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सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहा पाकिस्तान, यूपी में ATS जांच में बड़ा खुलासा
आईएसआई से जुड़े नेटवर्क पर युवाओं को डिजिटल तरीके से कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप
उत्तर प्रदेश में एटीएस की हालिया कार्रवाई और कई राज्यों में छापेमारी के दौरान पाकिस्तान आधारित गैंगस्टर शाहजाद भट्टी और आईएसआई से जुड़े नेटवर्क द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ और आपराधिक गतिविधियों की ओर आकर्षित करने का मामला सामने आया है।
उत्तर प्रदेश पाकिस्तान की बदलती डिजिटल कट्टरपंथ और स्लीपर सेल भर्ती रणनीति का एक बड़ा निशाना बनकर उभरा है। हाल ही में यूपी एटीएस की गिरफ्तारियों और कई जिलों में चल रही जांच में एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसे कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शाहजाद भट्टी और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से जुड़े हैंडलर सोशल मीडिया के जरिए संचालित कर रहे थे। यह जानकारी वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने दी है।
यह खुलासा हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई के बाद सामने आया है, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों और आतंकवाद निरोधी इकाइयों ने इस सप्ताह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ छापेमारी की।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क एक नए तरह के “हाइब्रिड खतरे” का उदाहरण है, जिसमें ऑनलाइन कट्टरपंथ, जासूसी, संगठित अपराध और भारत विरोधी गुप्त गतिविधियों को आपस में जोड़ा जा रहा है। ये गतिविधियां विकेंद्रीकृत और आम नागरिकों के बीच छिपे मॉड्यूल्स के जरिए संचालित की जा रही हैं, जिन्हें पकड़ना अधिक कठिन होता जा रहा है।जांच एजेंसियों ने करीब 300 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ और डिजिटल जांच की है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि शाहजाद भट्टी एक डिजिटल भर्तीकर्ता के रूप में काम कर रहा था। वह इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के जरिए खासकर उत्तर भारत के युवाओं को अपने जाल में फंसाता था।
अधिकारियों के अनुसार, भट्टी सोशल मीडिया पर लग्जरी गाड़ियां, विदेश यात्राएं, आलीशान विला, महंगे रिसॉर्ट और नकदी के बंडल दिखाकर धन और प्रभावशाली जीवनशैली की छवि पेश करता था।
एजेंसियों को शक है कि इस तरह की सामग्री का उद्देश्य उन युवाओं को आकर्षित करना था, जो पैसा, पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा की तलाश में रहते हैं। बाद में उन्हें धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा और गुप्त गतिविधियों की ओर धकेला जाता था।
अधिकारियों ने कहा कि बड़ी युवा आबादी, स्मार्टफोन की व्यापक पहुंच और सोशल मीडिया नेटवर्क के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण उत्तर प्रदेश इस तरह की गतिविधियों के लिए अधिक संवेदनशील बन गया है।
रामपुर जिले में एजेंसियां स्थानीय युवक गयास पाशा से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं, जो कथित तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से शाहजाद भट्टी के संपर्क में आया था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि जिले के 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग के कई अन्य युवाओं ने भी इस नेटवर्क से ऑनलाइन संपर्क किया हो सकता है।
चिंता तब और बढ़ गई जब यूपी एटीएस ने हाल ही में मेरठ निवासी हिजबुल्लाह अली खान उर्फ तुषार चौहान और दिल्ली के सीमापुरी निवासी समीर खान को गिरफ्तार किया। दोनों की उम्र करीब 20 वर्ष बताई गई है और वे कथित तौर पर ऑनलाइन कट्टरपंथ की शुरुआती प्रक्रिया से गुजर रहे थे।
एक वरिष्ठ एटीएस अधिकारी ने कहा कि ये दोनों कोई प्रशिक्षित आतंकी नहीं थे, बल्कि डिजिटल माध्यम से व्यवस्थित तरीके से प्रभावित किए जा रहे संवेदनशील युवा थे।
उनके कथित हैंडलर शाहजाद भट्टी और उसका सहयोगी आबिद जट्ट इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए पहले भरोसा कायम करते थे और फिर उन्हें कट्टरपंथी सामग्री तथा गुप्त गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देते थे।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने कहा कि राज्य और एनसीआर में सामने आए हालिया मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया कट्टरपंथ, आपराधिक गतिविधियों और जासूसी को विदेशी हैंडलरों द्वारा एक साथ संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। युवाओं को पहले छोटे अपराधों या पैसों के लालच के जरिए फंसाया जाता है और फिर धीरे-धीरे उन्हें गंभीर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की ओर धकेला जाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स और आम नागरिकों के बीच संचालित विकेंद्रीकृत मॉड्यूल्स के कारण ऐसे नेटवर्क का पता लगाना मुश्किल हो गया है, हालांकि यूपी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां समय रहते कार्रवाई करने की कोशिश कर रही हैं।


