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UPPCL की नई पहल: स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिलेंगी तीन ‘लाइफलाइन’, अचानक बिजली कटौती से राहत
30%, 20% और 10% बैलेंस पर SMS अलर्ट, नेगेटिव बैलेंस पर भी मिलेगी सीमित बिजली
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नई अलर्ट प्रणाली शुरू की है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटौती से बचाने के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपयोगकर्ताओं के लिए तीन “लाइफलाइन” प्रणाली शुरू की है।
नई व्यवस्था के तहत, जब उपभोक्ता का बैलेंस 30%, 20% और 10% तक पहुंचेगा, तो उन्हें समय पर SMS अलर्ट मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं को समय रहते रिचार्ज करने का अवसर मिलेगा और अचानक बिजली कटने की समस्या से बचा जा सकेगा।
इसके अलावा, यदि मीटर का बैलेंस नेगेटिव में चला जाता है, तब भी उपभोक्ताओं को तीन यूनिट तक बिजली की आपूर्ति दी जाएगी, जिससे उन्हें तुरंत कटौती का सामना न करना पड़े।
UPPCL ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने संपर्क विवरण अपडेट रखें, ताकि उन्हें ये अलर्ट समय पर मिल सकें। इस पहल से अचानक बिजली कटौती से जुड़ी शिकायतों में कमी आने और सेवाएं अधिक पारदर्शी व उपभोक्ता अनुकूल बनने की उम्मीद है।
एक प्रवक्ता ने बताया कि यह कदम प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और बेहतर सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। “हमारा लक्ष्य निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर नियंत्रण देने का है,” उन्होंने कहा।
इस प्रणाली को प्रीपेड मीटरिंग के आधुनिकीकरण के हिस्से के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसमें रियल-टाइम बिजली खपत की निगरानी और ऑनलाइन रिचार्ज जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
रिया केजरीवाल, मध्यांचल की एमडी ने बताया कि प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर मोबाइल सिम की तरह काम करते हैं—प्रीपेड में पहले रिचार्ज करना होता है और बैलेंस खत्म होते ही बिजली कट जाती है। स्मार्ट मीटर ऐप के जरिए उपभोक्ता अपनी खपत और बैलेंस की जानकारी रियल-टाइम में देख सकते हैं, और इसमें कोई सिक्योरिटी मनी जमा नहीं करनी होती।
हालांकि, कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि रिचार्ज के बाद भी बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं होती थी और इसमें 2-4 घंटे से लेकर 2-4 दिन तक का समय लग जाता था, जबकि नियमों के अनुसार तीन घंटे के भीतर कनेक्शन बहाल होना चाहिए।
जांच में सामने आया कि स्मार्ट मीटर संचालित करने वाले सिस्टम—मीटर डेटा मैनेजमेंट (MDM), हेड एंड सिस्टम (HES) और रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम (RMS)—आपस में सही तरीके से कनेक्ट नहीं हो पा रहे थे, जिससे यह समस्या उत्पन्न हो रही थी।
