फिर लौट रही है पंजाब की पारंपरिक कला, फुलकारी से लेकर पीतल के बर्तनों तक बढ़ा लोगों का आकर्षण

अमृतसर की युवा शिल्पकार अमन बोलीं- फुलकारी कभी फैशन से बाहर नहीं हुई; नई पीढ़ी में पारंपरिक हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पादों और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति बढ़ रही दिलचस्पी

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पंजाब की पारंपरिक हस्तकलाएं एक बार फिर लोगों के घरों और जीवनशैली का हिस्सा बन रही हैं। फुलकारी, बाग, पीतल-तांबे के बर्तन, लकड़ी के किचनवेयर और हाथ से बुने कालीनों की मांग नए उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।

पंजाब की फुलकारी का फिर बढ़ रहा आकर्षण

पंजाब की पहचान मानी जाने वाली फुलकारी कढ़ाई एक बार फिर नए दौर में अपनी खास जगह बना रही है। अमृतसर की युवा शिल्पकार और दूसरी पीढ़ी की कारीगर अमन का कहना है कि फुलकारी कभी वास्तव में फैशन से बाहर नहीं हुई।

उनके मुताबिक, बदलते फैशन और उपभोक्ताओं की पसंद के कारण कुछ समय के लिए इसकी लोकप्रियता कम जरूर हुई, लेकिन रंग-बिरंगी पंजाबी कढ़ाई ने लोगों की अलमारियों में अपनी जगह बनाए रखी। आज पंजाबी ही नहीं, बल्कि दूसरे समुदायों के लोग भी फुलकारी को पसंद कर रहे हैं।

अमन स्वदेशी जागरण मंच की ओर से आयोजित एक उत्सवी प्रदर्शनी में अपने खूबसूरत बाग और पारंपरिक फुलकारी संग्रह का प्रदर्शन कर रही थीं।

15 वर्षों से फुलकारी कला को दे रहीं नया जीवन

अमन पिछले करीब 15 वर्षों से इस पारंपरिक कला से जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि फुलकारी की लोकप्रियता अब पंजाबी परिवारों तक सीमित नहीं रही। अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग भी इसे भारत की विशिष्ट कपड़ा विरासत के रूप में अपना रहे हैं।

उनके अनुसार, नई पीढ़ी में जागरूक खरीदारी और टिकाऊ जीवनशैली को लेकर बढ़ती दिलचस्पी ने भी फुलकारी को नया आकर्षण दिया है।

अमन उन पंजाबी हथकरघा और हस्तशिल्प कलाकारों में शामिल हैं, जिन्हें अमृतसर की संस्था 'फुलकारी-वुमेन ऑफ अमृतसर' की ओर से आयोजित विशेष समारोह में सम्मानित किया गया।

फुलकारी के साथ दूसरे पारंपरिक हस्तशिल्प भी कर रहे वापसी

पंजाब में केवल फुलकारी ही नहीं, बल्कि कई दूसरी पारंपरिक कलाएं और स्वदेशी उत्पाद भी दोबारा लोकप्रिय हो रहे हैं। कभी आम पंजाबी घरों का हिस्सा रहे ये उत्पाद अब नए डिजाइन और उपयोग के साथ नई पीढ़ी तक पहुंच रहे हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • ठठेरा कला: हाथ से पीटकर बनाए जाने वाले तांबे और पीतल के बर्तन।

  • शीशम की लकड़ी के उत्पाद: हाथ से तैयार किए जाने वाले किचनवेयर और घरेलू सामान।

  • हाथ से बुने कालीन और दरियां: पारंपरिक बुनाई की कला से तैयार उत्पाद।

  • खेस: पंजाब के घरों में इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक कपड़ा।

  • बाग और फुलकारी: रंगीन धागों से तैयार पारंपरिक पंजाबी कढ़ाई।

इन उत्पादों को नए उपभोक्ताओं की जरूरत और पसंद के अनुसार नए रूप में पेश किया जा रहा है।

केवल पुरानी यादें नहीं, टिकाऊ जीवनशैली भी है वापसी की वजह

विशेषज्ञों और कारीगरों के बीच पारंपरिक हस्तशिल्प की वापसी को केवल पुरानी संस्कृति और यादों से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। इसके पीछे असलीपन, टिकाऊपन और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की बढ़ती इच्छा भी एक वजह है।

आज कई उपभोक्ता ऐसे उत्पादों को पसंद कर रहे हैं, जिनमें स्थानीय कारीगरों की मेहनत, पारंपरिक तकनीक और सांस्कृतिक पहचान दिखाई देती है। यही वजह है कि पंजाब के पुराने हस्तशिल्प आधुनिक घरों और नई पीढ़ी की पसंद में फिर जगह बना रहे हैं।

मुख्य बातें

  • अमृतसर की युवा शिल्पकार अमन पिछले 15 वर्षों से फुलकारी कला से जुड़ी हैं।

  • अमन का कहना है कि फुलकारी कभी पूरी तरह फैशन से बाहर नहीं हुई।

  • फुलकारी और बाग को पंजाबी ही नहीं, दूसरे समुदायों के लोग भी पसंद कर रहे हैं।

  • स्वदेशी जागरण मंच की उत्सवी प्रदर्शनी में अमन ने अपना पारंपरिक संग्रह प्रदर्शित किया।

  • 'फुलकारी-वुमेन ऑफ अमृतसर' ने पंजाबी हथकरघा और हस्तशिल्प कलाकारों को सम्मानित किया।

  • ठठेरा कला, शीशम के लकड़ी के बर्तन, दरियां और खेस जैसे पारंपरिक उत्पाद भी दोबारा लोकप्रिय हो रहे हैं।

  • टिकाऊ जीवनशैली और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों में बढ़ती दिलचस्पी इस बदलाव की अहम वजह है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. फुलकारी क्या है?
फुलकारी पंजाब की पारंपरिक कढ़ाई कला है, जिसमें रंग-बिरंगे धागों से कपड़ों पर सुंदर डिजाइन बनाए जाते हैं।

2. अमन कौन हैं?
अमन अमृतसर की युवा शिल्पकार और दूसरी पीढ़ी की कारीगर हैं। वह पिछले 15 वर्षों से फुलकारी और बाग की पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रही हैं।

3. फुलकारी के अलावा पंजाब की कौन-सी पारंपरिक कलाएं लोकप्रिय हो रही हैं?
ठठेरा कला, हाथ से बने पीतल और तांबे के बर्तन, शीशम के लकड़ी के उत्पाद, हाथ से बुनी दरियां, कालीन और खेस फिर से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

4. पारंपरिक हस्तशिल्प की लोकप्रियता बढ़ने की क्या वजह है?
असलीपन, टिकाऊ उत्पादों, स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ने की बढ़ती इच्छा इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

निष्कर्ष

पंजाब की पारंपरिक फुलकारी और अन्य हस्तशिल्प कलाएं बदलते समय के साथ नए अंदाज में वापसी कर रही हैं। अमन जैसे युवा कारीगर इस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह बदलाव केवल पुराने शिल्प को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, स्वदेशी उत्पादों और पंजाब की सांस्कृतिक पहचान को नया मंच भी दे रहा है।Screenshot_291

Edited By: Atul Sharma

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