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PU के लीडरशिप कैंप ने बदली 19 छात्राओं की जिंदगी, पढ़ाई छोड़ने का फैसला लिया वापस
पंजाब यूनिवर्सिटी के सात दिवसीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर ने 92 विद्यार्थियों को दी नई सोच, 19 छात्राओं ने पढ़ाई जारी रखने का लिया संकल्प।
पंजाब यूनिवर्सिटी के यूथ वेलफेयर विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय लीडरशिप कैंप ने कई छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। कैंप में शामिल 19 छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ने का अपना फैसला बदलते हुए शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया।
पंजाब यूनिवर्सिटी के लीडरशिप कैंप से छात्रों को मिली नई दिशा
पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के यूथ वेलफेयर विभाग द्वारा चंडीगढ़ में आयोजित सात दिवसीय लीडरशिप ट्रेनिंग कैंप ने कई विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। कैंप में भाग लेने वाली 19 छात्राओं, जो किसी न किसी कारण से पढ़ाई छोड़ने पर विचार कर रही थीं, ने अब अपनी शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया है।
यूथ वेलफेयर विभाग के निदेशक सुखजिंदर ऋषि ने बताया कि यह बदलाव कैंप के दौरान मिले अनुभवों, आत्मविश्वास और सकारात्मक माहौल का परिणाम है।
92 विद्यार्थियों ने लिया भाग, लुधियाना से पहुंचे 44 छात्र
हाल ही में आयोजित इस नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर में कुल 92 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से 44 छात्र-छात्राएं लुधियाना जिले के 15 कॉलेजों से शामिल हुए थे।कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
मोबाइल से निकलकर अनुशासित दिनचर्या की ओर बढ़े छात्र
गोविंद नेशनल कॉलेज, नरंगवाल के छात्र प्रभजोत सिंह ने बताया कि कैंप में शामिल होने से पहले उनकी दिनचर्या देर रात तक जागने, देर से उठने और अधिक समय मोबाइल फोन पर बिताने तक सीमित थी।
उन्होंने कहा कि कैंप के दौरान सुबह 5 बजे उठना, व्यायाम और ध्यान करना, व्याख्यान सुनना तथा मंच पर बोलने जैसी गतिविधियों ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
छात्रा बोली- अब पढ़ाई नहीं छोड़ूंगी
कैंप में शामिल एक ग्रामीण कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि वह लंबे समय से अवसाद की दवा ले रही थी और पारिवारिक दबाव के कारण स्नातक के बाद पढ़ाई छोड़ने का मन बना चुकी थी।
उन्होंने कहा कि सात दिनों के दौरान मंच पर बोलने, विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने और हर रात डायरी लिखने की आदत ने उन्हें अपनी क्षमताओं का एहसास कराया।
छात्रा के अनुसार, अब वह अपने भविष्य को लेकर पहले से अधिक आशावादी है और अपनी शिक्षा जारी रखना चाहती है।
हर दिन का कार्यक्रम था पूरी तरह अनुशासित
यूथ वेलफेयर विभाग के निदेशक सुखजिंदर ऋषि ने बताया कि कैंप का प्रत्येक दिन विद्यार्थियों को उनकी सहज दिनचर्या से बाहर निकालने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
उन्होंने कहा कि सुबह की शारीरिक गतिविधियों से लेकर रात में डायरी लिखने तक हर कार्यक्रम छात्रों में अनुशासन, आत्मचिंतन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए बनाया गया था। कई विद्यार्थियों ने पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर भी देखा।
मानसिक और बौद्धिक विकास पर दिया गया जोर
यूथ वेलफेयर विभाग के सहायक निदेशक तेजिंदर गिल ने विद्यार्थियों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।
उन्होंने छात्रों को नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने और 'Atomic Habits' जैसी प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
Key Highlights:
- पंजाब यूनिवर्सिटी के सात दिवसीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर का सकारात्मक प्रभाव।
- 19 छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ने का फैसला वापस लिया।
- कैंप में कुल 92 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
- 44 प्रतिभागी लुधियाना जिले के 15 कॉलेजों से पहुंचे।
- सुबह 5 बजे से अनुशासित दिनचर्या और नेतृत्व गतिविधियां आयोजित हुईं।
- छात्रों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर।
FAQ Section
प्रश्न 1: यह लीडरशिप कैंप किसने आयोजित किया था?
पंजाब यूनिवर्सिटी के यूथ वेलफेयर विभाग ने चंडीगढ़ में इस सात दिवसीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया।
प्रश्न 2: कैंप में कितने छात्रों ने भाग लिया?
कुल 92 विद्यार्थियों ने इस कैंप में भाग लिया।
प्रश्न 3: कितनी छात्राओं ने पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया?
कैंप के बाद 19 छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ने का विचार बदलते हुए अपनी शिक्षा जारी रखने का फैसला किया।
प्रश्न 4: कैंप में छात्रों को क्या सिखाया गया?
अनुशासित दिनचर्या, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, ध्यान, व्यायाम, सार्वजनिक भाषण, डायरी लेखन और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
Conclusion
पंजाब यूनिवर्सिटी का यह नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और मानसिक विकास की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुआ। 19 छात्राओं का पढ़ाई जारी रखने का निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और प्रेरणा युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

