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पंजाब में नदी स्थलों पर डीसिल्टिंग की समयसीमा बढ़ी, अब 30 सितंबर तक जारी रहेंगे जरूरी काम
NGT की रोक के कारण अटके 99 महत्वपूर्ण स्थलों पर काम को मानसून के दौरान पूरा करने की अनुमति, लुधियाना में सबसे ज्यादा 33 साइट
पंजाब जल संसाधन विभाग ने बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील नदी स्थलों पर डीसिल्टिंग और बहाली कार्य की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ा दी है। राज्य के 14 जिलों में 99 महत्वपूर्ण स्थलों पर काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
पंजाब में मानसून के बीच बाढ़ के खतरे को देखते हुए नदी तलों की सफाई और जल प्रवाह क्षमता बहाल करने के लिए चल रहे कार्यों को पूरा करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है। जल संसाधन विभाग ने डीसिल्टिंग और महत्वपूर्ण नदी स्थलों की बहाली के लिए अब 30 सितंबर तक का समय दिया है। पहले इन कार्यों को 30 जून तक पूरा किया जाना था, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक के कारण कई स्थानों पर काम आगे नहीं बढ़ सका।
जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर (ड्रेनेज) की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 14 जिलों में कुल 99 महत्वपूर्ण स्थलों पर अधूरे कार्यों को मानसून के दौरान जारी रखने की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह अनुमति 30 सितंबर तक या काम पूरा होने तक लागू रहेगी, इनमें से जो भी पहले हो।
99 महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर जारी रहेगा काम
विभाग ने जिला प्रशासन को उन स्थानों पर डीसिल्टिंग जारी रखने के निर्देश दिए हैं, जिन्हें बाढ़ के पानी की सुरक्षित निकासी और नदियों की जल वहन क्षमता बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।चीफ इंजीनियर (ड्रेनेज-कम-माइनिंग) ने संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि महत्वपूर्ण स्थलों पर चल रहे कार्यों को निर्धारित समय में पूरा कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
NGT की रोक से प्रभावित हुआ था काम
डीसिल्टिंग और नदी बहाली के अधिकांश कार्य मानसून शुरू होने से पहले पूरे किए जाने थे। हालांकि, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक के कारण कई स्थानों पर काम समय पर शुरू या पूरा नहीं हो सका। इसी वजह से विभाग ने अब मानसून अवधि के दौरान भी इन कार्यों को जारी रखने की अनुमति दी है।
लुधियाना में सबसे ज्यादा 33 महत्वपूर्ण साइट
राज्य में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नदी स्थल लुधियाना जिले में चिन्हित किए गए हैं। यहां 33 साइट पर डीसिल्टिंग और बहाली कार्य लंबित हैं। इसके बाद जालंधर में 19 और एसबीएस नगर में 16 महत्वपूर्ण स्थल हैं।
जिलेवार महत्वपूर्ण स्थलों का विवरण:
- लुधियाना: 33
- जालंधर: 19
- एसबीएस नगर: 16
- होशियारपुर: 6
- रोपड़: 6
- मानसा: 5
- मोगा: 5
- एसएएस नगर: 4
- फिरोजपुर: 3
- गुरदासपुर: 2
- पटियाला: 2
- अमृतसर: 1
- तरनतारन: 1
- फाजिल्का: 1
रोपड़ में सतलुज और सिरसा नदी पर छह साइट
रोपड़ जिले में सतलुज और सिरसा नदियों से जुड़े छह महत्वपूर्ण स्थलों पर डीसिल्टिंग की अनुमति दी गई है। विभाग ने इन कार्यों को बाढ़ के पानी की सुरक्षित निकासी और नदी की प्रवाह क्षमता बनाए रखने की दृष्टि से जरूरी माना है।
बाढ़ प्रबंधन पर विभाग का फोकस
मानसून के दौरान नदी और नालों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में गाद जमा होने से पानी के बहाव में बाधा आ सकती है। ऐसे में विभाग ने महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर डीसिल्टिंग और बहाली कार्य पूरा करने पर जोर दिया है, ताकि बाढ़ के पानी की निकासी सुचारु बनी रहे।
Key Highlights:
- पंजाब में डीसिल्टिंग और नदी बहाली कार्य की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई गई।
- 14 जिलों के 99 महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर काम अभी अधूरा है।
- NGT की रोक के कारण निर्धारित समय पर कई स्थानों पर काम नहीं हो सका।
- मानसून के दौरान भी इन स्थलों पर काम जारी रखने की अनुमति दी गई है।
- लुधियाना में सबसे ज्यादा 33 महत्वपूर्ण साइट हैं।
- जालंधर में 19 और एसबीएस नगर में 16 साइट चिन्हित हैं।
- रोपड़ में सतलुज और सिरसा नदियों पर छह स्थलों पर डीसिल्टिंग की अनुमति है।
FAQ Section:
पंजाब में डीसिल्टिंग की नई समयसीमा क्या है?
पंजाब जल संसाधन विभाग ने महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर डीसिल्टिंग और बहाली कार्य की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई है।
कितने जिलों में डीसिल्टिंग का काम लंबित है?
राज्य के 14 जिलों में कुल 99 महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर काम अधूरा है।
काम में देरी क्यों हुई?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक के कारण कई स्थलों पर डीसिल्टिंग का काम निर्धारित समय में आगे नहीं बढ़ सका।
किस जिले में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण साइट हैं?
लुधियाना जिले में सबसे ज्यादा 33 महत्वपूर्ण साइट हैं। इसके बाद जालंधर में 19 और एसबीएस नगर में 16 साइट हैं।
रोपड़ में किन नदियों पर काम होगा?
रोपड़ जिले में सतलुज और सिरसा नदियों से जुड़े छह स्थलों पर डीसिल्टिंग की अनुमति दी गई है।
Conclusion:
पंजाब सरकार ने मानसून के दौरान बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर डीसिल्टिंग और बहाली कार्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। 30 सितंबर तक 99 स्थलों पर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि नदी की जल वहन क्षमता बेहतर हो और बाढ़ के पानी की निकासी में बाधा कम हो।
