पंजाब पुलिस के 971 अधिकारियों ने पूरी की NDPS जांच की विशेष ट्रेनिंग, नशे से जुड़े मामलों की जांच होगी मजबूत

पटियाला की RGNUL में एक वर्षीय सर्टिफाइड इन्वेस्टिगेटर कोर्स पूरा; पुलिस अधिकारियों को कानूनी प्रक्रिया, डिजिटल सबूत, तलाशी और जब्ती से जुड़ी बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया।

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पंजाब में नशे से जुड़े मामलों की जांच और अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए 971 पुलिस अधिकारियों ने विशेष प्रशिक्षण पूरा किया है। राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (RGNUL), पटियाला में आयोजित एक वर्षीय कोर्स का उद्देश्य जांच की गुणवत्ता बढ़ाना और कानूनी प्रक्रियाओं का बेहतर पालन सुनिश्चित करना है।

पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने और ड्रग्स से जुड़े मामलों में कानूनी खामियों को कम करने के लिए पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल के तहत पंजाब पुलिस के 971 अधिकारियों ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक वर्षीय सर्टिफाइड इन्वेस्टिगेटर कोर्स पूरा किया है।

यह कोर्स पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (RGNUL) में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक, पेशेवर और कानूनी रूप से मजबूत जांच करने के लिए तैयार करना है।

NDPS मामलों की जांच में प्रक्रियागत खामियां दूर करने पर जोर

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पंजाब पुलिस प्रतिदिन नशे से जुड़े सैकड़ों मामलों को संभालती है। ऐसे में जांच अधिकारियों की विशेषज्ञता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि जांच के दौरान प्रक्रियागत गलतियों की गुंजाइश कम हो और अदालत में सबूतों को प्रभावी ढंग से पेश किया जा सके।

रिपोर्ट में 32 वर्षीय डीएसपी गगनदीप (बदला हुआ नाम) का उदाहरण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद वे नशे से जुड़े मामलों की जांच को कानूनी मानकों के अनुरूप तैयार करने और अभियोजन की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में अधिक सक्षम हुए हैं।

पहले कुछ मामलों में कनिष्ठ अधिकारियों की जांच के दौरान प्रक्रियागत कमियां सामने आने की आशंका रहती थी। विशेष प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसी समस्याओं को दूर करना और जांच के मानकों को मजबूत बनाना है।

SP से ASI रैंक तक के अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (SP) से लेकर सहायक उपनिरीक्षक (ASI) तक के 971 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। एक वर्षीय सर्टिफाइड इन्वेस्टिगेटर कोर्स विशेष रूप से NDPS अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच को बेहतर बनाने पर केंद्रित था।

इस पहल का मकसद विशेषज्ञ जांचकर्ताओं का एक ऐसा समूह तैयार करना है, जो नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में साक्ष्य जुटाने, कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और मजबूत केस तैयार करने में सक्षम हो।

RGNUL, ANTF और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल

RGNUL में कोर्स के समन्वयक डॉ. अभिनंदन बस्सी ने बताया कि यह कार्यक्रम एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से संचालित किया गया।

उनके अनुसार, प्रशिक्षण से जांच के मानकों, प्रक्रियागत अनुपालन और नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में अभियोजन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया।

जांच अधिकारियों की सहायता के लिए NDPS हैंडबुक भी तैयार की गई है। इसे तैयार करने में ANTF, कानूनी विशेषज्ञों और RGNUL का योगदान रहा है। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों की बेहतर जानकारी देना है।

तलाशी, जब्ती और वित्तीय जांच पर विशेष प्रशिक्षण

कोर्स के दौरान कानून, पुलिस जांच और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

  • राजत बंसल, अतिरिक्त जिला अटॉर्नी: मुकदमे की सुनवाई से पहले जांच की तैयारी और कानूनी प्रक्रियाओं पर चर्चा की।

  • मनीत दुग्गल, उप जिला अटॉर्नी: तलाशी, जब्ती, NDPS नियमों और प्रक्रियागत बारीकियों को समझाया।

  • सुमीत सेखों, अधिवक्ता: NDPS अधिनियम के मूल कानूनी प्रावधानों और वित्तीय जांच के पहलुओं पर जानकारी दी।

इन सत्रों का उद्देश्य अधिकारियों को जांच के दौरान कानूनी आवश्यकताओं को समझने और संभावित प्रक्रियागत गलतियों से बचने में मदद करना था।

डिजिटल सबूत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर भी फोकस

प्रशिक्षण में डिजिटल साक्ष्यों के प्रबंधन और गिरफ्तारी से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी शामिल किया गया। आज के दौर में नशे से संबंधित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए उनकी सही तरीके से पहचान, संग्रह और प्रबंधन पर जोर दिया गया।

RGNUL की पीएचडी शोधार्थी सुमन ने NDPS मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों और उनके कानूनी महत्व पर जानकारी दी।

नशे की लत, दुरुपयोग और पुनर्वास पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

कार्यक्रम में जांच के कानूनी पहलुओं के साथ नशे की लत और उसके सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई।

क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. तवलीन कौर और डॉ. शेरैन रतन ने नशे की लत, मादक पदार्थों के दुरुपयोग और पुनर्वास से जुड़े ढांचों पर जानकारी साझा की।

इससे पुलिस अधिकारियों को नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं के साथ समझने का अवसर मिला।

Key Highlights

  • पंजाब पुलिस के 971 अधिकारियों ने एक वर्षीय NDPS जांच प्रशिक्षण कोर्स पूरा किया।

  • प्रशिक्षण राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (RGNUL), पटियाला में आयोजित हुआ।

  • SP से ASI रैंक तक के अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

  • जांच की गुणवत्ता, कानूनी प्रक्रियाओं और अभियोजन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

  • तलाशी, जब्ती, डिजिटल साक्ष्य, गिरफ्तारी और वित्तीय जांच जैसे विषय शामिल रहे।

  • जांच अधिकारियों के लिए NDPS हैंडबुक तैयार की गई।

  • नशे की लत, दुरुपयोग और पुनर्वास के विषयों पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

FAQ Section

1. पंजाब पुलिस के कितने अधिकारियों ने NDPS प्रशिक्षण पूरा किया?

पंजाब पुलिस के कुल 971 अधिकारियों ने एक वर्षीय सर्टिफाइड इन्वेस्टिगेटर कोर्स पूरा किया।

2. NDPS जांच का प्रशिक्षण कहां आयोजित किया गया?

यह प्रशिक्षण पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (RGNUL) में आयोजित किया गया।

3. इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच को अधिक पेशेवर बनाना, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना और अभियोजन की गुणवत्ता में सुधार करना है।

4. प्रशिक्षण में किन विषयों को शामिल किया गया?

कोर्स में तलाशी और जब्ती, गिरफ्तारी की प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय जांच, NDPS अधिनियम के प्रावधान, न्यायिक फैसले और नशे की लत एवं पुनर्वास जैसे विषय शामिल थे।

5. NDPS हैंडबुक क्यों तैयार की गई?

यह हैंडबुक जांच अधिकारियों को जरूरी कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए तैयार की गई है, ताकि वे मामलों की जांच अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकें।

Conclusion

पंजाब पुलिस के 971 अधिकारियों का NDPS जांच संबंधी विशेष प्रशिक्षण पूरा करना राज्य में नशे से जुड़े मामलों की जांच क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कानून, डिजिटल साक्ष्य, तलाशी और जब्ती के साथ-साथ नशे की लत और पुनर्वास पर दिए गए प्रशिक्षण से अधिकारियों को व्यापक समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पहल की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन भविष्य में जांच की गुणवत्ता, कानूनी प्रक्रियाओं के अनुपालन और अदालतों में मामलों के परिणामों के आधार पर किया जा सकेगा।Screenshot_243

Edited By: Atul Sharma

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