पंजाब में पराली जलाने पर लगेगी और लगाम, खरीफ 2026 के लिए सरकार ने तैयार किया व्यापक IEC प्लान

मास मीडिया अभियान से लेकर खेतों में डेमो और डिजिटल आउटरीच तक पर जोर, किसानों को पराली प्रबंधन के आर्थिक व कृषि लाभ बताए जाएंगे

On

पंजाब ने खरीफ 2026 सीजन में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को और कम करने के लिए नया सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) प्लान तैयार किया है। अभियान में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर की गतिविधियों का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

पंजाब में पराली जलाने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए खरीफ 2026 सीजन में जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने Information, Education and Communication (IEC) का एक विस्तृत प्लान तैयार किया है, जिसमें बड़े पैमाने पर मीडिया अभियान, खेतों में प्रदर्शन, डिजिटल माध्यमों से जागरूकता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को शामिल किया गया है।

यह योजना ऐसे समय तैयार की गई है जब केंद्र सरकार दिल्ली-NCR और आसपास के राज्यों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए राज्यों के साथ समन्वय बढ़ा रही है।

भूपेंद्र यादव ने राज्यों की योजनाओं की समीक्षा की

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को NCR से जुड़े राज्यों की ओर से पेश की गई व्यापक योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मुख्य रूप से हितधारकों की भागीदारी और लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए संचार रणनीति पर चर्चा हुई।

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने अपनी-अपनी IEC योजनाएं Commission for Air Quality Management (CAQM) के समक्ष प्रस्तुत की हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि राज्यों के बीच समन्वित और केंद्रित तरीके से हितधारकों को जोड़ना जरूरी है, ताकि वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयास अधिक प्रभावी बनाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से सफल उपायों को अपनाने और दूसरे क्षेत्रों में भी लागू करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी

पंजाब के संशोधित IEC प्लान में माना गया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अभी भी फसल अवशेष जलाने के मामले सामने आते हैं।

इसके पीछे सीमित समय में धान की पराली के प्रबंधन की चुनौती, किसानों की पुरानी कार्यप्रणाली और खेतों में उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों को प्रमुख कारण माना गया है।

किसानों को बताए जाएंगे पराली प्रबंधन के फायदे

नए अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को यह समझाना होगा कि फसल अवशेष जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करने से आर्थिक और कृषि संबंधी कई फायदे मिल सकते हैं।

अभियान में विशेष रूप से इन पहलुओं पर जोर दिया जाएगा:

  • मिट्टी की सेहत में सुधार
  • गेहूं की समय पर बुवाई
  • फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी का बेहतर इस्तेमाल
  • Custom Hiring Centres (CHCs) के माध्यम से मशीनों की उपलब्धता
  • पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान में कमी

PAU और KVK निभाएंगे अहम भूमिका

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) अभियान को तकनीकी आधार उपलब्ध कराएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ व्याख्यान, खेतों में प्रदर्शन और तकनीकी सलाह आयोजित की जाएगी।

इसके अलावा किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएंगी। PAU और KVKs फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जानकारी भी किसानों तक पहुंचाएंगे।

जमीनी स्तर पर बढ़ेगा जागरूकता अभियान

सरकार की रणनीति केवल विज्ञापन और प्रचार तक सीमित नहीं रहेगी। खेतों में वास्तविक प्रदर्शन, विशेषज्ञों की सलाह और समुदाय आधारित गतिविधियों के जरिए किसानों को वैकल्पिक पराली प्रबंधन तकनीकों से परिचित कराया जाएगा।

इसका उद्देश्य किसानों को केवल पराली न जलाने की अपील करना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और आर्थिक रूप से उपयोगी विकल्प उपलब्ध कराना भी है।

दिल्ली की IEC योजना में सात प्रदूषण स्रोतों पर फोकस

बैठक में दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्तुत IEC योजना पर भी चर्चा हुई। इसमें प्रदूषण फैलाने वाले सात प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है।

इनमें औद्योगिक प्रदूषण, डीजल जनरेटर सेट, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां, नगर निकाय का ठोस कचरा/बायोमास, कृषि अवशेष और वाहनों से होने वाला प्रदूषण शामिल हैं।

औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Industries Department और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें उत्सर्जन मानकों के पालन, स्वीकृत ईंधन के इस्तेमाल और Online Continuous Emission Monitoring Systems (OCEMS) तथा Air Pollution Control Devices (APCDs) की स्थापना पर जोर दिया जाएगा।

Key Highlights:

  • पंजाब ने खरीफ 2026 के लिए नया और व्यापक IEC प्लान तैयार किया।
  • पराली जलाने की घटनाओं में कमी के बावजूद कुछ इलाकों में समस्या जारी है।
  • मास मीडिया, डिजिटल आउटरीच और सामुदायिक भागीदारी पर जोर रहेगा।
  • किसानों को पराली प्रबंधन के आर्थिक और कृषि संबंधी लाभ समझाए जाएंगे।
  • PAU और KVKs प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और खेतों में प्रदर्शन करेंगे।
  • मिट्टी की सेहत और गेहूं की समय पर बुवाई को अभियान में प्रमुखता दी जाएगी।
  • दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने CAQM को अपनी IEC योजनाएं सौंपी हैं।
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों से समन्वित प्रयासों और सफल उपायों को अपनाने की अपील की।

FAQ Section:

पंजाब में पराली जलाने पर रोक के लिए क्या नया कदम उठाया गया है?

पंजाब ने खरीफ 2026 के लिए व्यापक IEC प्लान तैयार किया है, जिसमें मीडिया अभियान, डिजिटल जागरूकता, खेतों में प्रदर्शन और सामुदायिक भागीदारी शामिल है।

पराली प्रबंधन के लिए किसानों को क्या फायदे बताए जाएंगे?

किसानों को मिट्टी की सेहत में सुधार, गेहूं की समय पर बुवाई और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर इस्तेमाल जैसे फायदे बताए जाएंगे।

PAU और KVKs की क्या भूमिका होगी?

PAU और KVKs किसानों को प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी सलाह और खेतों में प्रदर्शन के जरिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं?

IEC योजना के अनुसार, पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर यह समस्या अभी भी बनी हुई है।

किन राज्यों ने IEC प्लान CAQM को सौंपे हैं?

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने Commission for Air Quality Management (CAQM) को अपनी IEC योजनाएं प्रस्तुत की हैं।

Conclusion:

पंजाब में खरीफ 2026 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को और कम करने के लिए जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को अभियान का केंद्र बनाया गया है। सरकार किसानों को पराली प्रबंधन के पर्यावरणीय लाभों के साथ-साथ आर्थिक और कृषि संबंधी फायदे भी समझाने की रणनीति पर काम कर रही है। PAU, KVKs, स्थानीय समुदायों और विभिन्न संचार माध्यमों की भागीदारी से इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।Screenshot_1211

Edited By: Atul Sharma

खबरें और भी हैं

अमृतसर में मेडिकल स्टोर सील, बिना पर्ची बेची जा रही थीं Schedule H और H1 दवाएं; ₹19,912 की दवाएं जब्त

Advertisement

नवीनतम

अमृतसर में मेडिकल स्टोर सील, बिना पर्ची बेची जा रही थीं Schedule H और H1 दवाएं; ₹19,912 की दवाएं जब्त अमृतसर में मेडिकल स्टोर सील, बिना पर्ची बेची जा रही थीं Schedule H और H1 दवाएं; ₹19,912 की दवाएं जब्त
अमृतसर के वाला इलाके में गुरु तेग बहादुर गेट के पास एक मेडिकल स्टोर को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के...
हरियाणा के 16 वर्षीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी के नाम पर इंडोर स्टेडियम की मांग अटकी, हादसे के बाद समिति ने सुझाए सुरक्षा सुधार
नगर निगम की बड़ी कार्रवाई: कंपनी बाग के सामने विवादित जमीन पर बनी दुकान सील, करोड़ों की जमीन मामले में जांच शुरू
करनाल के कर्ण स्टेडियम का रुका काम फिर शुरू, दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य; खेल प्रेमियों में जगी उम्मीद
पंजाब में सिख युवक से कथित हिरासत में मारपीट का मामला गरमाया, संगरूर पुलिस बोली- चोटें खुद पहुंचाई गईं या नहीं, होगी जांच
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software