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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस ने शपथ के तुरंत बाद दिया सख्त संदेश, बोले- कानून से नहीं हटेंगे
DA/DR बकाया मामले की सुनवाई में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने कहा- कोर्ट किसी दबाव या रणनीति से प्रभावित नहीं होगा, संविधान की शपथ के मुताबिक चलेगा
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने शपथ लेने के दो घंटे के भीतर DA/DR मामले की सुनवाई में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन को लेकर कड़ा रुख स्पष्ट किया।
शपथ के तुरंत बाद DA मामले में सख्त रुख
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेने के दो घंटे से भी कम समय बाद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने अपने कार्यकाल का संकेत दे दिया। लंबित महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) के भुगतान से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत किसी भी तरह की रणनीति या दबाव से प्रभावित नहीं होगी और उसका फैसला कानून के शासन तथा संविधान की शपथ के अनुरूप होगा।
जस्टिस मिश्रा 1 जून से हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सोमवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें पूर्णकालिक चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा CM मौजूद, पंजाब CM रहे अनुपस्थित
शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान समारोह में नजर नहीं आए।खास बात यह रही कि जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार ने एक दिन पहले ही आपत्ति जताई थी। पंजाब कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पंजाब के राज्यपाल से अपील की थी कि राज्य की सहमति मिलने तक जस्टिस मिश्रा को शपथ न दिलाई जाए।
इसके बावजूद सोमवार को राज्यपाल ने उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्णकालिक चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई।
DA/DR बकाया भुगतान मामले में क्या हुआ?
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित DA/DR की किस्तों के भुगतान से जुड़ी अनुपालन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील द्वारा ऊंची आवाज में दलील रखने पर बेंच ने आपत्ति जताई। इसी दौरान चीफ जस्टिस मिश्रा ने अदालत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोर्ट कानून के अनुसार काम करेगा और किसी भी तरह की रणनीति से प्रभावित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की ओर से की जाने वाली टिप्पणियों से अदालत अपना रुख नहीं बदलेगी।
अदालत ने पहले भी पंजाब सरकार को दिए थे निर्देश
यह मामला हाईकोर्ट के अगस्त में दिए गए आदेश से जुड़ा है। उस आदेश में पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को DA/DR की सभी मौजूदा लंबित किस्तों का भुगतान 31 अगस्त तक करने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने यह भी कहा था कि जब तक लंबित बकाया का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार को प्रिंट और सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-उत्पादक खर्च से बचना चाहिए।
चीफ जस्टिस की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने संविधान के प्रति अपनी शपथ और न्यायपालिका के कानून आधारित कामकाज को रेखांकित किया। उनका संदेश साफ था कि अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनेगी, लेकिन निर्णय केवल कानून के आधार पर लिया जाएगा।
Key Highlights:
- जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्णकालिक चीफ जस्टिस पद की शपथ ली।
- शपथ के दो घंटे से कम समय बाद DA/DR मामले की सुनवाई की।
- कोर्ट ने कहा कि वह किसी भी तरह की रणनीति या दबाव से प्रभावित नहीं होगा।
- पंजाब कैबिनेट ने एक दिन पहले उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी।
- पंजाब CM भगवंत मान शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद नहीं रहे।
- हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को लंबित DA/DR किस्तों का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
- बकाया भुगतान होने तक बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्च से बचने को कहा गया था।
FAQ Section
सवाल: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस कौन हैं?
जवाब: जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए पूर्णकालिक चीफ जस्टिस हैं।
सवाल: जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने कब से कार्यवाहक चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी संभाली थी?
जवाब: वह 1 जून से हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर कार्य कर रहे थे।
सवाल: DA/DR मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को क्या निर्देश दिए थे?
जवाब: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित DA/DR किस्तों का भुगतान 31 अगस्त तक करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
सवाल: पंजाब कैबिनेट ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति पर क्या रुख अपनाया था?
जवाब: पंजाब कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल से अपील की थी कि राज्य की सहमति मिलने तक उनकी शपथ न कराई जाए।
Conclusion
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की शपथ के तुरंत बाद DA/DR मामले में की गई टिप्पणी ने हाईकोर्ट के कामकाज को लेकर उनका रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने संविधान की शपथ, कानून के शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्र भूमिका को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। अब DA/DR बकाया भुगतान मामले में हाईकोर्ट के आगे के निर्देशों पर कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर रहेगी।
