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अंबाला में छठा साहित्यिक सम्मेलन संपन्न, 35 लेखकों की नई कृतियों पर हुई चर्चा
इंटरनेट और एआई के दौर में साहित्य की प्रासंगिकता पर दिया गया जोर
प्रो. वीर सेन विनय मल्होत्रा ट्रस्ट द्वारा आयोजित छठे अंबाला साहित्यिक सम्मेलन में हरियाणा और पड़ोसी राज्यों के लेखक, आलोचक और साहित्य प्रेमी एक मंच पर जुटे।
प्रोफेसर वीर सेन विनय मल्होत्रा ट्रस्ट द्वारा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के तत्वावधान में अंबाला कैंटोनमेंट में छठा अंबाला साहित्यिक सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में हरियाणा सहित पड़ोसी राज्यों से आए लेखक, आलोचक और साहित्य प्रेमियों ने सक्रिय भागीदारी की।
सम्मेलन का उद्घाटन अंबाला कैंटोनमेंट के एसडीएम विनेश कुमार ने किया। उन्होंने इंटरनेट, मोबाइल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव वाले वर्तमान दौर में साहित्यिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ट्रस्ट की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच लेखकों को प्रोत्साहित करने और साहित्य की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए अर्थपूर्ण और समयोचित हैं।
इस अवसर पर एसडीएम विनेश कुमार ने दो नई पुस्तकों का विमोचन भी किया। इनमें डॉ. विनय कुमार मल्होत्रा की 31वीं साहित्यिक कृति “बहुवर्गी–काव्य संग्रह” और कैथल के करमचंद केसर द्वारा रचित हरियाणवी ग़ज़लों का संग्रह “गुल्लर के फूल” शामिल है।
एक दिवसीय इस साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन चार सत्रों में किया गया, जिसमें क्षेत्र के 35 लेखकों की नव प्रकाशित पुस्तकों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में 15 पुस्तक समीक्षक और ट्रस्ट के ट्रस्टी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।
सम्मेलन में प्रस्तुत पुस्तकों में कविता, कथा साहित्य, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण, आत्मकथा, हरियाणवी ग़ज़लें, भारतीय राजनीतिक चिंतन, कूटनीति और 1857 के विद्रोह पर आधारित ऐतिहासिक कृतियां शामिल रहीं। ये पुस्तकें हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी भाषाओं में प्रकाशित थीं।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य साहित्य को जनमानस से जोड़ना और लेखकों को संवाद एवं रचनात्मक विमर्श का सशक्त मंच प्रदान करना था, जिसे प्रतिभागियों ने सराहा।
