जलियांवाला बाग हत्याकांड की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत पर मंथन, GNDU में पुस्तक का विमोचन

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में आयोजित चर्चा में इतिहास, साहित्य और लोक स्मृति के जरिए जलियांवाला बाग त्रासदी के प्रभावों को समझने की कोशिश

On

जलियांवाला बाग हत्याकांड केवल भारतीय इतिहास की एक बड़ी राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि पीढ़ियों की भावनात्मक और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा भी रहा है। GNDU की जलियांवाला बाग चेयर ने इसी विरासत पर पुस्तक विमोचन और चर्चा का आयोजन किया।

 

जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया, लेकिन इसका असर राजनीति तक सीमित नहीं रहा। इस त्रासदी ने साहित्य, लोक स्मृति और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में भी अपनी स्थायी जगह बनाई। इसी सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रभाव को सामने लाने के लिए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU), अमृतसर की जलियांवाला बाग चेयर की ओर से पुस्तक विमोचन और विशेष चर्चा आयोजित की गई।

‘History, Literature, Folklore and the Jallianwala Bagh Massacre’ पुस्तक का विमोचन

कार्यक्रम का संचालन जलियांवाला बाग चेयर की चेयरपर्सन प्रो. अमनदीप बाल ने किया। उन्होंने चेयर के तहत किए गए शोध कार्यों और आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक ‘History, Literature, Folklore and the Jallianwala Bagh Massacre’ प्रस्तुत की। पुस्तक को उन अकादमिक और शोधकर्ताओं को समर्पित किया गया है, जो बहुआयामी शोध के जरिए जलियांवाला बाग हत्याकांड का दस्तावेजीकरण करने में जुटे हैं।

इतिहास और साहित्य के रिश्ते पर चर्चा

कार्यक्रम में पूर्व राजनयिक और प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह की रचनाओं के अनुवादक नवदीप सिंह सूरी के साथ साहित्य एवं इतिहास के विद्वान प्रो. हरीश शर्मा और प्रो. सुखदेव सिंह सोहल पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए।

नवदीप सिंह सूरी ने BBC के दक्षिण एशिया संवाददाता जस्टिन रॉलट के साथ हुई अपनी बातचीत का उल्लेख किया। जस्टिन रॉलट, उस सर सिडनी रॉलट के परपोते हैं, जिनसे जुड़े आयोग ने दमनकारी रॉलट एक्ट तैयार किया था। इसी कानून के खिलाफ देशभर में असंतोष बढ़ा और इसके बाद की परिस्थितियों ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार की।

नानक सिंह और ‘खूनी वैसाखी’ का संदर्भ

सूरी ने अपने परिवार और जलियांवाला बाग की त्रासदी के बीच ऐतिहासिक संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके दादा और प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह जलियांवाला बाग हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल थे। बाद में उन्होंने उस दिन की भयावहता पर आधारित ‘खूनी वैसाखी’ लिखी थी।

सूरी ने बताया कि जस्टिन रॉलट ने भी अपने परदादा और जलियांवाला बाग हत्याकांड के ऐतिहासिक संदर्भों पर विचार करते हुए ‘The Sins of the Great-Grandfather: The Rowlatt Act and the Amritsar Massacre’ शीर्षक से एक लेख लिखा।

उन्होंने कहा कि इतिहास के दो अलग-अलग पक्षों से जुड़े परिवारों के बीच इस तरह का संवाद अतीत और सामूहिक स्मृति को देखने के नए दृष्टिकोण खोल सकता है।

16 बहुभाषी निबंधों का संग्रह है पुस्तक

यह पुस्तक जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़े साहित्य पर आधारित 16 बहुभाषी निबंधों का संकलन है। इसमें अलग-अलग दौर के लेखकों और साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से इस ऐतिहासिक त्रासदी के प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।

पुस्तक में सआदत हसन मंटो, सुभद्रा कुमारी चौहान और कृष्ण चंदर जैसे चर्चित साहित्यकारों की रचनाओं पर चर्चा की गई है। इसके अलावा नवतेज सरना, राजवंती मान और अन्य समकालीन लेखकों के साहित्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

पुस्तक में भीष्म साहनी से जुड़ी लोकप्रिय कविता और गीत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ जैसी मुख्यधारा की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का भी विश्लेषण किया गया है।

साहित्य ने संभालकर रखी त्रासदी की स्मृति

प्रो. हरीश शर्मा ने पुस्तक में शामिल अंग्रेजी और हिंदी शोध-पत्रों की समीक्षा करते हुए उनके अकादमिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग साहित्यिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण जलियांवाला बाग हत्याकांड को समझने की व्यापक तस्वीर पेश करते हैं।

समीक्षा के दौरान उन्होंने सआदत हसन मंटो की रचनाओं और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं के प्रभावशाली अंशों का संदर्भ भी दिया। इन साहित्यिक कृतियों के माध्यम से जलियांवाला बाग से जुड़ा दर्द, स्मृति और प्रतिरोध लंबे समय तक संरक्षित रहा है।

Key Highlights:

  • GNDU की जलियांवाला बाग चेयर ने पुस्तक विमोचन और चर्चा आयोजित की।
  • ‘History, Literature, Folklore and the Jallianwala Bagh Massacre’ पुस्तक प्रस्तुत की गई।
  • पुस्तक में 16 बहुभाषी निबंध शामिल हैं।
  • कार्यक्रम में नवदीप सिंह सूरी, प्रो. हरीश शर्मा और प्रो. सुखदेव सिंह सोहल शामिल हुए।
  • नानक सिंह की ‘खूनी वैसाखी’ और जलियांवाला बाग के प्रत्यक्षदर्शी अनुभवों पर चर्चा हुई।
  • मंटो, सुभद्रा कुमारी चौहान, कृष्ण चंदर और समकालीन लेखकों के साहित्य का विश्लेषण पुस्तक में किया गया है।
  • चर्चा में साहित्य के जरिए त्रासदी, सामूहिक स्मृति और प्रतिरोध को संरक्षित किए जाने पर जोर दिया गया।

FAQ Section:

सवाल: GNDU में किस विषय पर पुस्तक जारी की गई?
जवाब: जलियांवाला बाग हत्याकांड के इतिहास, साहित्य और लोक स्मृति से जुड़े विषयों पर आधारित ‘History, Literature, Folklore and the Jallianwala Bagh Massacre’ पुस्तक प्रस्तुत की गई।

सवाल: पुस्तक में कितने निबंध शामिल हैं?
जवाब: पुस्तक 16 बहुभाषी निबंधों का संकलन है, जिनमें जलियांवाला बाग हत्याकांड से संबंधित साहित्यिक और ऐतिहासिक पहलुओं का अध्ययन किया गया है।

सवाल: ‘खूनी वैसाखी’ का जलियांवाला बाग से क्या संबंध है?
जवाब: नानक सिंह जलियांवाला बाग हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल थे। उन्होंने बाद में इस त्रासदी और उस दिन देखी गई हिंसा पर आधारित ‘खूनी वैसाखी’ लिखी थी।

सवाल: चर्चा में किन साहित्यकारों की रचनाओं का उल्लेख हुआ?
जवाब: चर्चा में सआदत हसन मंटो और सुभद्रा कुमारी चौहान की रचनाओं के साथ पुस्तक में शामिल अन्य साहित्यकारों के योगदान पर भी चर्चा की गई।

Conclusion:
जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास की ऐसी त्रासदी है, जिसकी स्मृति राजनीति के साथ-साथ साहित्य, लोककथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में भी जीवित रही है। GNDU की जलियांवाला बाग चेयर की यह पहल इसी विरासत को अकादमिक शोध और साहित्यिक दृष्टिकोण से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।Screenshot_1259

Edited By: Atul Sharma

खबरें और भी हैं

शिक्षक दिवस पर शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सुखजीत कौर का सम्मान, राज्य पुरस्कार मिलने पर मिली बधाइयां

Advertisement

नवीनतम

शिक्षक दिवस पर शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सुखजीत कौर का सम्मान, राज्य पुरस्कार मिलने पर मिली बधाइयां शिक्षक दिवस पर शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सुखजीत कौर का सम्मान, राज्य पुरस्कार मिलने पर मिली बधाइयां
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राज्य पुरस्कार प्राप्त शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सुखजीत कौर को सम्मानित किया गया।...
यमुनानगर में ‘उत्तर-दक्षिण’ शास्त्रीय संगीत श्रृंखला, विद्यार्थियों ने जाना भारतीय संगीत का समृद्ध विरासत
अमृतसर में मतदाता सूची SIR की समीक्षा, E-Roll Observer राजीव प्रशर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
साहा इंडस्ट्रियल एरिया में फायर सेफ्टी पर सवाल, 300 से ज्यादा यूनिट के बावजूद स्थायी फायर टेंडर नहीं
अमृतसर में तारों का जाल बना खतरा, बिजली और इंटरनेट केबलों की अव्यवस्था से बढ़ी हादसे की आशंका
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software