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आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एमएल जाट का CSSRI दौरा, टिकाऊ खेती पर जोर
‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए उन्नत कृषि तकनीकों और संसाधन प्रबंधन पर दिया बल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने CSSRI में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती अपनाने की सलाह दी।
डॉ. एमएल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने बुधवार को आईसीएआर-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) का दौरा किया।
इस अवसर पर आयोजित ‘क्रॉप हार्वेस्ट डे’ कार्यक्रम में उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत के लिए उन्नत कृषि पद्धतियां” विषय पर किसानों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित किया।
डॉ. जाट ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, टिकाऊ कृषि और भारत की कृषि अनुसंधान प्रणाली में नवाचार के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा, “1969 में स्थापित यह संस्थान कभी इतनी लवणीय भूमि पर स्थित था कि वहां घास भी नहीं उगती थी, लेकिन आज यह लवणीय और क्षारीय मिट्टी को सुधारने और उसकी उत्पादकता बढ़ाने में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बन चुका है। यह भारतीय कृषि विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”
उन्होंने मिट्टी की सेहत, जल संसाधनों, ऊर्जा उपयोग और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एकीकृत और विज्ञान-आधारित समाधानों की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. जाट ने इंटरनेशनल मक्का और गेहूं सुधार केंद्र (CIMMYT) के साथ चल रही दीर्घकालिक शोध पहल का जिक्र किया, जिसमें वर्तमान कृषि पद्धतियों और उन्नत तकनीकों के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन करने के लिए विभिन्न परिदृश्य विकसित किए गए हैं।
इस शोध का एक महत्वपूर्ण परिणाम 2009 से ‘नो-टिलेज’ (बिना जुताई) खेती को अपनाना रहा है, जिससे ऊर्जा की बचत और मिट्टी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मिट्टी में कार्बनिक कार्बन 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 1 प्रतिशत से अधिक हो गया है। साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की आवश्यकता में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें पानी की खपत, ऊर्जा उपयोग और खेती की लागत को कम करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक हैं।
डॉ. जाट ने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।
इस मौके पर डॉ. एसके संवाल, निदेशक, CSSRI ने संस्थान में चल रहे नए शोध कार्यों की जानकारी दी। डॉ. एके नायक (डिप्टी डायरेक्टर जनरल, ICAR) और डॉ. अनुराधा अग्रवाल (प्रोजेक्ट डायरेक्टर) भी उपस्थित रहीं।
इससे पहले डॉ. जाट ने आईसीएआर-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) और आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान का भी दौरा कर विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
