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50 से अधिक पशुओं की मौत के बाद रायपुर कलां गौशाला एनजीओ को सौंपने का फैसला
नगर निगम ने संचालन व रखरखाव के लिए ईओआई आमंत्रित की
रायपुर कलां स्थित गौशाला में हाल ही में 50 से अधिक पशुओं की मौत के बाद Municipal Corporation Chandigarh ने इसके संचालन और रखरखाव को किसी गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) को सौंपने का निर्णय लिया है। इसके लिए इच्छुक संस्थाओं से अभिरुचि पत्र (EOI) मांगे गए हैं।
नगर निगम द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, रायपुर कलां स्थित गौशाला के संचालन और प्रबंधन के लिए सोसायटी, एनजीओ, स्वयं सहायता समूह, चैरिटेबल संस्थान या फर्म आवेदन कर सकती हैं। नगर निगम फिलहाल औद्योगिक क्षेत्र, मलोया, रायपुर कलां, सेक्टर-45 और सेक्टर-25 में कुल पांच गौशालाएं संचालित कर रहा है।
रायपुर कलां की गौशाला करीब 5 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें लगभग 700 गोवंश को रखने की क्षमता है। ईओआई के अनुसार, चयनित संस्था को गौशाला का संचालन और रखरखाव निःशुल्क करना होगा। प्रारंभ में यह जिम्मेदारी तीन वर्षों के लिए दी जाएगी, जिसे वार्षिक प्रदर्शन के आधार पर एक-एक वर्ष बढ़ाया जा सकता है। अधिकतम अवधि पांच वर्ष तक हो सकेगी।
नगर निगम द्वारा चयनित एजेंसी को चौबीसों घंटे गौशाला के संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराने होंगे। इसके अंतर्गत आवारा पशुओं को चारा उपलब्ध कराना, उनकी देखभाल और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना, परिसर की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना शामिल होगा। इन सभी सेवाओं के लिए नगर निगम को कोई भुगतान नहीं करना होगा।
शर्तों के अनुसार, पशुओं को दिया जाने वाला चारा उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए और उनके आहार संबंधी मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य होगा। दुग्ध देने वाले पशुओं से प्राप्त दूध का उपयोग बछड़ों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। शेष दूध और उससे बने उत्पादों के उपयोग की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए संबंधित संस्था को हर महीने बिक्री और उपयोग का विवरण नगर निगम के अधिकृत अधिकारी से सत्यापित कर रिपोर्ट के रूप में जमा कराना होगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य गौशाला में पशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।
