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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों की तैयारी तेज, 15 जुलाई को देशभर में बाइक रैली का ऐलान
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसान संगठनों ने बनाई रणनीति, 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर जुटेंगे किसान।
प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में देशभर के किसान संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। करीब 80 किसान और खेत मजदूर संगठनों के गठबंधन 'देश बचाओ मोर्चा' ने 15 जुलाई को राष्ट्रव्यापी मोटरसाइकिल रैली और 21 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज, देशभर में शुरू हुई तैयारियां
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) के विरोध में किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की तैयारियां तेज कर दी हैं। विभिन्न राज्यों के किसान और खेत मजदूर संगठनों ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन प्रस्तावित व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक करने और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
अंबाला में BKU (शहीद भगत सिंह) की बैठक
भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) [BKU (SBS)] ने रविवार को अंबाला शहर में बैठक आयोजित की। इस दौरान आगामी विरोध प्रदर्शन को लेकर संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियां तय की गईं।बैठक में आंदोलन को गांव, ब्लॉक और जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से संचालित करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले एकजुट हुए संगठन
किसान नेताओं के अनुसार, देशभर के करीब 80 किसान और खेत मजदूर संगठनों ने मिलकर 'देश बचाओ मोर्चा' का गठन किया है।
मोर्चा का उद्देश्य प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध करना और इसके संभावित प्रभावों के बारे में किसानों तथा आम नागरिकों को जागरूक करना है।
MSP को लेकर जताई चिंता
BKU (SBS) के अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी ने कहा कि किसान पहले से ही अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र पर और अधिक दबाव डाल सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस विषय पर अलग दृष्टिकोण भी सामने आया है और व्यापार समझौते को लेकर आधिकारिक स्तर पर चर्चा जारी है।
15 जुलाई को देशभर में मोटरसाइकिल रैली
किसान संगठनों ने 15 जुलाई को देशभर में मोटरसाइकिल रैली निकालने का फैसला किया है।
इस दौरान ब्लॉक और जिला स्तर पर रैलियां आयोजित की जाएंगी तथा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपे जाएंगे।
21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर जुटेंगे किसान
आंदोलन के अगले चरण के तहत 21 जुलाई को विभिन्न राज्यों से किसान दिल्ली के किसान घाट पर एकत्र होंगे।
किसान संगठनों का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वे प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाएंगे।
Key Highlights:
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों ने आंदोलन की तैयारी शुरू की।
- करीब 80 किसान और खेत मजदूर संगठनों ने 'देश बचाओ मोर्चा' का गठन किया।
- अंबाला में BKU (SBS) ने रणनीतिक बैठक आयोजित की।
- 15 जुलाई को देशभर में मोटरसाइकिल रैली निकाली जाएगी।
- प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
- 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर किसानों का जुटान होगा।
- किसान संगठनों ने MSP और कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
FAQ Section
Q1. किसान संगठन किस मुद्दे का विरोध कर रहे हैं?
किसान संगठन प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध कर रहे हैं।
Q2. 'देश बचाओ मोर्चा' क्या है?
यह करीब 80 किसान और खेत मजदूर संगठनों का गठबंधन है, जिसे प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध के लिए बनाया गया है।
Q3. 15 जुलाई को क्या कार्यक्रम होगा?
देशभर में ब्लॉक और जिला स्तर पर मोटरसाइकिल रैलियां निकाली जाएंगी और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
Q4. 21 जुलाई को क्या होगा?
किसान संगठन दिल्ली के किसान घाट पर एकत्र होकर प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
Q5. किसान संगठनों की मुख्य चिंता क्या है?
उनका कहना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
Conclusion
प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। आगामी दिनों में होने वाली मोटरसाइकिल रैलियां और दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने का प्रयास होंगे। इस बीच, व्यापार समझौते पर सरकार और किसान संगठनों के अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण इस विषय पर आगे भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।

