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अमृतसर में जानलेवा बने टंग ढाब ड्रेन पर बने अस्थायी पुल, रेलिंग और स्ट्रीट लाइट तक नहीं
20 किलोमीटर लंबे नाले के किनारे बसी कॉलोनियों और 40 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के बीच लोगों ने खुद बनाए रास्ते, हादसे का बना रहता है खतरा
अमृतसर के टंग ढाब ड्रेन पर बने अस्थायी पुल और कंक्रीट स्लैब लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। कई पुलों पर सुरक्षा रेलिंग और स्ट्रीट लाइट नहीं होने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
अमृतसर में टंग ढाब ड्रेन, जिसे हुडियारा ड्रेन के नाम से भी जाना जाता है, अब लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा परेशानी और खतरे का कारण बनता जा रहा है। तेजी से हुए शहरीकरण के चलते नाले के दोनों ओर कई रिहायशी इलाके विकसित हो गए हैं। इन इलाकों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए स्थानीय लोगों ने कई जगह अस्थायी पुल और कंक्रीट स्लैब खुद लगा लिए हैं।
इन अस्थायी रास्तों पर सुरक्षा रेलिंग और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रात के समय यहां से गुजरने वाले लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
20 किलोमीटर लंबे नाले के किनारे बसी कॉलोनियां
40 से अधिक औद्योगिक इकाइयां भी मौजूद
टंग ढाब ड्रेन शहर के बीच से होकर करीब 20 किलोमीटर तक गुजरता है। इसके आसपास कई रिहायशी कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और 40 से अधिक औद्योगिक इकाइयां भी स्थित हैं।जहां नाले की चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है, वहां स्थानीय निवासियों ने चार लेन वाली सड़क तक पहुंचने के लिए कंक्रीट स्लैब बिछाकर अस्थायी पुल बना लिए हैं। यह सड़क जीटी रोड स्थित गोल्डन गेट से अटारी सीमा तक जाती है।
अनमोल एन्क्लेव निवासी मनप्रीत सिंह ने बताया कि कुछ स्थानों पर लोगों ने अपनी जरूरत के अनुसार नाले के ऊपर अस्थायी रास्ते बनाए हैं। उनके मुताबिक, इन पुलों पर किसी तरह की सुरक्षा रेलिंग नहीं होने के कारण हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
नाले में लगातार गिर रहा घरेलू और औद्योगिक कचरा
17 कॉलोनियों के सीवेज का भी किया गया उल्लेख
मनप्रीत सिंह ने करीब दो वर्ष पहले किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि 17 रिहायशी इलाकों का सीवेज टंग ढाब ड्रेन में छोड़ा जा रहा था।
उन्होंने बताया कि 19 औद्योगिक इकाइयों से प्रतिदिन करीब 28 एमएलडी औद्योगिक अपशिष्ट नाले में पहुंच रहा था। इसके अलावा लगभग 176 डेयरियों से निकलने वाला पशु गोबर समेत करीब 550 केएलडी ठोस कचरा भी नाले में डाले जाने का दावा किया गया।
नाले की संरचनात्मक सुरक्षा जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की अपील की
अमरदास कॉलोनी निवासी सिमरन सिंह ने अस्थायी पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन पुलों को स्थानीय निवासियों ने अपनी जरूरत के अनुसार खुद तैयार कराया है, इसलिए उनकी मजबूती और सुरक्षा की जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सुरक्षा मानकों के बने इन रास्तों पर किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन को स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
भूजल प्रदूषण और स्वास्थ्य पर भी चिंता
जहरीली गैसों से घरेलू उपकरणों को नुकसान का दावा
सिमरन सिंह के मुताबिक, जिस नाले को मूल रूप से बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाया गया था, उसमें घरेलू, औद्योगिक, डेयरी और कृषि से जुड़ा ठोस कचरा पहुंच रहा है। उनका दावा है कि इससे भूजल प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नाले से निकलने वाली हानिकारक गैसें लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। उनके मुताबिक, इन गैसों के कारण एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले तांबे के पाइप भी कुछ वर्षों में खराब हो जाते हैं।
1955 में बाढ़ रोकने के लिए बनाया गया था ड्रेन
अब परेशानी और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण
टंग ढाब स्टॉर्म वॉटर ड्रेन को 1955 में बाढ़ से बचाव के उद्देश्य से खोदा गया था। इसे हुडियारा ड्रेन के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि, समय के साथ इसके आसपास तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ती गईं। नाले में विभिन्न प्रकार के कचरे और अपशिष्ट के पहुंचने के आरोपों के बीच यह अब स्थानीय लोगों के लिए लगातार परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का कारण बना हुआ है।
Key Highlights:
- अमृतसर के टंग ढाब ड्रेन पर कई अस्थायी पुल बनाए गए हैं।
- कई पुलों पर सुरक्षा रेलिंग और स्ट्रीट लाइट नहीं हैं।
- करीब 20 किलोमीटर लंबे नाले के किनारे कई रिहायशी कॉलोनियां बसी हैं।
- नाले के आसपास 40 से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थित हैं।
- स्थानीय लोगों ने कई जगह कंक्रीट स्लैब लगाकर रास्ते बनाए हैं।
- एक अध्ययन के हवाले से 17 कॉलोनियों के सीवेज के नाले में जाने का दावा किया गया।
- 19 उद्योगों से 28 एमएलडी अपशिष्ट और करीब 176 डेयरियों से 550 केएलडी कचरा पहुंचने का दावा है।
- स्थानीय लोगों ने अस्थायी पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा जांच की मांग की है।
- नाले को 1955 में बाढ़ रोकने के उद्देश्य से खोदा गया था।
FAQ Section:
सवाल: टंग ढाब ड्रेन कहां स्थित है?
जवाब: टंग ढाब ड्रेन अमृतसर शहर के बीच से होकर गुजरता है और करीब 20 किलोमीटर लंबा है। इसे हुडियारा ड्रेन के नाम से भी जाना जाता है।
सवाल: अस्थायी पुलों को लेकर क्या समस्या है?
जवाब: स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अस्थायी पुलों पर सुरक्षा रेलिंग और स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सवाल: टंग ढाब ड्रेन में किस तरह का कचरा पहुंच रहा है?
जवाब: स्थानीय लोगों के अनुसार, नाले में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, डेयरी से निकलने वाला कचरा और कृषि से जुड़ा ठोस कचरा पहुंच रहा है।
सवाल: टंग ढाब ड्रेन को कब बनाया गया था?
जवाब: टंग ढाब स्टॉर्म वॉटर ड्रेन को 1955 में बाढ़ रोकने के उद्देश्य से खोदा गया था।
सवाल: स्थानीय लोगों ने क्या मांग की है?
जवाब: स्थानीय लोगों ने अस्थायी पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराने और नाले में कचरा व अपशिष्ट डालने की समस्या पर कार्रवाई की मांग की है।
Conclusion:
अमृतसर का टंग ढाब ड्रेन तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच गंभीर नागरिक और पर्यावरणीय चुनौती बनता जा रहा है। नाले पर बने अस्थायी पुलों की सुरक्षा, जल निकासी व्यवस्था और उसमें गिर रहे घरेलू व औद्योगिक कचरे को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं सामने आई हैं। हादसों और प्रदूषण के खतरे को देखते हुए अस्थायी पुलों की सुरक्षा जांच और ड्रेन की स्थिति में सुधार की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
