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पिंजौर में हत्या आरोपियों की सार्वजनिक परेड पर कोर्ट सख्त, पंचकूला पुलिस आयुक्त को जांच के आदेश
कालका कोर्ट ने सिर मुंडवाकर और नंगे पैर बाजार में घुमाने की घटना पर गंभीर रुख अपनाया, सेशन जज को मामला भेजने और अलग जांच कराने के निर्देश।
कालका कोर्ट ने पिंजौर में चार हत्या आरोपियों को नंगे पैर और मुंडे सिर के साथ सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने मामले को पंचकूला के सेशन जज के संज्ञान में लाने और पुलिस आयुक्त को स्वतंत्र जांच या पहले से चल रही हिरासत प्रताड़ना जांच में इसे शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
हत्या आरोपियों की सार्वजनिक परेड पर अदालत की सख्ती, जांच के दिए निर्देश
हरियाणा के कालका स्थित अदालत ने 6 जून को पिंजौर बाजार में चार हत्या आरोपियों को नंगे पैर और मुंडे सिर के साथ सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने की घटना पर गंभीर रुख अपनाया है।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले को पंचकूला के सेशन जज के संज्ञान में लाया जाए। साथ ही पंचकूला पुलिस आयुक्त को इस मामले की स्वतंत्र जांच करने या पहले से चल रही हिरासत में कथित प्रताड़ना (Custodial Torture) की जांच के साथ इसे जोड़ने का निर्देश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून को जितेश मनोचा की हत्या हुई थी। इसके अगले दिन 6 जून को पुलिस ने हत्या के चार आरोपियों—- मनप्रीत सिंह उर्फ मनी
- रोहित मेहता उर्फ विक्की
- मनीष कुमार
- खुशदीप सिंह उर्फ दीपि
—को कथित रूप से मुंडे सिर और नंगे पैर पिंजौर बाजार में सार्वजनिक रूप से घुमाया।
आरोपियों ने हिरासत में प्रताड़ना का लगाया आरोप
8 जून को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी रोहित मेहता के वकील दीपांशु बंसल ने अदालत में कहा कि आरोपियों को हिरासत के दौरान प्रताड़ित किया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि:
- आरोपियों के सिर जबरन मुंडवाए गए।
- उन्हें नंगे पैर चलाया गया।
- सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
- उनकी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए गए।
- हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
वकील ने दलील दी कि इससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
ये आरोप बचाव पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी जांच जारी है।
मेडिकल बोर्ड ने दर्ज की कई चोटें
अदालत के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने चारों आरोपियों की जांच की और उनके शरीर पर कई चोटों का उल्लेख किया।
खुशदीप सिंह के मेडिकल परीक्षण में
- दाहिने घुटने पर टांकों वाला घाव
- दोनों घुटनों पर चोट के निशान
- दाहिने पेट के हिस्से पर चोट
- बाएं पैर में दर्द
मनीष कुमार के मामले में
- गर्दन के पीछे दर्द
- बाएं घुटने और पैर में दर्द
रोहित मेहता के मामले में
- दोनों घुटनों और पैर में चोट के निशान
मनप्रीत सिंह के मामले में
- दोनों घुटनों पर चोट
- बाएं घुटने के नीचे टांकों वाला घाव
- एड़ी पर खरोंच
- दोनों पैरों में दर्द और कोमलता
हालांकि, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, चारों आरोपियों के एक्स-रे में किसी भी हड्डी के टूटने के संकेत नहीं मिले।
अदालत ने क्यों दिखाई सख्ती?
अदालत ने माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसी आधार पर मामले को सेशन जज के संज्ञान में भेजने और पुलिस आयुक्त को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
Key Highlights:
- कालका कोर्ट ने हत्या आरोपियों की सार्वजनिक परेड के मामले पर गंभीर रुख अपनाया।
- मामला पंचकूला के सेशन जज के संज्ञान में भेजने के निर्देश।
- पुलिस आयुक्त को स्वतंत्र जांच या मौजूदा जांच में मामला शामिल करने का आदेश।
- आरोपियों ने हिरासत में प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया।
- मेडिकल बोर्ड ने चारों आरोपियों के शरीर पर कई चोटों का उल्लेख किया।
- एक्स-रे रिपोर्ट में किसी हड्डी के टूटने की पुष्टि नहीं हुई।
FAQ Section
Q1. अदालत ने क्या आदेश दिया है?
अदालत ने मामले को सेशन जज के संज्ञान में लाने और पुलिस आयुक्त को जांच के निर्देश दिए हैं।
Q2. यह घटना कब हुई थी?
हत्या 5 जून को हुई थी और 6 जून को आरोपियों को पिंजौर बाजार में सार्वजनिक रूप से घुमाया गया था।
Q3. आरोपियों ने क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने हिरासत में प्रताड़ना, सिर जबरन मुंडवाने, नंगे पैर चलाने और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया है।
Q4. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
मेडिकल बोर्ड ने आरोपियों के शरीर पर कई चोटों का उल्लेख किया, लेकिन किसी भी आरोपी की हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं हुई।
Q5. क्या अदालत ने आरोपों को सही माना है?
नहीं। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
Conclusion
पिंजौर में हत्या आरोपियों की सार्वजनिक परेड और हिरासत में कथित प्रताड़ना का मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। अदालत के निर्देशों के बाद अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

