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अमृतपाल सिंह की पार्टी में बगावत के संकेत! जिला प्रधानों को हटाने पर भड़की ड्राफ्टिंग कमेटी, फैसले को बताया मनमाना
अकाली दल वारिस पंजाब दे में संगठन भंग करने के फैसले पर अंदरूनी विवाद गहराया। प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने संयुक्त कार्यालय सचिव जतिंदर सिंह मेहता के फैसले का विरोध करते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग उठाई।
अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे में संगठनात्मक फैसले को लेकर अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। पार्टी द्वारा मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को भंग कर सभी जिला प्रधानों को तत्काल प्रभाव से हटाने के एक दिन बाद प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने इस फैसले का विरोध किया है। कमेटी ने इसे बिना सहमति लिया गया मनमाना फैसला बताते हुए पार्टी नेतृत्व से कई गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पंजाब की राजनीति में अकाली दल वारिस पंजाब दे (AD-WPD) के भीतर संगठनात्मक विवाद सामने आने के बाद हलचल तेज हो गई है। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी में जिला प्रधानों को हटाने और मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को भंग करने के फैसले पर अब अंदरूनी विरोध शुरू हो गया है।
पार्टी की प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे मनमाना बताया है। कमेटी का कहना है कि संयुक्त कार्यालय सचिव जतिंदर सिंह मेहता ने बिना उसकी सहमति के इतना बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है।
जिला प्रधानों को हटाने के फैसले पर बढ़ा विवाद
दरअसल, एक दिन पहले अकाली दल वारिस पंजाब दे ने अपना मौजूदा संगठनात्मक ढांचा भंग करने का फैसला लिया था। इसके तहत सभी जिला प्रधानों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया गया।
इस फैसले के बाद प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
कमेटी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि संगठनात्मक ढांचे को भंग करने से पहले न तो उसकी सहमति ली गई और न ही पार्टी के भीतर उठाए गए गंभीर सवालों की निष्पक्ष जांच कराई गई।
कमेटी ने सवाल उठाया कि जब पार्टी की नियुक्तियों, आंतरिक कामकाज और पंथक सिद्धांतों को लेकर सवाल उठ रहे थे, तब जिला प्रधानों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
20 अक्टूबर को वर्किंग प्रेसिडेंट को भेजी गई थी 6 पन्नों की शिकायत
ड्राफ्टिंग कमेटी के मुताबिक, 20 अक्टूबर को पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट तरसेम सिंह को छह पन्नों का विस्तृत पत्र सौंपा गया था।
तरसेम सिंह जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के पिता हैं।
इस पत्र में चार व्यक्तियों की कथित गतिविधियों और सरकार तथा भारतीय एजेंसियों के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
कमेटी का आरोप है कि इन सवालों का जवाब देने और तथ्यों के आधार पर जांच कराने के बजाय संगठनात्मक ढांचे को ही भंग कर दिया गया।
उसने दावा किया कि यह कार्रवाई पार्टी के भीतर असहमति जताने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की कोशिश हो सकती है।
27 अक्टूबर की बैठक में उठे कई गंभीर मुद्दे
कमेटी ने बताया कि 27 अक्टूबर को पंथ प्रधानी के सदस्यों के साथ लंबी बैठक हुई थी।
इस बैठक में वर्किंग प्रेसिडेंट तरसेम सिंह के अलावा अमरजीत सिंह, परमजीत सिंह जौहल, हरभजन सिंह तूर और सुखविंदर सिंह शामिल थे।
कमेटी के अनुसार, बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तथ्यों और सबूतों के साथ चर्चा की गई।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
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पार्टी में नियुक्तियों में कथित तौर पर एक उच्च पद पर तैनात सरकारी कर्मचारी का हस्तक्षेप।
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पार्टी पदाधिकारियों को नई इनोवा गाड़ियां उपलब्ध कराने का मामला।
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सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी।
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चुनावी टिकटों के वितरण को लेकर उठे सवाल।
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पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और पंथक सिद्धांतों से जुड़े मुद्दे।
कमेटी ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
जिला प्रधानों को हटाना संगठनात्मक लोकतंत्र पर सवाल: कमेटी
प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने कहा कि जिला प्रधान लंबे समय से पार्टी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे थे।
ऐसे में उन्हें विश्वास में लिए बिना एक साथ पदों से हटाना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि इससे पार्टी के अंदर संगठनात्मक लोकतंत्र और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कमेटी ने कहा कि किसी भी पंथक संगठन को मजबूत करने के लिए वफादार कार्यकर्ताओं को सवाल उठाने पर सजा देना उचित तरीका नहीं हो सकता।
तरसेम सिंह से कमेटी ने पूछे तीखे सवाल
ड्राफ्टिंग कमेटी ने वर्किंग प्रेसिडेंट तरसेम सिंह से भी कई सवाल किए हैं।
कमेटी ने पूछा कि जब पार्टी के सामने लिखित शिकायतें और गंभीर आपत्तियां रखी गई थीं, तो निष्पक्ष जांच से पहले जिला प्रधानों का संगठनात्मक ढांचा भंग करने का फैसला क्यों लिया गया?
इसके अलावा कमेटी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पार्टी में अब असहमति जताने और सवाल पूछने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है?
क्या पंथक सिद्धांतों और पार्टी की कार्यप्रणाली पर चर्चा करने के बजाय संगठन की सारी शक्तियां कुछ लोगों तक सीमित करने की कोशिश की जा रही है?
फिलहाल इस विवाद पर पार्टी नेतृत्व की ओर से विस्तृत आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
Key Highlights
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अकाली दल वारिस पंजाब दे में संगठनात्मक विवाद सामने आया।
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पार्टी ने सभी जिला प्रधानों को तत्काल प्रभाव से पदों से हटाया।
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प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने फैसले का विरोध किया।
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20 अक्टूबर को तरसेम सिंह को छह पन्नों की शिकायत सौंपी गई थी।
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चार व्यक्तियों की कथित गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए।
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27 अक्टूबर की बैठक में सरकारी हस्तक्षेप, इनोवा गाड़ियों, टेंडर और टिकट वितरण पर चर्चा हुई।
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कमेटी ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की।
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पार्टी के अंदर संगठनात्मक लोकतंत्र और पंथक सिद्धांतों को लेकर सवाल उठे।
FAQ Section
Q1. अकाली दल वारिस पंजाब दे में विवाद क्यों हुआ है?
पार्टी द्वारा मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को भंग कर सभी जिला प्रधानों को हटाने के फैसले के बाद प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने इसका विरोध किया है।
Q2. ड्राफ्टिंग कमेटी ने किसके फैसले पर आपत्ति जताई है?
कमेटी ने संयुक्त कार्यालय सचिव जतिंदर सिंह मेहता द्वारा लिए गए संगठनात्मक फैसले को मनमाना और बिना सहमति का बताया है।
Q3. तरसेम सिंह कौन हैं?
तरसेम सिंह अकाली दल वारिस पंजाब दे के वर्किंग प्रेसिडेंट और जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के पिता हैं।
Q4. 20 अक्टूबर को पार्टी नेतृत्व को क्या शिकायत दी गई थी?
कमेटी के अनुसार, छह पन्नों के पत्र में चार व्यक्तियों की कथित गतिविधियों और सरकार तथा भारतीय एजेंसियों से उनके कथित संबंधों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
Q5. 27 अक्टूबर की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में पार्टी नियुक्तियों में कथित सरकारी हस्तक्षेप, पदाधिकारियों को इनोवा गाड़ियां देने, सरकारी टेंडरों और चुनावी टिकट वितरण से जुड़े आरोपों पर चर्चा हुई।
Q6. ड्राफ्टिंग कमेटी की मुख्य मांग क्या है?
कमेटी ने संगठनात्मक फैसले और उठाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
Conclusion
अकाली दल वारिस पंजाब दे में जिला प्रधानों को हटाने के फैसले ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने न केवल संगठनात्मक ढांचे को भंग करने का विरोध किया है, बल्कि पार्टी नियुक्तियों, सरकारी हस्तक्षेप और अन्य मामलों की जांच की मांग भी उठाई है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन सवालों का क्या जवाब देता है और क्या इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकेगा।


