- Hindi News
- राज्य
- हरियाणा
- शाहाबाद के मिरी-पीरी मेडिकल संस्थान में कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 3 महीने से वेतन न मिलने...
शाहाबाद के मिरी-पीरी मेडिकल संस्थान में कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 3 महीने से वेतन न मिलने पर OPD सेवाएं प्रभावित
वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन, आपातकालीन, ICU, डायलिसिस और प्रसूति सेवाएं जारी; HSGMC और SGPC के बीच विवाद बना मुख्य वजह।
शाहाबाद स्थित मिरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (MPIMSR) के कर्मचारियों ने तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल से ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि आपातकालीन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।
तीन महीने से वेतन नहीं मिलने पर मिरी-पीरी मेडिकल संस्थान के कर्मचारियों की हड़ताल
हरियाणा के शाहाबाद स्थित मिरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (MPIMSR) के कर्मचारियों ने तीन महीने से वेतन लंबित रहने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
मिरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और लंबित वेतन के तत्काल भुगतान की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
OPD सेवाएं प्रभावित, जरूरी चिकित्सा सेवाएं जारी
हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी (आउट पेशेंट विभाग) सेवाएं प्रभावित हुई हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 600 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं।हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं:
- आपातकालीन (Emergency) सेवाएं
- ICU
- डायलिसिस
- प्रसूति (Delivery) सेवाएं
- पूर्व निर्धारित सर्जरी
वेतन संकट की वजह क्या है?
कर्मचारियों के वेतन का संकट हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (HSGMC) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के बीच अस्पताल के प्रबंधन और कब्जे को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मई में HSGMC के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद SGPC ने अस्पताल को वित्तीय सहायता देना बंद कर दिया।
दूसरी ओर, HSGMC का कहना है कि उसने अभी तक अस्पताल का औपचारिक कब्जा नहीं लिया है, इसलिए वह संचालन के लिए धन जारी नहीं कर सकती।
HSGMC और SGPC ने क्या कहा?
HSGMC का पक्ष
HSGMC के अध्यक्ष जगदीश सिंह झिंडा के अनुसार, अस्पताल का औपचारिक नियंत्रण अभी तक उनके पास नहीं आया है। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल का कब्जा आधिकारिक रूप से हस्तांतरित नहीं होता, तब तक वर्तमान प्रबंधन को ही संचालन और वित्तीय व्यवस्था जारी रखनी चाहिए।
SGPC का पक्ष
SGPC नेताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद अस्पताल की वित्तीय जिम्मेदारी HSGMC की है। इसलिए समिति ने अस्पताल को फंड देना बंद कर दिया।
मिरी-पीरी ट्रस्ट ने क्या कहा?
मिरी-पीरी ट्रस्ट के सचिव सुखमिंदर सिंह ने कहा कि HSGMC ने प्रारंभिक स्तर पर अस्पताल का प्रबंधन संभालने की इच्छा जताई थी, लेकिन अस्पताल की वित्तीय स्थिति और बजट का आकलन करने के बाद उसने कदम पीछे खींच लिए।
उन्होंने यह भी कहा कि HSGMC को अस्पताल का कब्जा लेने से किसी ने नहीं रोका।
Key Highlights:
- शाहाबाद के मिरी-पीरी मेडिकल संस्थान में कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल।
- तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में प्रदर्शन।
- OPD सेवाएं प्रभावित, लेकिन आपातकालीन और ICU सेवाएं जारी।
- अस्पताल में रोजाना लगभग 600 मरीज OPD में पहुंचते हैं।
- HSGMC और SGPC के बीच प्रबंधन विवाद को वेतन संकट की वजह बताया जा रहा है।
- दोनों समितियों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे किए हैं।
FAQ Section
Q1. कर्मचारियों ने हड़ताल क्यों शुरू की?
तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है।
Q2. कौन-सी सेवाएं प्रभावित हुई हैं?
हड़ताल के कारण OPD सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
Q3. कौन-सी सेवाएं जारी हैं?
आपातकालीन, ICU, डायलिसिस, प्रसूति सेवाएं और निर्धारित सर्जरी सामान्य रूप से जारी हैं।
Q4. वेतन संकट की मुख्य वजह क्या है?
HSGMC और SGPC के बीच अस्पताल के प्रबंधन और वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर चल रहा विवाद।
Q5. HSGMC और SGPC का क्या कहना है?
दोनों समितियां अस्पताल की वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे कर रही हैं। HSGMC का कहना है कि उसने अभी तक औपचारिक कब्जा नहीं लिया, जबकि SGPC का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद जिम्मेदारी HSGMC की है।
Conclusion
मिरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में वेतन भुगतान को लेकर उत्पन्न संकट ने कर्मचारियों और मरीजों दोनों को प्रभावित किया है। हालांकि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखी गई हैं, लेकिन OPD सेवाओं पर असर पड़ा है। अब इस विवाद का समाधान संबंधित पक्षों के बीच प्रबंधन और वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट निर्णय पर निर्भर करेगा।

