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अमृतसर की 125 करोड़ की Smart Road बदहाल, अवैध कब्जे और पार्किंग ने बिगाड़ी पूरी तस्वीर
7.4 किलोमीटर लंबी सर्कुलर रोड को 12 ऐतिहासिक दरवाजों को जोड़ने के लिए विकसित किया गया था, लेकिन फुटपाथों पर कब्जे और सड़क किनारे अवैध पार्किंग से बढ़ी परेशानी
अमृतसर में 125 करोड़ रुपये की लागत से विकसित स्मार्ट रोड परियोजना अब अवैध कब्जों और गलत पार्किंग की समस्या से जूझ रही है। 12 ऐतिहासिक दरवाजों को जोड़ने वाली 7.4 किलोमीटर सड़क पर कई सुविधाएं क्षतिग्रस्त या गायब हो चुकी हैं।
अमृतसर में करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई स्मार्ट रोड परियोजना पर अब अतिक्रमण और अवैध पार्किंग भारी पड़ रही है। कभी शहर के ऐतिहासिक हिस्से को नया रूप देने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई यह सड़क अब अव्यवस्था से घिरती नजर आ रही है।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2020 से 2025 के बीच विकसित की गई 7.4 किलोमीटर लंबी सर्कुलर रोड शहर की चारदीवारी के 12 ऐतिहासिक दरवाजों को जोड़ती है। परियोजना का उद्घाटन सितंबर 2020 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी ने किया था।
125 करोड़ की परियोजना का उद्देश्य क्या था?
स्मार्ट रोड परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक दरवाजों के आसपास के क्षेत्र का कायाकल्प करना और शहर में यातायात की समस्या को कम करना था। इसके साथ ही सड़क को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने और पुराने शहर के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की योजना थी।लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद इसके रखरखाव और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण इसकी तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है।
कई जगह गायब हो गईं सड़क की सुविधाएं
स्थानीय स्तर पर सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना के तहत लगाए गए कई ग्रिल चोरी हो चुके हैं। वहीं, सड़क के किनारे बनाए गए फुटपाथों पर दुकानदारों, मैकेनिकों, रेहड़ी-फड़ी वालों और वाहनों का कब्जा हो गया है।
इससे स्मार्ट रोड का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
भगतांवाला से लोहगढ़ गेट तक मैकेनिकों का कब्जा
भगतांवाला गेट से लोहगढ़ गेट के बीच सड़क के एक हिस्से पर कार मैकेनिकों ने कथित तौर पर कब्जा कर रखा है। सड़क के आसपास वाहनों की मरम्मत और खड़े किए जाने के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
फुटपाथों पर भी बड़ी संख्या में विक्रेता और अन्य अतिक्रमणकारी मौजूद हैं।
फुटपाथ पर कब्जे से पैदल राहगीर परेशान
फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन इन पर कब्जा होने के कारण लोगों को सड़क के मुख्य हिस्से यानी कैरिजवे पर चलना पड़ रहा है।
इससे पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। खासकर व्यस्त इलाकों में यह स्थिति सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
अवैध पार्किंग ने भी बढ़ाई परेशानी
अतिक्रमण के साथ-साथ सड़क पर गलत तरीके से वाहनों की पार्किंग भी स्मार्ट रोड की उपयोगिता को प्रभावित कर रही है। सड़क के आसपास खड़े वाहन यातायात के लिए उपलब्ध जगह को कम कर देते हैं।
जिस परियोजना का उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और पुराने शहर में आवाजाही आसान करना था, वहां अब अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Key Highlights:
- अमृतसर में करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट रोड विकसित की गई।
- परियोजना के तहत 7.4 किलोमीटर लंबी सर्कुलर रोड बनाई गई।
- सड़क शहर के 12 ऐतिहासिक दरवाजों को जोड़ती है।
- परियोजना को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2020 से 2025 के बीच विकसित किया गया।
- सितंबर 2020 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी ने परियोजना का उद्घाटन किया था।
- परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक क्षेत्र का कायाकल्प और यातायात व्यवस्था में सुधार करना था।
- कई स्थानों पर सड़क किनारे लगाए गए ग्रिल चोरी हो चुके हैं।
- फुटपाथों पर मैकेनिकों, रेहड़ी वालों और वाहनों का कब्जा है।
- भगतांवाला गेट से लोहगढ़ गेट तक कार मैकेनिकों द्वारा सड़क क्षेत्र के इस्तेमाल की शिकायत है।
- फुटपाथों पर अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है।
- अवैध पार्किंग से यातायात और सड़क सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
FAQ Section:
अमृतसर की स्मार्ट रोड परियोजना की लागत कितनी है?
अमृतसर की स्मार्ट रोड परियोजना पर करीब 125 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
स्मार्ट रोड कितनी लंबी है?
यह करीब 7.4 किलोमीटर लंबी सर्कुलर रोड है, जो चारदीवारी वाले शहर के 12 ऐतिहासिक दरवाजों को जोड़ती है।
स्मार्ट रोड परियोजना कब विकसित की गई?
यह परियोजना स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2020 से 2025 के बीच विकसित की गई थी।
स्मार्ट रोड पर सबसे बड़ी समस्या क्या है?
सड़क पर अवैध पार्किंग और फुटपाथों पर अतिक्रमण प्रमुख समस्याएं हैं। कई जगह मैकेनिक, रेहड़ी वाले और वाहन फुटपाथों पर कब्जा किए हुए हैं।
अतिक्रमण से पैदल यात्रियों पर क्या असर पड़ रहा है?
फुटपाथों पर कब्जे के कारण पैदल यात्रियों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ रहा है।
Conclusion:
अमृतसर की 125 करोड़ रुपये की स्मार्ट रोड परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक शहर को बेहतर बुनियादी ढांचा देना और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना था, लेकिन मौजूदा स्थिति परियोजना के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फुटपाथों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और कई जगह परियोजना की सुविधाओं के क्षतिग्रस्त या गायब होने से स्मार्ट रोड की उपयोगिता प्रभावित हो रही है। यदि संबंधित विभाग समय रहते अतिक्रमण हटाने और नियमित रखरखाव पर ध्यान नहीं देते, तो करोड़ों रुपये से तैयार की गई परियोजना का मूल उद्देश्य और अधिक प्रभावित हो सकता है।
