गुरुग्राम के विकास पर अधिकारियों की चिंता, MCG और GMDA प्रमुखों का तीन साल का कार्यकाल तय करने की मांग

बार-बार अधिकारियों के तबादले से योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा असर, जून 2019 से MCG में आठ कमिश्नर बदल चुके हैं

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गुरुग्राम में बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं को लेकर अधिकारियों ने MCG और GMDA के प्रमुखों के लिए कम से कम तीन साल का निश्चित कार्यकाल मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि छोटे कार्यकाल के कारण कई योजनाएं लागू होने से पहले ही प्रभावित हो जाती हैं।

गुरुग्राम में तेजी से बढ़ते शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं के बीच नगर निगम गुरुग्राम (MCG) और गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के शीर्ष अधिकारियों के बार-बार तबादले चिंता का कारण बन गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि दोनों प्रमुख पदों पर लगातार बदलाव से लंबे समय की योजनाओं की गति प्रभावित होती है।

इसी को देखते हुए अधिकारियों ने MCG कमिश्नर और GMDA के प्रमुख के लिए कम से कम तीन साल का सुनिश्चित कार्यकाल तय करने की मांग उठाई है। हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों ने यह मुद्दा शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के समक्ष भी रखा।

MCG में छह साल में आठ कमिश्नर बदले

औसत कार्यकाल 10 महीने से थोड़ा अधिक

रिकॉर्ड के अनुसार, जून 2019 से अब तक MCG में आठ कमिश्नर नियुक्त किए जा चुके हैं। इन अधिकारियों का औसत कार्यकाल 10 महीने से थोड़ा अधिक रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इतने कम समय में किसी बड़े शहर की दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा योजनाओं को तैयार करने, उन्हें मंजूरी दिलाने और जमीन पर लागू करने में मुश्किल आती है।

PC मीणा ने जनवरी 2023 से जनवरी 2024 तक करीब 12 महीने MCG कमिश्नर के रूप में काम किया। उनके बाद डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने नवंबर 2024 तक करीब 10 महीने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद अशोक कुमार गर्ग का कार्यकाल लगभग छह महीने रहा और मई 2025 में उनकी जगह मौजूदा कमिश्नर प्रदीप दहिया ने पद संभाला।

इनसे पहले विनय प्रताप सिंह और मुकेश कुमार आहूजा समेत कई अधिकारियों का कार्यकाल करीब एक साल से 19 महीने के बीच रहा।

GMDA में भी लंबे कार्यकाल की जरूरत

2017 में गठित हुई थी विकास प्राधिकरण

GMDA का गठन 2017 में एक समर्पित विकास प्राधिकरण के रूप में किया गया था। इसका उद्देश्य गुरुग्राम के नागरिक बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर सुधारना था। 2016 में आई फ्लैश फ्लड के बाद शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई थी।

अधिकारियों के मुताबिक, GMDA की जिम्मेदारियां मुख्य रूप से दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास से जुड़ी हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर पर बार-बार होने वाले बदलाव इन योजनाओं की निरंतरता और निगरानी को प्रभावित कर सकते हैं।

छोटी अवधि में योजनाओं पर पड़ता है असर

अधिकारियों ने स्थिर नेतृत्व को बताया जरूरी

वरिष्ठ अधिकारियों का तर्क है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल योजना बनाने तक सीमित नहीं होते। इनमें विस्तृत परियोजना तैयार करने, प्रशासनिक मंजूरी, वित्तीय प्रक्रिया, टेंडर, निर्माण और निगरानी जैसे कई चरण शामिल होते हैं।

यदि शीर्ष अधिकारी का कार्यकाल बहुत कम हो, तो नई प्राथमिकताएं तय होने और पुरानी योजनाओं की समीक्षा में समय निकल जाता है। अधिकारियों का मानना है कि कम से कम तीन साल का कार्यकाल मिलने से योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है और उनकी जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

Key Highlights:

  • गुरुग्राम के MCG और GMDA प्रमुखों के लिए कम से कम तीन साल का कार्यकाल मांगा गया है।
  • अधिकारियों ने यह मुद्दा शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के सामने उठाया।
  • जून 2019 से MCG में आठ कमिश्नर बदले जा चुके हैं।
  • MCG कमिश्नरों का औसत कार्यकाल 10 महीने से थोड़ा अधिक रहा।
  • PC मीणा ने करीब 12 महीने तक MCG कमिश्नर के रूप में काम किया।
  • डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ का कार्यकाल करीब 10 महीने रहा।
  • अशोक कुमार गर्ग करीब छह महीने तक इस पद पर रहे।
  • प्रदीप दहिया ने मई 2025 में MCG कमिश्नर का पद संभाला।
  • GMDA का गठन 2017 में गुरुग्राम के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए किया गया था।
  • 2016 की फ्लैश फ्लड के बाद शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की जरूरत महसूस हुई थी।

FAQ Section:

सवाल: गुरुग्राम में MCG और GMDA प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग क्यों की गई है?
जवाब: अधिकारियों का कहना है कि बार-बार तबादलों से दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा योजनाओं की निरंतरता और क्रियान्वयन प्रभावित होता है। इसलिए कम से कम तीन साल का निश्चित कार्यकाल मांगा गया है।

सवाल: जून 2019 से MCG में कितने कमिश्नर बदले हैं?
जवाब: रिकॉर्ड के अनुसार, जून 2019 से MCG में आठ कमिश्नर बदले जा चुके हैं।

सवाल: MCG कमिश्नरों का औसत कार्यकाल कितना रहा?
जवाब: उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, उनका औसत कार्यकाल 10 महीने से थोड़ा अधिक रहा है।

सवाल: GMDA का गठन कब हुआ था?
जवाब: गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी GMDA का गठन 2017 में किया गया था।

सवाल: GMDA की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जवाब: GMDA को गुरुग्राम के नागरिक और बुनियादी ढांचे के दीर्घकालिक विकास को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित विकास प्राधिकरण के रूप में गठित किया गया था।

Conclusion:

गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के लिए प्रशासनिक स्थिरता महत्वपूर्ण मानी जाती है। MCG और GMDA प्रमुखों के लगातार बदलाव को लेकर अधिकारियों की चिंता इसी दिशा में है। तीन साल के सुनिश्चित कार्यकाल की मांग स्वीकार होने पर योजनाओं की निरंतरता, निगरानी और जवाबदेही को मजबूती मिल सकती है।Screenshot_1300

Edited By: Atul Sharma

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