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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ‘डिजिटल और आधुनिक शोध कौशल’ पर पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने शोध में गुणवत्ता, नैतिकता और आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर डाला प्रकाश
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में शोध की गुणवत्ता, डिजिटल कौशल और शोध नैतिकता पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में “डिजिटल और आधुनिक शोध कौशल” विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने कहा कि शोध का मुख्य उद्देश्य सत्य की गुणात्मक खोज होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध केवल तथ्यों के संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आलोचनात्मक विश्लेषण, तर्क और साक्ष्यों के माध्यम से वास्तविकता को समझने की एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है।
कुलपति ने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने में आधुनिक शोध उपकरणों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों ने शोध की दिशा और गति दोनों को पूरी तरह बदल दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि प्लेज़रिज़्म, एआई शोध नैतिकता और शोध गुणवत्ता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। नैतिक, पारदर्शी और अकादमिक रूप से ईमानदार शोध न केवल शोधकर्ता की विश्वसनीयता बढ़ाता है, बल्कि समाज और ज्ञान के विकास में भी सार्थक योगदान देता है।
इस अवसर पर कला एवं भाषा संकाय की डीन प्रो. सुनीता सिरोहा ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों को वर्तमान शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपने शोध कौशल को उन्नत करने का अवसर प्रदान करेगी।
वहीं, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने कार्यशाला की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में शोध में मौलिकता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डिजिटल कौशल अनिवार्य हो गए हैं।
