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55 बैकलॉग लेक्चरर पदों की भर्ती रद्द होने पर शिक्षकों में नाराजगी
करीब पांच साल से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को लगा बड़ा झटका
जालंधर के शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत 55 बैकलॉग लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे बेरोजगार शिक्षण अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका बताया और सरकार की भर्ती नीतियों पर सवाल उठाए।
जालंधर के शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत 55 बैकलॉग लेक्चरर पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। शिक्षकों ने इसे बेरोजगार शिक्षण अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका करार दिया।
ये पद वर्ष 2021 में ‘घर-घर रोजगार योजना’ के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विज्ञापित किए गए थे। इनमें जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, कॉमर्स, अर्थशास्त्र, भूगोल, हिंदी, अंग्रेजी, भौतिकी और गणित विषयों के लेक्चरर पद शामिल थे।
एक शिक्षक यूनियन ने कहा कि कई उम्मीदवार लगभग पांच वर्षों से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे और उन्होंने तैयारी में काफी समय और संसाधन लगाए थे। उनका आरोप है कि इस चरण में भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से योग्य अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता पैदा हो गई है और सरकार की भर्ती नीतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।पंजाब शिक्षा भर्ती निदेशालय ने 14 मई को जारी एक सार्वजनिक नोटिस में कहा कि 24 अगस्त 2021 को जारी विज्ञापन और बाद में 32 से बढ़ाकर 55 किए गए पदों संबंधी सार्वजनिक सूचना को वापस ले लिया गया है। यह फैसला स्कूल शिक्षा निदेशालय (सेकेंडरी), पंजाब के निर्देशों के बाद लिया गया।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के राज्य अध्यक्ष विक्रमदेव सिंह ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्तियां वापस ली हैं। इससे पहले भी करीब 350 शिक्षकों की रिक्तियां वापस ली जा चुकी हैं।”
उन्होंने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नई भर्तियों का विज्ञापन जारी नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन पदों को अब वापस लिया गया है, उनकी घोषणा पिछली सरकार के कार्यकाल में की गई थी।
गौरतलब है कि स्कूलों में लगभग 40 प्रतिशत छात्र कक्षा आठवीं से बारहवीं तक पढ़ते हैं, जिन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी लेक्चरर कैडर की होती है। हालांकि वर्तमान में इन कक्षाओं को मास्टर कैडर के शिक्षक संभाल रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार लेक्चरर पदों को भरने के लिए केवल पदोन्नति पर निर्भर है। नियमों के अनुसार, 75 प्रतिशत पद पदोन्नति के माध्यम से और शेष 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के जरिए भरे जाने चाहिए।


