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हरियाणा में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर घमासान तेज, भूपेंद्र हुड्डा ने 2014 की नीतियां दिखाकर सरकार को घेरा
पूर्व CM हुड्डा का दावा- कांग्रेस सरकार की दोनों नीतियों में तीन साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान था
हरियाणा में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर राज्य सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हुड्डा ने 2014 की दो नीतियों का हवाला देते हुए सरकार से सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की है।
हरियाणा में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी सोमवार को और तेज हो गई। हुड्डा ने दावा किया कि उन्होंने राज्य सरकार को कांग्रेस शासन के दौरान 16 जून और 18 जून 2014 को बनाई गई नियमितीकरण की दोनों नीतियों की प्रतियां उपलब्ध करा दी हैं।
हुड्डा के मुताबिक, इन दोनों नीतियों में तीन साल की सेवा पूरी कर चुके संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने का प्रावधान था। उन्होंने इस दावे के समर्थन में हिमाचल प्रदेश सरकार की 1 अप्रैल 2026 की नीति का भी उल्लेख किया, जिसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त संविदा कर्मचारियों को दो साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद नियमित करने का प्रावधान है।
2014 की नीतियों को लेकर हुड्डा का दावा
तीन साल की सेवा पूरी करने वालों को नियमित करने का प्रावधान
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई दो नीतियों में तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की व्यवस्था थी।हुड्डा के अनुसार, सरकार की ओर से मंत्री कृष्ण बेदी ने जवाब देते हुए कहा था कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए नीति बनाई थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि यदि किसी राज्य में दो साल की सेवा के बाद नियमितीकरण की नीति मौजूद है, तो हरियाणा भी ऐसी व्यवस्था पर विचार करने के लिए तैयार है।
हिमाचल की 2026 नीति का दिया उदाहरण
दो साल की लगातार सेवा के बाद नियमितीकरण
पूर्व मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार की 1 अप्रैल 2026 को तैयार की गई नीति का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक, इस नीति के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त संविदा कर्मचारियों की सेवाएं दो साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद नियमित की जानी हैं।
हुड्डा ने इस उदाहरण के जरिए हरियाणा सरकार के सामने यह सवाल रखा कि जब दूसरे राज्य में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ऐसी व्यवस्था मौजूद है, तो हरियाणा में भी इस दिशा में फैसला क्यों नहीं लिया जा सकता।
सरकार को नीतियों की प्रतियां सौंपने का दावा
बोले- अब सफाई कर्मचारियों को नियमित करे सरकार
हुड्डा ने कहा कि 2014 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई नियमितीकरण नीतियों की प्रतियां अब राज्य सरकार को उपलब्ध करा दी गई हैं। ऐसे में उनके अनुसार सरकार को सफाई कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करना चाहिए और अपने वादों को पूरा करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसे विधानसभा में सदन को गुमराह करने के रूप में देखा जाएगा।
नियमितीकरण के मुद्दे पर बढ़ी सियासी गर्मी
सफाई कर्मचारियों का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
संविदा सफाई कर्मचारियों का नियमितीकरण हरियाणा में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के ताजा बयान ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
हुड्डा द्वारा 2014 की नीतियों और हिमाचल प्रदेश की 2026 की नीति का हवाला दिए जाने के बाद सरकार के सामने अपने रुख को स्पष्ट करने की चुनौती बढ़ गई है।
Key Highlights:
- संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर हरियाणा सरकार और भूपेंद्र हुड्डा के बीच बयानबाजी तेज हुई।
- हुड्डा ने 16 और 18 जून 2014 की कांग्रेस सरकार की दो नीतियों का हवाला दिया।
- उनका दावा है कि दोनों नीतियों में तीन साल की सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रावधान था।
- हुड्डा ने हिमाचल प्रदेश की 1 अप्रैल 2026 की नीति का भी उदाहरण दिया।
- उनके अनुसार, हिमाचल में दो साल की लगातार सेवा के बाद संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान है।
- हुड्डा ने दावा किया कि 2014 की नीतियों की प्रतियां राज्य सरकार को उपलब्ध करा दी गई हैं।
- उन्होंने सरकार से सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की।
- हुड्डा ने ऐसा नहीं होने पर सरकार पर विधानसभा को गुमराह करने का आरोप लगने की बात कही।
FAQ Section:
सवाल: हरियाणा में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर विवाद क्यों है?
जवाब: विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि संविदा कर्मचारियों को कितनी अवधि की सेवा पूरी करने के बाद नियमित किया जाना चाहिए और सरकार इस संबंध में क्या नीति अपनाएगी।
सवाल: भूपेंद्र हुड्डा ने किन नीतियों का हवाला दिया?
जवाब: उन्होंने 16 जून और 18 जून 2014 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई दो नियमितीकरण नीतियों का हवाला दिया।
सवाल: हुड्डा के अनुसार 2014 की नीतियों में क्या प्रावधान था?
जवाब: हुड्डा का दावा है कि इन नीतियों में तीन साल की सेवा पूरी करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान था।
सवाल: हुड्डा ने हिमाचल प्रदेश की किस नीति का उदाहरण दिया?
जवाब: उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नीति का उल्लेख किया, जिसमें उनके अनुसार दो साल की लगातार सेवा के बाद संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रावधान है।
सवाल: हुड्डा ने हरियाणा सरकार से क्या मांग की?
जवाब: उन्होंने सरकार से सफाई कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने और अपने वादों को पूरा करने की मांग की।
Conclusion:
हरियाणा में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। भूपेंद्र हुड्डा ने 2014 की कांग्रेस सरकार की नीतियों और हिमाचल प्रदेश की 2026 की नीति का हवाला देकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाया है। अब इस मामले में सरकार के अगले कदम और नियमितीकरण की नीति को लेकर उसका स्पष्ट रुख महत्वपूर्ण होगा।
