पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से सेवाएं प्रभावित, चंडीगढ़-मोहाली में शुक्रवार तक बढ़ा पेन-डाउन स्ट्राइक

सरकार ने लागू किया ‘नो वर्क, नो पे’ नियम, जिलों में कर्मचारियों ने ली सामूहिक आकस्मिक छुट्टी; मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

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पंजाब के हजारों सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को चंडीगढ़ और मोहाली में पेन-डाउन स्ट्राइक की, जबकि जिलों में कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया। वार्ता विफल रहने के बाद चंडीगढ़-मोहाली में हड़ताल शुक्रवार तक बढ़ा दी गई।

 

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। चंडीगढ़ और मोहाली में हजारों कर्मचारियों ने पेन-डाउन स्ट्राइक की, जबकि प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर विरोध जताया। इसके चलते कई सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा। सरकार ने आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ ‘नो वर्क, नो पे’ का नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।

सुबह से ही कर्मचारी अपने कार्यालयों में काम से दूर रहे और विरोध के प्रतीक के तौर पर ‘रोष’ लिखे बैज लगाए। कर्मचारियों ने पंजाब सिविल सचिवालय परिसर में मार्च निकाला और बाद में विरोध रैली की। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

चंडीगढ़ और मोहाली में शुक्रवार तक जारी रहेगा आंदोलन

दोपहर में अधिकारियों और सांझा मुलाजिम मंच के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद पंजाब सिविल सचिवालय, मिनी सचिवालय, निदेशालयों और चंडीगढ़-मोहाली स्थित अन्य सरकारी कार्यालयों में तैनात मिनिस्टीरियल स्टाफ ने हड़ताल को शुक्रवार तक बढ़ाने का फैसला किया।

पहले यह आंदोलन केवल एक दिन के पेन-डाउन स्ट्राइक के रूप में प्रस्तावित था।

सांझा मुलाजिम मंच के संयोजक सुखचैन खेड़ा ने कहा कि सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच सहमति नहीं बन सकी, इसलिए चंडीगढ़ और मोहाली में हड़ताल को शुक्रवार तक जारी रखने का फैसला लिया गया है।

‘अनधिकृत अवकाश’ के आदेश वापस लेने की मांग

कर्मचारी नेताओं को प्रमुख सचिव (सामान्य प्रशासन) केके यादव के साथ बातचीत के लिए बुलाया गया था। बताया गया कि बैठक में अधिकारियों ने कर्मचारियों से आंदोलन वापस लेने और बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान करने की अपील की।

हालांकि, यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे तभी आंदोलन वापस लेंगे, जब सरकार 27 अगस्त को सामूहिक आकस्मिक अवकाश के दौरान अनुपस्थित रहे कर्मचारियों की छुट्टी को ‘अनधिकृत अवकाश’ घोषित करने वाले आदेश वापस लेगी।

यही मुद्दा कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है।

सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश दिया

कर्मचारियों के आंदोलन के बीच सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ के तहत कार्रवाई की जाए। सरकार के इस कदम को आंदोलन पर सख्ती बरतने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव साहिल शर्मा ने कहा कि सरकार की इस कार्रवाई से कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके मुताबिक, इससे कर्मचारियों का अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प और मजबूत हुआ है।

सरकारी कामकाज पर पड़ा असर

कर्मचारियों के आंदोलन से कई सरकारी कार्यालयों में मिनिस्टीरियल कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बड़े स्तर पर प्रभावित नहीं हुईं।

राज्यभर में कर्मचारियों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। चंडीगढ़ और मोहाली में सचिवालय सहित विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों के काम से दूर रहने के कारण प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ा।

कर्मचारियों ने सरकार पर लगाया ‘वादा पूरा न करने’ का आरोप

यूनियन नेता अलका चोपड़ा ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से सत्ता में आने से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसका राजनीतिक असर आगामी विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ दल को भुगतना पड़ सकता है।

अलका चोपड़ा और कई अन्य कर्मचारियों ने संगरूर के शेरों गांव के मोहंजित सिंह के समर्थन में भूख हड़ताल भी की। मोहंजित सिंह पर आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव में आयोजित कार्यक्रम के बाहर विरोध करने के बाद पुलिस ने उनके साथ कथित तौर पर प्रताड़ना की।

DA बढ़ोतरी को लेकर भी कर्मचारी संगठनों में नाराजगी

कई यूनियन नेताओं ने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी के फैसले का भी जिक्र किया।

हालांकि, जिलों में तैनात पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के सदस्यों ने चंडीगढ़ और मोहाली के कर्मचारियों की तरह शुक्रवार तक हड़ताल बढ़ाने का फैसला नहीं किया।

Key Highlights:

• पंजाब में हजारों सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया।
• चंडीगढ़ और मोहाली में पेन-डाउन स्ट्राइक शुक्रवार तक बढ़ाई गई।
• जिलों में कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर विरोध जताया।
• सरकार ने आंदोलन में शामिल कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ लागू करने के निर्देश दिए।
• कर्मचारी 27 अगस्त के सामूहिक अवकाश को ‘अनधिकृत अवकाश’ घोषित करने वाले आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
• सरकारी कार्यालयों में मिनिस्टीरियल कामकाज प्रभावित हुआ।
• सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बड़े स्तर पर प्रभावित नहीं हुईं।
• यूनियन नेताओं ने सरकार पर कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया।

FAQ Section:

Q1. पंजाब में सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को क्या प्रदर्शन किया?
Ans. चंडीगढ़ और मोहाली में कर्मचारियों ने पेन-डाउन स्ट्राइक की, जबकि जिलों में कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर विरोध जताया।

Q2. चंडीगढ़ और मोहाली में हड़ताल कब तक जारी रहेगी?
Ans. कर्मचारी नेताओं ने वार्ता विफल होने के बाद हड़ताल को शुक्रवार तक बढ़ाने का फैसला किया है।

Q3. सरकार ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
Ans. सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों को प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ ‘नो वर्क, नो पे’ के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

Q4. कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
Ans. कर्मचारी 27 अगस्त के सामूहिक आकस्मिक अवकाश को ‘अनधिकृत अवकाश’ घोषित करने वाले सरकारी आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

Conclusion:

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। वार्ता विफल होने के बाद चंडीगढ़ और मोहाली में आंदोलन शुक्रवार तक बढ़ गया है, जबकि सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ के जरिए सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत ही गतिरोध खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकती है।Screenshot_1335

Edited By: Atul Sharma

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