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Haryana CMR Crisis: 6.5 लाख MT चावल मिलों में अटका, राइस मिलर्स ने अगले सीजन में बहिष्कार का किया ऐलान
FCI द्वारा CMR स्वीकार न किए जाने का आरोप; करीब 2,800 करोड़ रुपये का चावल लंबित, मिलर्स ने भुगतान, स्टोरेज चार्ज और नुकसान की भरपाई की मांग उठाई
हरियाणा में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) मिलों में कथित तौर पर अटका हुआ है। इसे लेकर हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने आगामी धान खरीद सीजन में CMR संचालन का बहिष्कार करने की घोषणा की है।
Haryana CMR Crisis: राइस मिलर्स ने लिया बड़ा फैसला
हरियाणा में कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य की राइस मिलों में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR कथित तौर पर पड़ा हुआ है, जिसे भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने का आरोप है।
इस स्थिति से नाराज हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने आगामी धान खरीद सीजन में CMR संचालन का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। अगला खरीद सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है।करीब 2,800 करोड़ रुपये का चावल लंबित
एसोसिएशन के मुताबिक, मिलों में पड़ा लगभग 6.5 लाख MT CMR पिछले खरीद सीजन से संबंधित है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 2,800 करोड़ रुपये बताई गई है।
राइस मिलर्स का कहना है कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
करनाल की बैठक में बहिष्कार का फैसला
CMR संचालन के बहिष्कार का निर्णय करनाल में हुई एसोसिएशन की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला ने की, जबकि अध्यक्ष हंसराज सिंगला भी बैठक में मौजूद रहे।
जिला करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस फैसले का समर्थन किया है।
55 लाख MT खरीद का था लक्ष्य, 62 लाख MT धान खरीदा गया
राइस मिलर्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले सीजन में 55 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया था। इसके मुकाबले सरकारी एजेंसियों ने करीब 62 लाख MT धान खरीदा।
यह धान लगभग 1,400 राइस मिलर्स को मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था।
एसोसिएशन का कहना है कि अधिक मात्रा में धान आवंटित होने के बाद CMR की डिलीवरी और FCI में स्टॉक स्वीकार किए जाने को लेकर समस्या बढ़ी।
30 सितंबर तक बढ़ाई गई थी CMR डिलीवरी की समयसीमा
एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला के अनुसार, मिलर्स के बार-बार अनुरोध के बाद केंद्र सरकार ने FCI को CMR की डिलीवरी की समयसीमा बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 तक कर दी थी।
हालांकि, मिलर्स का आरोप है कि FCI ने अपने अधिकारियों को आगे स्टॉक स्वीकार करने से रोक दिया है। इससे बड़ी मात्रा में तैयार चावल मिलों में ही पड़ा हुआ है।
Defaulter सूची में शामिल होने का डर
मिलर्स ने कहा कि CMR की डिलीवरी पूरी नहीं होने की स्थिति में उन्हें सरकारी डिफॉल्टर सूची में शामिल किए जाने और अगले CMR चक्र में भाग लेने से रोकने का खतरा है।
इसके अलावा मिलिंग और परिवहन से जुड़े भुगतान भी लंबित होने का दावा किया गया है।
मांगें पूरी होने तक अगले सीजन का बहिष्कार
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मौजूदा समस्याओं का समाधान नहीं होता, राइस मिलर्स अगले सीजन में CMR संचालन में हिस्सा नहीं लेंगे।
मिलर्स ने सरकार से स्टॉक को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने और भुगतान संबंधी लंबित मामलों को जल्द निपटाने की मांग की है।
स्टोरेज और खराब हुए चावल का मुआवजा मांगा
राइस मिलर्स ने मिलों में लंबे समय से पड़े स्टॉक के लिए स्टोरेज और होल्डिंग चार्ज का मुआवजा देने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने चावल के रंग बदलने और लंबे समय तक रखे जाने के कारण गुणवत्ता खराब होने से होने वाले नुकसान से भी सुरक्षा की मांग की है।
ज्वेल सिंगला ने कहा कि मिलिंग से जुड़े बकाया भुगतान में देरी के कारण मिलर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भुगतान में देरी से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है।
Key Highlights:
• हरियाणा की राइस मिलों में करीब 6.5 लाख MT CMR अटका होने का दावा।
• लंबित चावल की अनुमानित कीमत करीब 2,800 करोड़ रुपये बताई गई।
• FCI पर CMR स्वीकार नहीं करने का राइस मिलर्स ने आरोप लगाया।
• अगले खरीद सीजन में CMR संचालन के बहिष्कार का ऐलान।
• अगला धान खरीद सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद।
• पिछले सीजन में 55 लाख MT धान खरीद का लक्ष्य था, जबकि करीब 62 लाख MT खरीद हुई।
• करीब 1,400 राइस मिलर्स को धान मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था।
• CMR डिलीवरी की समयसीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई थी।
• मिलर्स ने स्टोरेज और होल्डिंग चार्ज की भरपाई मांगी।
• चावल के खराब होने और रंग बदलने से होने वाले नुकसान से सुरक्षा की मांग।
• मिलिंग और परिवहन के लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग।
FAQ Section:
हरियाणा में कितना CMR अटका हुआ है?
हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR मिलों में लंबित है।
अटके हुए CMR की कीमत कितनी बताई गई है?
एसोसिएशन के अनुसार, लंबित CMR की अनुमानित कीमत करीब 2,800 करोड़ रुपये है।
राइस मिलर्स ने क्या फैसला लिया है?
राइस मिलर्स ने मौजूदा समस्याओं का समाधान होने तक अगले CMR संचालन सीजन में भाग नहीं लेने का फैसला किया है।
अगला धान खरीद सीजन कब शुरू होने की उम्मीद है?
अगला खरीद सीजन 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
CMR डिलीवरी की अंतिम समयसीमा क्या है?
केंद्र सरकार ने मिलर्स के अनुरोध पर FCI को CMR डिलीवरी की समयसीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई थी।
राइस मिलर्स की प्रमुख मांगें क्या हैं?
मिलर्स लंबित CMR स्वीकार करने, मिलिंग और परिवहन भुगतान जारी करने, स्टोरेज व होल्डिंग चार्ज की भरपाई तथा चावल के खराब होने से होने वाले नुकसान से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
Conclusion:
हरियाणा में CMR के करीब 6.5 लाख MT स्टॉक के लंबित होने का मुद्दा आगामी धान खरीद सीजन से पहले गंभीर रूप ले चुका है। राइस मिलर्स ने स्पष्ट किया है कि यदि FCI में स्टॉक स्वीकार करने और लंबित भुगतान समेत उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे अगले सीजन के CMR संचालन से दूर रहेंगे। अब इस विवाद के समाधान के लिए राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर जल्द हस्तक्षेप महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित नई खरीद व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
