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लखनऊ के सरकारी कॉलेज में औचक निरीक्षण, छात्र और स्टाफ नदारद
उच्च शिक्षा निदेशक की जांच में गंभीर लापरवाही उजागर, कार्रवाई की सिफारिश
लखनऊ के एक सरकारी कॉलेज में निरीक्षण के दौरान न छात्र मिले और न ही अधिकांश स्टाफ, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठे।
बीएल शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक ने उत्तर प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कम नामांकन को लेकर चल रहे विवाद के बीच बुधवार को राजकीय महाविद्यालय, लतीफनगर (सरोजिनी नगर) का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के नतीजे चौंकाने वाले थे। सुबह 10:25 बजे शुरू हुए निरीक्षण के दौरान कॉलेज में एक भी छात्र (लड़का या लड़की) मौजूद नहीं था, जबकि छात्रों के आने का निर्धारित समय सुबह 10 बजे था।
निरीक्षण के समय कॉलेज में केवल एक सहायक प्रोफेसर (कॉमर्स) और तीन आउटसोर्स कर्मचारी ही मौजूद थे। शर्मा द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, अन्य कोई शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित नहीं था।
सुबह 10:50 बजे निरीक्षण के दौरान कार्यवाहक प्राचार्य और एक रसायन विज्ञान के शिक्षक कॉलेज पहुंचे। इसके बावजूद दर्शनशास्त्र, कॉमर्स, बॉटनी, इतिहास, जूलॉजी, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, संस्कृत और गणित के कुल नौ शिक्षक और गैर-शिक्षण स्टाफ (मुख्य सहायक और वरिष्ठ सहायक) उस समय तक भी अनुपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान प्राचार्य कार्यालय में उपस्थिति रजिस्टर भी नहीं मिला। कार्यवाहक प्राचार्य ने बताया कि रजिस्टर क्लर्क के पास है, लेकिन क्लर्क भी उस समय अनुपस्थित था। निदेशक ने निर्देश दिया कि भविष्य में उपस्थिति रजिस्टर प्राचार्य के कार्यालय में रखा जाए और निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत किया जाए।
अपनी रिपोर्ट में बीएल शर्मा ने सिफारिश की कि समय पर ड्यूटी पर उपस्थित न होने वाले सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, जिसमें एक दिन का वेतन रोकना भी शामिल है।
साथ ही, सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को दो कार्य दिवस के भीतर अपने अनुपस्थित रहने का लिखित स्पष्टीकरण प्राचार्य के माध्यम से ईमेल द्वारा देने के निर्देश दिए गए हैं।
