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पंजाब में निवेश को लेकर ब्रिटेन की दिलचस्पी, मंत्री अमन अरोड़ा ने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ की अहम बैठक
India-UK CETA के तहत पंजाब को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, ब्रिटिश कंपनियों को निवेश और कारोबार के लिए आमंत्रित किया
पंजाब में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने ब्रिटेन के साथ औद्योगिक और व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। इन्वेस्ट पंजाब समिट में उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर राज्य की नई औद्योगिक नीति और निर्यात सुविधा केंद्र की जानकारी साझा की।
पंजाब को अंतरराष्ट्रीय निवेश के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा ने इन्वेस्ट पंजाब समिट के दौरान ब्रिटेन के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में पंजाब को ब्रिटिश कंपनियों के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement - CETA) के तहत व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देना और पंजाब में ब्रिटिश निवेश आकर्षित करना रहा।
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चंडीगढ़ की डिप्टी हाई कमिश्नर अल्बा स्मेरिग्लियो (Alba Smeriglio) ने किया।
पंजाब की नई औद्योगिक नीति को किया प्रस्तुत
बैठक के दौरान मंत्री अमन अरोड़ा ने पंजाब की इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुविधाएं विकसित की हैं।
इस दौरान राज्य के विशेष FTA और एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेल की भूमिका पर भी चर्चा हुई। यह सेल विदेशी कंपनियों को व्यापार समझौतों को समझने, निर्यात के अवसर तलाशने और संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता देने के लिए बनाया गया है।
इन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर हुई चर्चा
बैठक में पंजाब और ब्रिटेन के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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कृषि आधारित उद्योग (Agribusiness)
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फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री
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इंजीनियरिंग सेक्टर
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ऑटो कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग
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उद्योगों से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम
इन क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी सहयोग के माध्यम से पंजाब के औद्योगिक विकास को गति देने की संभावनाओं पर बातचीत हुई।
पंजाब की लोकेशन और कुशल कर्मचारियों को बताया बड़ी ताकत
अमन अरोड़ा ने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में पंजाब की भौगोलिक स्थिति राज्य को निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।
उन्होंने राज्य के कुशल मानव संसाधन, मजबूत औद्योगिक आधार और विकसित होती व्यावसायिक सुविधाओं को भी विदेशी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि पंजाब में उद्योगों की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देने और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को मजबूत करने से रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल रहा?
इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्य शामिल हुए:
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अल्बा स्मेरिग्लियो – चंडीगढ़ की डिप्टी हाई कमिश्नर
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डॉ. निकोलस ग्रिबिट – फर्स्ट सेक्रेटरी (ट्रेड-इंडिया)
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अनूप नारायण – ब्रिटिश हाई कमीशन में सीनियर ट्रेड एडवाइजर
प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब की औद्योगिक क्षमताओं और विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग तथा फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं में रुचि दिखाई।
Key Highlights
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उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की।
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बैठक इन्वेस्ट पंजाब समिट के दौरान आयोजित हुई।
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प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अल्बा स्मेरिग्लियो ने किया।
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India-UK CETA के तहत व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई।
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पंजाब की इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 प्रस्तुत की गई।
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FTA और एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेल की जानकारी साझा की गई।
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कृषि, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स में निवेश की संभावनाएं तलाशी गईं।
FAQ Section
1. ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब में किस मुद्दे पर चर्चा की?
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब में औद्योगिक निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार और भारत-ब्रिटेन आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
2. ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई किसने की?
चंडीगढ़ की डिप्टी हाई कमिश्नर अल्बा स्मेरिग्लियो ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
3. पंजाब की कौन-सी नई औद्योगिक नीति पेश की गई?
मंत्री अमन अरोड़ा ने इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 की जानकारी साझा की।
4. पंजाब में किन क्षेत्रों में ब्रिटिश निवेश की संभावना है?
कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और स्किल डेवलपमेंट प्रमुख क्षेत्र हैं।
5. FTA और एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेल का क्या काम है?
यह सेल विदेशी कंपनियों को व्यापार समझौतों, निर्यात के अवसरों, नियामकीय प्रक्रियाओं और व्यापारिक सुविधाओं से संबंधित सहायता प्रदान करता है।
Conclusion
पंजाब सरकार राज्य को अंतरराष्ट्रीय निवेश और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ अमन अरोड़ा की यह बैठक भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन चर्चाओं से भविष्य में कितने ठोस निवेश प्रस्ताव और औद्योगिक साझेदारियां सामने आती हैं।

