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बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी, इंटरनेट से इलाज ने बढ़ाई दवा प्रतिरोध की चिंता
पिछली पर्ची, रिश्तेदारों की सलाह और इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर एंटीबायोटिक लेने का चलन बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खतरे को लेकर आगाह किया।
इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और एंटीबायोटिक दवाओं की पहुंच के कारण लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए खुद इलाज कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल और दवा प्रतिरोध का खतरा बढ़ रहा है।
इंटरनेट के दौर में बीमारी के लक्षण सामने आते ही लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय ऑनलाइन जानकारी तलाशकर खुद दवा लेने लगे हैं। एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर यह प्रवृत्ति स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बन रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न केवल गलत इलाज का कारण बन सकता है, बल्कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी दवा प्रतिरोध की समस्या को भी गंभीर बना सकता है।
कई लोग पिछली बीमारी में डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा, रिश्तेदारों की सलाह या इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। समस्या यह है कि हर संक्रमण के लिए एक जैसी दवा प्रभावी नहीं होती।
बुखार और सर्दी-जुकाम में भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल
डॉक्टरों के मुताबिक बुखार, गले में खराश, खांसी, जुकाम और पेट से जुड़ी कई समस्याओं में लोग अक्सर एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। जबकि इनमें से कई बीमारियां वायरस के कारण हो सकती हैं और वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं।ऐसे में बिना जांच के एंटीबायोटिक लेने से बीमारी का सही कारण पता चलने में देरी हो सकती है और मरीज को अनावश्यक दवा का सेवन करना पड़ सकता है।
इंटरनेट की जानकारी हमेशा व्यक्तिगत इलाज का विकल्प नहीं
सर्च इंजन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन हेल्थ फोरम पर दवाओं, उनकी खुराक और उपचार से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऑनलाइन जानकारी किसी व्यक्ति की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी, पहले से चल रही दवाओं और बीमारी के वास्तविक कारण को ध्यान में नहीं रखती।
इसलिए किसी अन्य व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाली एंटीबायोटिक या किसी पुरानी बीमारी में इस्तेमाल हुई दवा हर बार दूसरे मरीज के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
गलत खुराक और बीच में दवा छोड़ना भी जोखिम
जालियांवाला बाग शहीद मेमोरियल सिविल अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजनीश कुमार ने बताया कि पहले किसी व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाली एंटीबायोटिक किसी दूसरी बीमारी में उपयुक्त नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि खुद से दवा लेने पर गलत खुराक लेने या उपचार सही समय से पहले रोक देने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इससे इलाज प्रभावित होने के साथ दवा प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है।
बार-बार एंटीबायोटिक लेने से बढ़ता है AMR का खतरा
चिकित्सकों के अनुसार एंटीबायोटिक का बार-बार और अनावश्यक इस्तेमाल बैक्टीरिया में दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर सकता है। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहा जाता है।
जब बैक्टीरिया किसी दवा के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं तो पहले प्रभावी रहने वाली दवाएं संक्रमण पर काम करना बंद कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को अधिक मजबूत या महंगी दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है।
बिना पर्ची एंटीबायोटिक खरीदने पर भी चिंता
फार्मासिस्ट और स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक कुछ मरीज बिना नई डॉक्टर की पर्ची के वही एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं, जो उन्होंने पहले इस्तेमाल की थी। इस तरह का व्यवहार बीमारी की सही पहचान में देरी कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक से कुछ लक्षण दब सकते हैं, जिससे किसी गंभीर बीमारी का सही निदान भी प्रभावित हो सकता है।
Key Highlights:
- इंटरनेट और सोशल मीडिया से मिली स्वास्थ्य जानकारी के आधार पर लोग खुद एंटीबायोटिक लेने लगे हैं।
- कई मरीज पुरानी डॉक्टर की पर्ची या रिश्तेदारों की सलाह पर दवा लेते हैं।
- वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती।
- गलत खुराक और उपचार समय से पहले रोकने से समस्या बढ़ सकती है।
- अनावश्यक एंटीबायोटिक इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।
- दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के कारण संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है।
- विशेषज्ञों ने बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी है।
FAQ Section:
क्या हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी होती है?
नहीं। बुखार कई कारणों से हो सकता है और वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती। दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
पुरानी बीमारी में इस्तेमाल की गई एंटीबायोटिक दोबारा ले सकते हैं?
बिना डॉक्टर की सलाह ऐसा करना उचित नहीं है। अलग संक्रमण में अलग उपचार की जरूरत हो सकती है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस क्या है?
जब बैक्टीरिया या अन्य रोगाणु उन दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, जो पहले उनके खिलाफ प्रभावी थीं, तो इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहा जाता है।
गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने का क्या नुकसान हो सकता है?
इससे गलत इलाज, बीमारी के सही निदान में देरी और दवा प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है। गलत खुराक या उपचार बीच में रोकना भी समस्या पैदा कर सकता है।
क्या इंटरनेट पर उपलब्ध मेडिकल जानकारी के आधार पर दवा लेनी चाहिए?
ऑनलाइन जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।
Conclusion:
एंटीबायोटिक दवाओं की आसान उपलब्धता और इंटरनेट पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ने लोगों के लिए जानकारी हासिल करना आसान जरूर किया है, लेकिन इसके साथ खुद से इलाज करने का जोखिम भी बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए। गलत और अनावश्यक इस्तेमाल को रोकना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बढ़ता एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस भविष्य में सामान्य संक्रमणों के इलाज को भी मुश्किल बना सकता है।
