- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- मोहाली GMADA में 47 करोड़ रुपये की कथित छूट का मामला: चीफ इंजीनियर का ED के सामने बड़ा खुलासा, वरिष्...
मोहाली GMADA में 47 करोड़ रुपये की कथित छूट का मामला: चीफ इंजीनियर का ED के सामने बड़ा खुलासा, वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप
Remigate Build Estates को कथित राहत देने के मामले में जांच तेज, चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने 'Partially Feasible' रिपोर्ट तैयार करने के लिए दबाव का दावा किया; ED ने दो अधिकारियों को भेजा समन
मोहाली के GMADA में 47 करोड़ रुपये के कथित बकाया माफ करने से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेज हो गई है। GMADA के चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने ED के सामने दावा किया है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर रियल एस्टेट कंपनी के पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया था। इस मामले में ED ने पूर्व एस्टेट ऑफिसर हरदीप सिंह और अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही को भी तलब किया है।
मोहाली में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े 47 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में GMADA के चीफ इंजीनियर अजय गर्ग के बयान महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने जांच एजेंसी के सामने दावा किया है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर एक ऐसी रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया था, जिससे रियल एस्टेट कंपनी को राहत मिल सके।
यह मामला Remigate Build Estates Pvt Ltd को सेक्टर-62, मोहाली में फूड कोर्ट विकसित करने के लिए आवंटित 1.13 एकड़ जमीन से जुड़ा है। कंपनी पर बकाया लगभग 47 करोड़ रुपये की कथित छूट दिए जाने को लेकर जांच चल रही है।
चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने क्या दावा किया?
ED के सामने दिए गए बयान में GMADA के चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने कथित तौर पर कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे रिपोर्ट में 'Partially Feasible' यानी आंशिक रूप से व्यवहार्य शब्द का इस्तेमाल करने का दबाव बनाया था।
आरोप है कि इस तरह की रिपोर्ट से कंपनी को बकाया राशि में राहत देने का रास्ता तैयार हो सकता था।
हालांकि, ED ने अपने दस्तावेजों में उन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
47 करोड़ रुपये की छूट का प्रस्ताव कैसे आगे बढ़ा?
जांच के अनुसार, चीफ इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर हरदीप सिंह ने बकाया राशि में छूट देने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था।
यह प्रस्ताव GMADA की एक बैठक में मंजूरी के लिए रखा गया था। बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन मुख्य सचिव और GMADA के चेयरमैन के.ए.पी. सिन्हा ने की थी।
ED इस पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है कि कंपनी को कथित वित्तीय राहत देने के लिए किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और निर्णय किस आधार पर लिया गया।
PMLA के तहत ED ने दाखिल की जानकारी
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले से संबंधित जानकारी दिल्ली स्थित प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत नियुक्त एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने रखी है।
एजेंसी ने पिछले महीने मोहाली स्थित GMADA कार्यालय में तीन दिनों तक तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री को अपने पास रखने के फैसले को सही ठहराने के लिए ED ने यह जानकारी प्रस्तुत की।
ED का आरोप है कि GMADA के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कंपनी के प्रमोटरों के साथ कथित मिलीभगत करके उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया और इसके पीछे निजी फायदे का उद्देश्य था। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और अभी अंतिम रूप से साबित नहीं हुए हैं।
दो वरिष्ठ अधिकारियों को ED का समन
Remigate मामले की जांच के सिलसिले में ED ने तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर हरदीप सिंह और अतिरिक्त मुख्य प्रशासक (Additional Chief Administrator) अमरिंदर सिंह मल्ही को समन जारी किया है।
एजेंसी इन अधिकारियों से कथित वित्तीय राहत की प्रक्रिया, रिपोर्ट तैयार करने और संबंधित प्रशासनिक फैसलों के बारे में पूछताछ करना चाहती है।
सितंबर 2015 में आवंटित हुई थी फूड कोर्ट की जमीन
मोहाली के सेक्टर-62 में स्थित 1.13 एकड़ का फूड कोर्ट स्थल सितंबर 2015 में Remigate Build Estates Pvt Ltd को आवंटित किया गया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस जमीन का रिजर्व प्राइस 32.50 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। अब इसी प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 47 करोड़ रुपये के कथित बकाया और उन्हें माफ करने की प्रक्रिया ED की जांच के दायरे में है।
Key Highlights
-
GMADA के चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने ED के सामने महत्वपूर्ण दावा किया।
-
वरिष्ठ अधिकारियों पर 'Partially Feasible' रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाने का आरोप।
-
Remigate Build Estates पर 47 करोड़ रुपये के कथित बकाया में छूट का मामला।
-
कंपनी को सितंबर 2015 में सेक्टर-62 मोहाली में 1.13 एकड़ जमीन आवंटित हुई थी।
-
जमीन का रिजर्व प्राइस 32.50 करोड़ रुपये था।
-
तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर हरदीप सिंह ने छूट का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था।
-
GMADA की बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने की थी।
-
ED ने हरदीप सिंह और अमरिंदर सिंह मल्ही को समन भेजा है।
-
पिछले महीने GMADA कार्यालय में तीन दिनों तक ED की तलाशी चली थी।
FAQ Section
1. GMADA का 47 करोड़ रुपये का मामला क्या है?
यह मामला मोहाली के सेक्टर-62 में फूड कोर्ट विकसित करने के लिए आवंटित जमीन से जुड़ा है। Remigate Build Estates Pvt Ltd को कथित तौर पर करीब 47 करोड़ रुपये के बकाया में छूट दिए जाने की जांच ED कर रही है।
2. चीफ इंजीनियर अजय गर्ग ने ED को क्या बताया?
उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर कंपनी के पक्ष में 'Partially Feasible' शब्दों वाली रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया था।
3. Remigate Build Estates को जमीन कब आवंटित हुई थी?
कंपनी को सितंबर 2015 में सेक्टर-62, मोहाली में 1.13 एकड़ का फूड कोर्ट स्थल आवंटित किया गया था।
4. जमीन का रिजर्व प्राइस कितना था?
इस जमीन का रिजर्व प्राइस 32.50 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था।
5. ED ने किन अधिकारियों को समन भेजा है?
ED ने तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर हरदीप सिंह और अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही को समन जारी किया है।
6. ED ने GMADA कार्यालय में कब छापेमारी की थी?
दी गई जानकारी के अनुसार, ED ने पिछले महीने मोहाली स्थित GMADA कार्यालय में तीन दिनों तक तलाशी अभियान चलाया था।
Conclusion
मोहाली के GMADA से जुड़े Remigate Build Estates मामले में 47 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय राहत अब जांच एजेंसी के निशाने पर है। चीफ इंजीनियर अजय गर्ग के बयान, वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए दबाव के आरोप और दो अधिकारियों को जारी समन से जांच का दायरा बढ़ गया है। अब ED की पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन आवंटन और बकाया राशि में कथित छूट की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका थी।

