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झज्जर के अहलावत परिवार का सेना में अनोखा इतिहास, 140 साल से Skinner’s Horse में सेवा की परंपरा
लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत की 5 सितंबर को कमीशनिंग के साथ परिवार की पांच पीढ़ियों की सैन्य विरासत पूरी, 1886 में शुरू हुआ था सफर
झज्जर के गोच्छी गांव के अहलावत परिवार ने 1 Horse यानी Skinner’s Horse के साथ 140 साल का रिश्ता कायम किया है। लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशन होने से पांच पीढ़ियों की यह परंपरा आगे बढ़ी है।
हरियाणा के झज्जर जिले के गोच्छी गांव के अहलावत परिवार ने भारतीय सेना के इतिहास में अपनी एक अनोखी पहचान बनाई है। 5 सितंबर को लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशन होने के साथ ही परिवार की 1 Horse, जिसे लोकप्रिय रूप से Skinner’s Horse के नाम से जाना जाता है, के साथ 140 साल पुरानी सैन्य परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच गई।
एक ही परिवार की लगातार पांच पीढ़ियों का एक ही सैन्य रेजिमेंट में सेवा करना दुर्लभ सैन्य विरासत का उदाहरण है। परिवार की यह परंपरा वर्ष 1886 में शुरू हुई थी और तब से हर पीढ़ी ने Skinner’s Horse में अपनी सेवाएं दी हैं।
1886 में शुरू हुआ था सैन्य सफर
लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के पिता कर्नल संदीप अहलावत के अनुसार, परिवार का Skinner’s Horse से रिश्ता उनके परदादा Sowar Sheo Chand Ahlawat के साथ शुरू हुआ था।उन्होंने बताया कि वर्ष 1886 में उनके परदादा ने इस रेजिमेंट में भर्ती होकर लांस और तलवार थामी थी। उस समय रेजिमेंट की पहचान उसकी विशिष्ट पीली वर्दी से होती थी। तब शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका यह फैसला आने वाली पांच पीढ़ियों के लिए एक लंबी सैन्य परंपरा की नींव रखेगा।
Sheo Chand Ahlawat ने चीन से प्रथम विश्व युद्ध तक निभाई सेवा
कर्नल संदीप अहलावत के मुताबिक, उनके परदादा ने 1886 से 1918 तक Skinner’s Horse में सेवा की। उनके सैन्य जीवन में 1900 के Boxer Rebellion के दौरान चीन की तैनाती भी शामिल रही।
इसके बाद उन्होंने अफगानिस्तान में सेवा की और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान युद्ध के मैदानों में भी हिस्सा लिया।
दूसरी पीढ़ी ने द्वितीय विश्व युद्ध में निभाई भूमिका
परिवार की सैन्य परंपरा को अगली पीढ़ी में Captain Daryao Singh Ahlawat ने आगे बढ़ाया। उन्होंने 1918 से 1948 तक इसी रेजिमेंट में सेवा की।
कर्नल संदीप ने बताया कि Daryao Singh द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी सैनिक थे। इस तरह परिवार का Skinner’s Horse के साथ जुड़ाव दूसरी पीढ़ी में भी लगातार बना रहा।
तीसरी पीढ़ी ने 1965 और 1971 के युद्धों में लिया हिस्सा
परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व Lt Col Shamsher Singh Ahlawat ने किया। उन्होंने 1955 से 1982 तक Skinner’s Horse में सेवा की।
उनके सैन्य करियर में Goa Liberation के साथ-साथ 1965 और 1971 के India-Pakistan Wars में भागीदारी शामिल रही। कर्नल संदीप के अनुसार, एक युद्ध के दौरान उनके पिता गंभीर रूप से घायल भी हुए थे।
चौथी पीढ़ी में कर्नल संदीप अहलावत
परिवार की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाने वाले चौथी पीढ़ी के सदस्य खुद कर्नल संदीप अहलावत हैं। उन्होंने 1993 में Skinner’s Horse ज्वाइन किया।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने Kargil conflict और Northeast में counter-insurgency operations में हिस्सा लिया। वर्तमान में कर्नल संदीप Skinner’s Horse की कमान संभालने का सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैं।
लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत ने आगे बढ़ाई पांचवीं पीढ़ी
5 सितंबर को लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशन होने के साथ परिवार की 140 साल पुरानी सैन्य परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच गई।
इस उपलब्धि से गोच्छी गांव के लोगों में भी खास उत्साह है। ग्रामीण अहलावत परिवार के सम्मान में भव्य समारोह आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।
एक ही रेजिमेंट में पांच पीढ़ियों की दुर्लभ विरासत
अहलावत परिवार की कहानी इसलिए विशेष है क्योंकि पांच पीढ़ियों ने लगातार एक ही रेजिमेंट के साथ अपना सैन्य जीवन जोड़ा। 1886 में Sowar Sheo Chand Ahlawat से शुरू हुई यह यात्रा अब लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत तक पहुंच चुकी है।
इस दौरान परिवार के सदस्यों ने चीन, अफगानिस्तान, प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध, Goa Liberation, 1965 और 1971 के युद्ध, Kargil conflict तथा Northeast में counter-insurgency operations जैसे विभिन्न सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया।
Key Highlights:
- झज्जर के गोच्छी गांव का अहलावत परिवार सेना की अनोखी विरासत के लिए चर्चा में है।
- परिवार का Skinner’s Horse के साथ 140 साल पुराना रिश्ता है।
- 5 सितंबर को Lt Shivam Ahlawat के कमीशन होने से पांचवीं पीढ़ी ने रेजिमेंट ज्वाइन की।
- परिवार की सैन्य परंपरा 1886 में Sowar Sheo Chand Ahlawat से शुरू हुई थी।
- Sheo Chand Ahlawat ने 1886 से 1918 तक रेजिमेंट में सेवा की।
- उन्होंने Boxer Rebellion के दौरान चीन और बाद में अफगानिस्तान में सेवा की।
- Captain Daryao Singh Ahlawat ने 1918 से 1948 तक सेवा की और द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी रहे।
- Lt Col Shamsher Singh Ahlawat ने 1955 से 1982 तक सेवा की।
- उन्होंने Goa Liberation और 1965 व 1971 के India-Pakistan Wars में हिस्सा लिया।
- Colonel Sandeep Ahlawat ने 1993 में रेजिमेंट ज्वाइन की और Kargil conflict में भाग लिया।
- कर्नल संदीप वर्तमान में Skinner’s Horse की कमान संभाल रहे हैं।
- गोच्छी गांव में परिवार के सम्मान में भव्य समारोह की तैयारी है।
FAQ Section:
Q1. अहलावत परिवार का Skinner’s Horse से रिश्ता कब शुरू हुआ?
उत्तर: परिवार का Skinner’s Horse से रिश्ता वर्ष 1886 में Sowar Sheo Chand Ahlawat के रेजिमेंट में शामिल होने के साथ शुरू हुआ।
Q2. अहलावत परिवार की कितनी पीढ़ियों ने Skinner’s Horse में सेवा की है?
उत्तर: लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशन होने के साथ परिवार की पांच पीढ़ियों ने इसी रेजिमेंट में सेवा की है।
Q3. कर्नल संदीप अहलावत ने किन अभियानों में हिस्सा लिया?
उत्तर: कर्नल संदीप अहलावत ने Kargil conflict और Northeast में counter-insurgency operations में हिस्सा लिया है।
Q4. अहलावत परिवार की तीसरी पीढ़ी ने किन युद्धों में हिस्सा लिया?
उत्तर: Lt Col Shamsher Singh Ahlawat ने Goa Liberation तथा 1965 और 1971 के India-Pakistan Wars में भाग लिया।
Q5. लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत कब कमीशन हुए?
उत्तर: लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत 5 सितंबर को कमीशन हुए, जिसके साथ परिवार की पांचवीं पीढ़ी ने सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया।
Conclusion:
झज्जर के गोच्छी गांव के अहलावत परिवार की 140 साल पुरानी सैन्य यात्रा भारतीय सेना की पारिवारिक विरासत का असाधारण उदाहरण है। 1886 में शुरू हुई यह परंपरा पांच पीढ़ियों तक एक ही रेजिमेंट में सेवा के रूप में आगे बढ़ी है। लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशन होने के साथ इस विरासत ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है, जिससे पूरे गांव में गर्व और उत्साह का माहौल है।
