्य में एशियन गेम्स तथा ओलंपिक जैसे बड़े मंचों तक ले जाने की संभावनाओं को मजबूत करना है।

पंजाब की मिट्टी से जुड़ी सर्कल स्टाइल कबड्डी को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है। इस खेल से जुड़े खिलाड़ियों, कोचों, प्रमोटरों, कमेंटेटरों और आयोजकों ने इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए लंबे समय की योजना बनाने पर जोर दिया है।

गांवों के खेल मैदानों में लोकप्रिय सर्कल कबड्डी अपनी ताकत, रोमांचक मुकाबलों और पंजाबी संस्कृति से गहरे जुड़ाव के लिए जानी जाती है। अब इस खेल से जुड़े लोग चाहते हैं कि इसे पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकालकर दूसरे देशों में भी लोकप्रिय बनाया जाए।

H2: 2027 से 2036 तक का रोडमैप तैयार करने की पहल

सर्कल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए 2027 से 2036 तक के दशक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान खेल के प्रशासनिक ढांचे, प्रतियोगिताओं के स्तर और अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करने की योजना है।

खेल से जुड़े लोगों का मानना है कि केवल घोषणाओं से यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा। इसके लिए सुनियोजित अभियान, नियमित प्रतियोगिताएं, पेशेवर प्रबंधन और अधिक से अधिक देशों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

H2: एशियन गेम्स और ओलंपिक तक पहुंचने का सपना

सर्कल स्टाइल कबड्डी से जुड़े लोगों की नजर भविष्य में एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े खेल मंचों पर है। हालांकि, फिलहाल इस प्रारूप की अंतरराष्ट्रीय पहुंच सीमित है और इसे बड़े खेल आयोजनों में मान्यता दिलाने के लिए लंबा रास्ता तय करना होगा।

इसके लिए खेल के नियमों को एकरूप बनाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य प्रतियोगिता प्रणाली तैयार करने और अधिक देशों को इस खेल से जोड़ने की जरूरत बताई जा रही है।

H2: नेशनल स्टाइल कबड्डी से मिल सकते हैं अहम सबक

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल या स्टैंडर्ड स्टाइल कबड्डी का सफर सर्कल कबड्डी के लिए मार्गदर्शक बन सकता है। नेशनल स्टाइल कबड्डी को 1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में प्रदर्शित किया गया था और 1990 में इसे एशियन गेम्स में शामिल किया गया।

इसके बाद भारत ने इस प्रारूप में मजबूत पहचान बनाई और पुरुषों तथा महिलाओं की टीमों ने कई स्वर्ण पदक जीते।

सर्कल कबड्डी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस अनुभव से सीख लेते हुए अपनी खेल शैली की अलग पहचान बरकरार रखनी चाहिए और इसे एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में विकसित करना चाहिए।

H2: मनमोहन सिंह ग्रेवाल ने पेशेवर ढांचे पर दिया जोर

खेल प्रमोटर मनमोहन सिंह ग्रेवाल, जिन्हें मोहना जोधा के नाम से भी जाना जाता है, का मानना है कि सर्कल कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने की पूरी क्षमता है।

उनके अनुसार, इस खेल को पेशेवर प्रशासनिक ढांचे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाने वाले नियमों और दूसरे देशों की भागीदारी की जरूरत है। उनका मानना है कि इन कदमों से सर्कल कबड्डी को पंजाब से बाहर भी बड़ा दर्शक वर्ग मिल सकता है।

H2: बलबीर सिंह ने पारंपरिक पहचान बनाए रखने की बात कही

कबड्डी खिलाड़ी बलबीर सिंह ने कहा कि सर्कल स्टाइल कबड्डी की अपनी अलग पहचान और प्रशंसक हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ते हुए इस खेल के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने खेल के स्तर को बेहतर बनाने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अधिक अवसर देने की जरूरत पर भी जोर दिया।

H2: मख्खन अली ने कमेंट्री और प्रसारण को बताया अहम

कबड्डी कमेंटेटर मख्खन अली का मानना है कि सर्कल कबड्डी को नए दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अच्छी कमेंट्री, उच्च गुणवत्ता वाला प्रसारण और नियमित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट महत्वपूर्ण हैं।

उनके अनुसार, इस खेल को अधिक मीडिया कवरेज और ऑनलाइन पहुंच की जरूरत है, ताकि इसकी लोकप्रियता बढ़े और दूसरे देशों के दर्शक भी इससे जुड़ सकें।

H2: कोच मन्नू घलोटी ने युवाओं और महिला खिलाड़ियों पर दिया जोर

कबड्डी कोच मन्नू घलोटी ने कहा कि सर्कल कबड्डी के भविष्य के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी जरूरी है। इसके लिए उचित प्रशिक्षण, योग्य कोच, एकसमान नियम और युवा खिलाड़ियों के लिए नियमित प्रतियोगिताओं की जरूरत है।

उन्होंने महिला खिलाड़ियों के लिए भी अधिक अवसर पैदा करने की अहमियत बताई। उनके अनुसार, मजबूत बुनियाद के बिना लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल करना मुश्किल होगा।

H2: जग रूप सिंह जरखड़ ने अलग अंतरराष्ट्रीय पहचान की वकालत की

खेल पत्रकार, जमीनी स्तर के खेल प्रमोटर और सामाजिक कार्यकर्ता जग रूप सिंह जरखड़ ने कहा कि सर्कल स्टाइल कबड्डी को एक अलग अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। वह जरखड़ खेलों के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उनके अनुसार, सर्कल और नेशनल स्टाइल कबड्डी के बीच अंतर को खत्म करने के बजाय सर्कल कबड्डी की पारंपरिक पहचान बनाए रखते हुए इसके लिए अलग अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना चाहिए।

उन्होंने एकसमान नियमों, व्यवस्थित प्रतियोगिताओं, संस्थागत सहयोग और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रचार को इस खेल की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Key Highlights

  • पंजाब की सर्कल स्टाइल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की पहल।

  • 2027 से 2036 तक का रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव।

  • भविष्य में एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे मंचों तक पहुंचने का लक्ष्य।

  • खेल के नियमों को एकसमान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य बनाने पर जोर।

  • दूसरे देशों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नियमित टूर्नामेंट आयोजित करने की जरूरत।

  • अच्छी कमेंट्री, प्रसारण और मीडिया कवरेज को महत्वपूर्ण बताया गया।

  • युवा और महिला खिलाड़ियों के लिए अधिक अवसर पैदा करने की सिफारिश।

  • सर्कल कबड्डी की पारंपरिक पहचान बनाए रखते हुए इसे अलग अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में विकसित करने पर जोर।

FAQ

Q1. सर्कल स्टाइल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए क्या योजना है?

उत्तर: खेल से जुड़े लोगों ने 2027 से 2036 तक का रोडमैप तैयार करने की पहल की है। इसमें प्रशासनिक ढांचे, नियमित प्रतियोगिताओं और अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करने पर जोर है।

Q2. क्या सर्कल कबड्डी को एशियन गेम्स और ओलंपिक में शामिल कर लिया गया है?

उत्तर: नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह भविष्य का लक्ष्य है। इसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए अभी कई चरणों पर काम करना होगा।

Q3. सर्कल कबड्डी की अंतरराष्ट्रीय प्रगति में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

उत्तर: एकसमान नियम, पेशेवर प्रबंधन, दूसरे देशों की भागीदारी, नियमित टूर्नामेंट और बेहतर मीडिया कवरेज इसकी प्रमुख जरूरतें हैं।

Q4. नेशनल स्टाइल कबड्डी से क्या सीख मिल सकती है?

उत्तर: इसके सफर से एकसमान नियमों, संस्थागत सहयोग, व्यवस्थित प्रतियोगिताओं और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की अहमियत समझी जा सकती है।

Q5. सर्कल कबड्डी में महिला खिलाड़ियों के लिए क्या जरूरी है?

उत्तर: महिला खिलाड़ियों के लिए अधिक अवसर, योग्य कोचिंग, नियमित प्रतियोगिताएं और मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई है।

Conclusion

पंजाब की सर्कल स्टाइल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए खेल जगत से जुड़े लोगों ने 2027 से 2036 तक की योजनाबद्ध मुहिम का विचार पेश किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकसमान नियमों, पेशेवर प्रबंधन, युवा और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी तथा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की जरूरत होगी। एशियन गेम्स और ओलंपिक तक पहुंचना अभी लंबी अवधि का लक्ष्य है, लेकिन लगातार और सामूहिक प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।Screenshot_11

Edited By: Atul Sharma

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