अमृतसर में 600 करोड़ का BRTS कॉरिडोर अब होगा ध्वस्त, 10 साल बाद फिर ट्रैफिक सुधारने की कवायद

2016 में SAD-BJP सरकार ने बनाया था 31 किमी लंबा कॉरिडोर, अब इसे हटाकर करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा नया सेंट्रल वर्ज

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अमृतसर में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया BRTS कॉरिडोर अब चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। बुधवार से इसके ध्वस्तीकरण का काम शुरू हो गया। यह वही कॉरिडोर है जिसे करीब एक दशक पहले शहर की ट्रैफिक समस्या का समाधान बताया गया था।

अमृतसर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब एक दशक पहले तैयार किया गया बहुचर्चित बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) कॉरिडोर अब इतिहास बनने जा रहा है। वर्ष 2016 में तत्कालीन SAD-BJP सरकार के कार्यकाल में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस कॉरिडोर को अब चरणबद्ध तरीके से तोड़ा जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह परियोजना शुरू की गई थी, तब इसका उद्देश्य भी शहर में ट्रैफिक जाम कम करना और लोगों को तेज सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना था। अब इसे हटाने के पीछे भी मुख्य कारण ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाना बताया जा रहा है।

31 किलोमीटर लंबे BRTS नेटवर्क को चरणों में हटाया जाएगा

BRTS कॉरिडोर को हटाने का काम बुधवार से शुरू हुआ। शुरुआती चरण में गोल्डन गेट से काम शुरू करने के बजाय अल्फा वन के सामने वाले हिस्से को चुना गया है।

पूरा करीब 31 किलोमीटर लंबा नेटवर्क अलग-अलग चरणों में ध्वस्त किया जाएगा। यह कॉरिडोर शहर के कई प्रमुख मार्गों को जोड़ता है।

इन प्रमुख रूट पर बना था कॉरिडोर

BRTS नेटवर्क में मुख्य रूप से ये मार्ग शामिल थे:

  • गोल्डन गेट से छेहरटा
  • वेरका से कचहरी
  • रेलवे स्टेशन से क्रिस्टल चौक

600 करोड़ खर्च हुए, लेकिन शुरू नहीं हुई BRTS सेवा

BRTS परियोजना को अमृतसर की यातायात समस्या के समाधान के रूप में पेश किया गया था। उस समय अधिकारियों का दावा था कि निर्धारित स्टेशनों पर हर तीन मिनट में बस उपलब्ध होगी और यात्रियों को ऑटो-रिक्शा की तुलना में कम समय में उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा।

परियोजना से यह उम्मीद भी की गई थी कि लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करेंगे और शहर की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा की संख्या घटेगी। हालांकि, जिस बस सेवा को इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी उपयोगिता माना गया था, वह कभी शुरू ही नहीं हो सकी।

नतीजतन, करीब 600 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद शहर को अपेक्षित BRTS सेवा नहीं मिल पाई।

कॉरिडोर तोड़ने पर निगम का खर्च बेहद कम

BRTS कॉरिडोर को हटाने की प्रक्रिया में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। नगर निगम को इस ढांचे को ध्वस्त करने के लिए बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी।

कॉरिडोर को हटाने के लिए आयोजित टेंडर प्रक्रिया में करीब 13 कंपनियों ने हिस्सा लिया। अंततः ठेका महज 45,000 रुपये में दिया गया।

ठेकेदार को मिलेगा निकला हुआ मटेरियल

समझौते के तहत ठेकेदार को कॉरिडोर तोड़ने के दौरान निकलने वाली निर्माण सामग्री मिलेगी। इसके बदले उसे पूरे हिस्से को समतल कर सड़क के मौजूदा स्तर तक लाना होगा।

इस तरह पुराने कॉरिडोर को हटाने का सीधा वित्तीय बोझ नगर निगम पर अपेक्षाकृत कम रहेगा।

कॉरिडोर की जगह बनेगा नया सेंट्रल वर्ज

BRTS ढांचे को हटाने और सड़क को समतल करने के बाद यहां नया सेंट्रल वर्ज बनाया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, नए सेंट्रल वर्ज और उसके डिजाइन पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

नए डिजाइन का उद्देश्य सड़क के उपयोग को बेहतर बनाना और शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

एक दशक बाद बदला ट्रैफिक समाधान का मॉडल

BRTS कॉरिडोर को लेकर मौजूदा घटनाक्रम शहर की यातायात योजना में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। जिस बुनियादी ढांचे को वर्ष 2016 में ट्रैफिक कम करने के लिए तैयार किया गया था, करीब दस साल बाद उसी ढांचे को हटाकर सड़क को नए तरीके से विकसित किया जा रहा है।

Key Highlights:

  • अमृतसर में BRTS कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से हटाने का काम शुरू।
  • करीब 31 किलोमीटर लंबा पूरा नेटवर्क ध्वस्त किया जाएगा।
  • वर्ष 2016 में SAD-BJP सरकार के दौरान करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
  • BRTS बस सेवा कभी अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो सकी।
  • शुरुआती ध्वस्तीकरण कार्य अल्फा वन के सामने से शुरू किया गया।
  • गोल्डन गेट से छेहरटा, वेरका से कचहरी और रेलवे स्टेशन से क्रिस्टल चौक तक कॉरिडोर था।
  • करीब 13 कंपनियों ने ध्वस्तीकरण के टेंडर में हिस्सा लिया।
  • ठेका महज 45,000 रुपये में दिया गया।
  • ठेकेदार को ध्वस्तीकरण से निकलने वाली सामग्री मिलेगी।
  • कॉरिडोर हटने के बाद करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से नया सेंट्रल वर्ज बनाया जाएगा।

FAQ Section:

अमृतसर BRTS कॉरिडोर कब बनाया गया था?

अमृतसर में BRTS कॉरिडोर वर्ष 2016 में तत्कालीन SAD-BJP सरकार के कार्यकाल में तैयार किया गया था।

BRTS कॉरिडोर पर कितना खर्च हुआ था?

इस परियोजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

अमृतसर में BRTS कॉरिडोर कितना लंबा था?

पूरा BRTS नेटवर्क करीब 31 किलोमीटर लंबा था।

BRTS सेवा क्यों हटाई जा रही है?

कॉरिडोर को हटाकर सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था को नए तरीके से व्यवस्थित करने की योजना है। मूल BRTS सेवा अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो सकी थी।

BRTS कॉरिडोर तोड़ने का ठेका कितने में दिया गया?

ध्वस्तीकरण का ठेका 45,000 रुपये में दिया गया है। ठेकेदार को निकलने वाली निर्माण सामग्री भी मिलेगी और उसे सड़क को समतल करना होगा।

कॉरिडोर हटने के बाद क्या बनेगा?

पुराने कॉरिडोर की जगह नया सेंट्रल वर्ज बनाया जाएगा। नगर निगम के अनुसार इसकी लागत करीब 7 करोड़ रुपये होगी।

Conclusion:

अमृतसर का BRTS कॉरिडोर शहर की उन बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल रहा, जिनसे ट्रैफिक व्यवस्था बदलने की उम्मीद की गई थी। लेकिन करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित बस सेवा शुरू नहीं हो सकी। अब लगभग एक दशक बाद कॉरिडोर को हटाकर सड़क का नया डिजाइन तैयार किया जा रहा है। करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला सेंट्रल वर्ज शहर की नई ट्रैफिक योजना का हिस्सा होगा।Screenshot_1394

Edited By: Atul Sharma

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