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हरियाणा में डेयरी सेक्टर को नई उड़ान देने पर मंथन, NDRI में तीन दिवसीय उद्यमिता कार्यशाला शुरू
दुनिया के बाजारों में भारतीय डेयरी उत्पादों की संभावनाओं पर चर्चा, 15 प्रमुख डेयरी निर्यातकों ने विशेषज्ञों के साथ साझा किए विचार
करनाल स्थित ICAR-NDRI में डेयरी क्षेत्र में उद्यमिता, नवाचार और कारोबार विकास को लेकर तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसमें डेयरी निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई।
भारत के डेयरी निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर
ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) में सोमवार को “Entrepreneurship in the Dairy Sector: Opportunities, Innovation, & Enterprise Development” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में करीब 15 प्रमुख डेयरी निर्यातकों ने ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ हुई चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत के डेयरी निर्यात तंत्र को मजबूत करना और वैश्विक बाजारों में नए अवसर तलाशना रहा।
उद्घाटन सत्र में ICAR-NDRI के निदेशक धीर सिंह ने भारत के डेयरी निर्यात के सामने मौजूद अवसरों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने निर्यात बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतिगत और संस्थागत हस्तक्षेपों की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को डेयरी आयात कम करने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने के प्रयास तेज करने होंगे। साथ ही, डेयरी क्षेत्र में होने वाला शोध आर्थिक रूप से व्यवहारिक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि शोध का वास्तविक आर्थिक प्रभाव दिखाई दे।डेयरी निर्यात इकोसिस्टम पर हुई अहम चर्चा
कार्यशाला के पहले दिन भारत के डेयरी निर्यात इकोसिस्टम पर आयोजित हितधारक परामर्श प्रमुख आकर्षण रहा। इसका आयोजन ICAR-NDRI के Division of Dairy Economics, Statistics & Management (DES&M) की ओर से किया गया।
इस परामर्श सत्र की सह-अध्यक्षता नई दिल्ली स्थित Research and Information System for Developing Countries (RIS) के पीएस बर्थल और International Food Policy Research Institute (IFPRI) के अंजनी कुमार ने की।
सत्र में विभिन्न शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ डेयरी निर्यातकों ने हिस्सा लिया और भारत के डेयरी क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
तकनीक, संस्थान और उद्यमिता को बताया बदलाव का आधार
दिन की शुरुआत पीएस बर्थल के मुख्य वक्तव्य से हुई। उन्होंने “Transforming the Dairy Sector through Technology, Institutions and Entrepreneurship” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्र में Milkio Foods के संस्थापक राजेश चटर्जी ने डेयरी निर्यात के इच्छुक उद्यमियों के लिए व्यावहारिक टूलबॉक्स प्रस्तुत किया। इसमें संभावित डेयरी निर्यातकों के लिए कारोबार और निर्यात से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर फोकस रहा।
कार्यशाला का समन्वय DES&M की फैकल्टी टीम द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में कुल 118 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
Key Highlights:
- ICAR-NDRI में तीन दिवसीय डेयरी उद्यमिता कार्यशाला शुरू।
- करीब 15 प्रमुख डेयरी निर्यातकों ने भाग लिया।
- भारत के डेयरी निर्यात को बढ़ाने और आयात घटाने पर जोर।
- वैश्विक बाजारों में भारतीय डेयरी उत्पादों की संभावनाओं पर चर्चा।
- शोध को आर्थिक व्यवहारिकता और बाजार की जरूरतों से जोड़ने की बात।
- 118 प्रतिभागी कार्यशाला में शामिल हो रहे हैं।
FAQ Section
सवाल: NDRI में आयोजित कार्यशाला का विषय क्या है?
जवाब: कार्यशाला का विषय “Entrepreneurship in the Dairy Sector: Opportunities, Innovation, & Enterprise Development” है।
सवाल: कार्यशाला में कितने डेयरी निर्यातकों ने भाग लिया?
जवाब: करीब 15 प्रमुख डेयरी निर्यातकों ने ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया।
सवाल: कार्यशाला में मुख्य रूप से किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
जवाब: भारत के डेयरी निर्यात को बढ़ाने, वैश्विक बाजारों में अवसर तलाशने, तकनीक, संस्थागत सहयोग, उद्यमिता और बाजार आधारित शोध जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सवाल: कार्यशाला में कितने प्रतिभागी शामिल हैं?
जवाब: कार्यशाला में कुल 118 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
Conclusion
ICAR-NDRI की यह कार्यशाला भारत के डेयरी क्षेत्र को शोध, उद्यमिता और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आई है। निर्यातकों और विशेषज्ञों के बीच संवाद से भारतीय डेयरी उद्योग के लिए नए कारोबारी अवसरों और निर्यात रणनीतियों पर आगे की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
