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चंडीमंदिर कमांड अस्पताल ने बचाई सैनिक की पत्नी की जान, एयरलिफ्ट कर पहुंचाई किडनी
ब्रेन-डेड सड़क दुर्घटना पीड़ित से अंग प्राप्त कर सेना और पीजीआई रोहतक ने समय रहते कराया सफल प्रत्यारोपण
चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल और पीजीआईएमएस रोहतक के सहयोग से एक ब्रेन-डेड सड़क दुर्घटना पीड़ित की किडनी को एयरलिफ्ट कर सैनिक की पत्नी का सफल प्रत्यारोपण किया गया। भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर ने इस जीवनरक्षक मिशन को तय समय के भीतर पूरा किया।
सेना के एक जवान की पत्नी को नया जीवन तब मिला जब चंडीमंदिर के कमांड अस्पताल ने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीजीआईएमएस), रोहतक के सहयोग से एक ब्रेन-डेड सड़क दुर्घटना पीड़ित से किडनी प्राप्त कर उसका तेजी से हवाई परिवहन सुनिश्चित किया।
पश्चिमी कमान ने रविवार को बताया कि सेना के एविएशन हेलीकॉप्टर ने चंडीमंदिर से रोहतक और वापस तक इस महत्वपूर्ण जीवनरक्षक मिशन को बेहद सटीकता और तय समयसीमा के भीतर पूरा किया।
प्राप्त की गई किडनी को कमांड अस्पताल की मेडिकल टीम के साथ तुरंत एयरलिफ्ट कर चंडीमंदिर लाया गया, जहां सैनिक की पत्नी का आपातकालीन प्रत्यारोपण किया गया।पश्चिमी कमान ने कहा, “यह सफल प्रत्यारोपण सेना की कार्यकुशलता, नागरिक-सैन्य समन्वय और मानवीय प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे एक सैनिक की पत्नी को नया जीवन मिला है।”
पश्चिमी कमान के अंतर्गत आने वाला कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर सेना का प्रमुख अंग प्रत्यारोपण और अंग प्राप्ति केंद्र है। इस क्षेत्र में अस्पताल ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
इसी महीने की शुरुआत में अस्पताल ने अपना पहला हार्ट रिट्रीवल ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया था। इस प्रक्रिया के जरिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती 14 वर्षीय सूडानी बच्चे की जान बचाई गई थी।
उस समय 42 वर्षीय ब्रेन-डेड महिला से हृदय प्राप्त किया गया था और उसे मात्र आधे घंटे के भीतर चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए दिल्ली पहुंचाया गया था।
वह बच्चा गंभीर रूप से बीमार था और जीवन-मृत्यु की स्थिति में था। अस्पताल की अंग प्रत्यारोपण टीम ने उस महिला का लीवर, अग्न्याशय और किडनी भी प्राप्त की थी, जिससे कई अन्य मरीजों को भी अंगदान के माध्यम से नया जीवन मिल सका।
पश्चिमी कमान अस्पताल ने अतीत में भी कई अंग प्रत्यारोपण और अंग प्राप्ति अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। ब्रेन-डेड मरीजों से किडनी, अग्न्याशय, लीवर, हृदय और कॉर्निया प्राप्त कर कई गंभीर मरीजों को नया जीवन दिया गया है।
यह अस्पताल देश के उन शुरुआती संस्थानों में शामिल रहा है जिन्होंने अग्न्याशय प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सशस्त्र बलों में अंगदान की शुरुआत 20वीं सदी के अंतिम वर्षों में की गई थी और तब से सेना इस दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।


