एलपीजी गैस की कमी के बीच सामुदायिक रसोई चलाने वाले आयोजकों के लिए लकड़ी (फायरवुड) सहारा बन गई है। गैस की कमी के कारण उन्हें मेन्यू में भी बदलाव करना पड़ा है और भटूरे और पूरी जैसी चीजों की जगह अब चपातियाँ बनाई जा रही हैं।
अहमदगढ़, मल्हा, मंगत और मुल्लांपुर क्षेत्रों में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजकों का कहना है कि खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए भोजन तैयार करने में उन्होंने एलपीजी का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है।
आयोजकों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में लकड़ी के लट्ठे और पेड़ों की टहनियाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, इसलिए खाना बनाने के लिए यही विकल्प अपनाया जा रहा है।
फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान सामुदायिक रसोई का प्रबंध करने वाले Manpreet Singh और Ravinder Bhaskar ने बताया कि ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुए एलपीजी संकट को देखते हुए उन्होंने कार्यक्रम के दौरान लकड़ी से खाना बनाने का निर्णय लिया।
रविंदर भास्कर ने कहा,
“पहले हम अपने घरों से गैस सिलेंडर लेकर आते थे, लेकिन इस बार गैस की कमी को देखते हुए हमने लकड़ी का इस्तेमाल करने का फैसला किया।”

