जीएनए यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल “सृजन: कैनवास ऑफ सिनेमा” का आयोजन

देशभर के 70 से अधिक कॉलेजों ने लिया हिस्सा, सिनेमा, एनीमेशन और एआई तकनीक का दिखा संगम

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जीएनए यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डिजाइन एंड मास कम्युनिकेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल “सृजन: कैनवास ऑफ सिनेमा – फिल्म फेस्टिवल 1.0” में देशभर के 70 से अधिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने भाग लिया। कार्यक्रम में शॉर्ट फिल्म, एआई एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री और कॉस्प्ले जैसे कई आकर्षक आयोजन हुए।

जीएनए यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डिजाइन एंड मास कम्युनिकेशन ने दो दिवसीय “सृजन: कैनवास ऑफ सिनेमा – फिल्म फेस्टिवल 1.0” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने रचनात्मकता, सिनेमा, एनीमेशन और उभरती तकनीकों को एक मंच पर प्रस्तुत किया।

फेस्टिवल में देशभर के 70 से अधिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह क्षेत्र के सबसे सक्रिय छात्र-नेतृत्व वाले सिनेमा महोत्सवों में शामिल हो गया।

फेस्टिवल में शॉर्ट फिल्म, एआई एनिमेटेड मूवी, डॉक्यूमेंट्री, डिजिटल विज्ञापन, म्यूजिक वीडियो और बेस्ट लाइव एवं सीजी इंटीग्रेशन जैसी विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं और फिल्म प्रदर्शन आयोजित किए गए।

इस आयोजन ने फिल्म निर्माण की बदलती दुनिया को उजागर किया, जहां कहानी कहने की कला, तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक सिनेमा को नई दिशा दे रहे हैं।

भव्य उद्घाटन समारोह में यूनिवर्सिटी के चांसलर एस गुरदीप सिंह सीहरा, वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) हेमंत शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. कुनाल बैंस, डीन अकादमिक्स डॉ. मोनिका हंसपाल और ट्रस्टी सदस्य जसलीन सीहरा मौजूद रहे।

कार्यक्रम में पंजाबी फिल्म जगत की प्रसिद्ध हस्तियां भी शामिल हुईं, जिनमें वरिष्ठ अभिनेता सरदार सोही और लोकप्रिय अभिनेता बरिंदर बनी प्रमुख रहे। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और फिल्म उद्योग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

सरदार सोही ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी तेजी से बदल जाए, सिनेमा की आत्मा हमेशा सच्चे अभिनय और सार्थक कहानी में ही बसती है।

बरिंदर बनी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए मनोरंजन उद्योग में अपने संघर्ष और अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन को गहराई से समझना और निरीक्षण करना ही अभिनय और चरित्र निर्माण की असली नींव है।

फिल्म स्क्रीनिंग को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। “कंजक”, “खामोश रिश्ते”, “फेरा” और “किरदार” जैसी फिल्मों ने भावनात्मक कहानियों और सामाजिक मुद्दों के जरिए दर्शकों को प्रभावित किया। इन फिल्मों ने मानवीय भावनाओं, मजदूरों की स्थिति और सामाजिक वास्तविकताओं पर गंभीर चर्चा को भी जन्म दिया।

फेस्टिवल के दूसरे दिन अभिनेता सैमुअल जॉन, मलकीत रौनी, कुर्बान और सरगी कौर बैरिंग ने छात्रों से संवाद किया।

सैमुअल जॉन ने फिल्म निर्माण में आत्मविश्वास, स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार को समझने के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि मलकीत रौनी ने छात्रों को अपने सपनों का निडर होकर पीछा करने के लिए प्रेरित किया।

अभिनेता कुर्बान ने अपनी आगामी फिल्म “एमसीओसीए” के बारे में जानकारी साझा की और फिल्म इंडस्ट्री में अपने संघर्ष तथा अनुभवों से छात्रों को प्रेरित किया।

फेस्टिवल का एक प्रमुख आकर्षण बॉलीवुड थीम पर आधारित कॉस्प्ले कैरेक्टर वॉक रहा, जिसमें छात्रों ने प्रसिद्ध फिल्मी किरदारों को शानदार परिधानों, हाव-भाव और प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया।

इस कॉस्प्ले कार्यक्रम ने पूरे आयोजन में सिनेमा की पुरानी यादों, उत्साह और जीवंत ऊर्जा का माहौल बना दिया।

 
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Edited By: Karan Singh

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