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अमृतसर के पूर्व बैंक मैनेजर की अनोखी सेवा, लंगर के बाद उठाते हैं हजारों पत्तल और कचरा
2012 से जारी है अवतार सिंह घुल्ला की मुहिम, अब तक 4-5 लाख पत्तल रीसाइक्लिंग के लिए भेजे; थर्मोकोल के खिलाफ चला रहे अभियान
अमृतसर के पूर्व बैंक मैनेजर अवतार सिंह घुल्ला पिछले एक दशक से लंगर के बाद सफाई और पर्यावरण संरक्षण की सेवा कर रहे हैं। वह इस्तेमाल की गई पत्तल और कचरा एकत्र कर उचित निस्तारण करवाते हैं।
लंगर के बाद सफाई को बनाया सेवा का माध्यम
अमृतसर की मेहमाननवाजी और सेवा भावना से हर कोई परिचित है। इसी सेवा परंपरा को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता से जोड़ते हुए पूर्व बैंक मैनेजर अवतार सिंह घुल्ला ने ऐसी पहल शुरू की है, जिससे युवा और बुजुर्ग दोनों प्रेरणा ले सकते हैं।
घुल्ला लंगर समाप्त होने के बाद मौके पर पहुंचकर फर्श की सफाई करते हैं और वहां बची डिस्पोजेबल प्लेटों व अन्य कचरे को इकट्ठा कर उचित तरीके से निस्तारित करवाते हैं। खासतौर पर श्री दरबार साहिब के आसपास के क्षेत्रों में उनकी यह सेवा लंबे समय से जारी है।
हालांकि सेवा करने से उन्हें खुशी मिलती है, लेकिन लंगर में इस्तेमाल होने वाली फोम और थर्मोकोल की डिस्पोजेबल प्लेटें उन्हें परेशान करती हैं।2012 में शुरू हुई पर्यावरण संरक्षण की मुहिम
घुल्ला ने बताया कि पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार रणजीत सिंह अक्सर पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर बात करते थे। खासकर प्लास्टिक से प्रकृति को होने वाले नुकसान का जिक्र किया जाता था। इसी से प्रेरित होकर घुल्ला ने पर्यावरण के लिए अपना योगदान देने का फैसला किया।
साल 2012 में उन्होंने श्री दरबार साहिब के आसपास लंगर आयोजित करने वालों से संपर्क करना शुरू किया। वह आयोजकों से डिस्पोजेबल प्लेटों का इस्तेमाल बंद करने और लंगर के दौरान निकलने वाले कचरे के उचित प्रबंधन की अपील करते थे।
जब उनकी अपील को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने खुद सेवा करने का निर्णय लिया।
रिटायरमेंट से पहले ही शुरू कर दी थी सफाई सेवा
घुल्ला ने वर्ष 2013 में, यानी बैंक से सेवानिवृत्त होने से एक साल पहले, मोटरसाइकिल के साथ इस्तेमाल किए जाने वाला एक ठेला तैयार करवाया।
इसके बाद वह लंगर स्थलों पर पहुंचते और इस्तेमाल की गई थर्मोकोल प्लेटों तथा अन्य कचरे को एकत्र कर वहां से हटाते। बैंक मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने लंगर आयोजकों को थर्मोकोल की जगह बायोडिग्रेडेबल पत्तलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना शुरू किया।
हजारों पत्तलों को एक साथ समेटने का बनाया तरीका
हजारों पत्तलों को इकट्ठा करने और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में सुविधा के लिए घुल्ला ने एक विशेष उपकरण भी तैयार करवाया। इसमें तेज धार वाली स्टील की कील जैसी संरचना है, जिसकी मदद से एक साथ सैकड़ों पत्तलों में छेद कर उन्हें दबाकर कॉम्पैक्ट किया जा सकता है।
इससे बड़ी संख्या में पत्तलों की पैकिंग और परिवहन आसान हो जाता है।
अब तक लाखों पत्तल भेज चुके हैं रीसाइक्लिंग के लिए
घुल्ला के अनुसार, एक लंगर स्थल से वह आमतौर पर 5,000 से 7,000 पत्तल एकत्र करते हैं। पिछले वर्षों में वह करीब 4 से 5 लाख पत्तल पिंगलवाड़ा के ग्रीन मैन्योर प्रोजेक्ट की रीसाइक्लिंग सुविधा तक पहुंचा चुके हैं।
वहां पत्तलों को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी और गोबर के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद उन्हें प्राकृतिक रूप से सड़ने के लिए छोड़ा जाता है, जिससे अंततः मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।
कई लंगर आयोजकों ने छोड़ा थर्मोकोल
घुल्ला की लगातार कोशिशों का असर भी दिखाई देने लगा है। उनकी मुहिम से प्रेरित होकर शहर के कई लंगर आयोजकों ने थर्मोकोल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर पत्तलों को अपनाया है।
हालांकि, घुल्ला थर्मोकोल की जगह स्टील की प्लेटों को अपनाने के भी पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसे विकल्प को बढ़ावा देना है, जिसे उपयोग के बाद पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निस्तारित किया जा सके।
Key Highlights:
- पूर्व बैंक मैनेजर अवतार सिंह घुल्ला एक दशक से अधिक समय से लंगर के बाद सफाई कर रहे हैं।
- 2012 में श्री दरबार साहिब के आसपास लंगर आयोजकों से संपर्क शुरू किया।
- 2013 में मोटरसाइकिल के साथ कचरा संग्रह के लिए विशेष ठेला तैयार करवाया।
- एक लंगर स्थल से 5,000-7,000 पत्तल एकत्र करने का दावा।
- अब तक करीब 4-5 लाख पत्तल रीसाइक्लिंग के लिए भेजे।
- कई लंगर आयोजकों को थर्मोकोल छोड़कर बायोडिग्रेडेबल पत्तल अपनाने के लिए प्रेरित किया।
- पत्तलों को मिट्टी और गोबर के साथ मिलाकर जैविक खाद/मैन्योर प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है।
FAQ Section
सवाल: अवतार सिंह घुल्ला कौन हैं?
जवाब: अवतार सिंह घुल्ला पंजाब एंड सिंध बैंक में मैनेजर रह चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने लंगर के बाद सफाई और पर्यावरण संरक्षण को अपनी सेवा का माध्यम बनाया।
सवाल: घुल्ला ने यह सेवा कब शुरू की?
जवाब: उन्होंने 2012 में लंगर आयोजकों को डिस्पोजेबल प्लेटों का इस्तेमाल बंद करने की अपील शुरू की और बाद में खुद लंगर स्थलों से कचरा व पत्तल एकत्र करने लगे।
सवाल: घुल्ला एक लंगर स्थल से कितनी पत्तल एकत्र करते हैं?
जवाब: उनके अनुसार, वह एक लंगर स्थल से करीब 5,000 से 7,000 पत्तल एकत्र करते हैं।
सवाल: एकत्र की गई पत्तलों का क्या किया जाता है?
जवाब: पत्तलों को पिंगलवाड़ा के ग्रीन मैन्योर प्रोजेक्ट की सुविधा में भेजा जाता है, जहां उन्हें श्रेड कर मिट्टी और गोबर के साथ मिलाकर प्राकृतिक रूप से विघटित किया जाता है।
Conclusion
अवतार सिंह घुल्ला ने सेवा की भावना को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर एक मिसाल कायम की है। लंगर के बाद कचरा उठाने से लेकर थर्मोकोल के विकल्प के रूप में बायोडिग्रेडेबल पत्तलों को बढ़ावा देने तक उनकी मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है। उनकी पहल यह संदेश देती है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी निरंतर प्रयास और जिम्मेदारी की भावना है।
