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CHO की हड़ताल तेज: लंबित मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, 2 जुलाई को CM आवास के बाहर महाआंदोलन का ऐलान
राज्यभर में कामकाज ठप कर आंदोलन पर उतरे कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, समान वेतन, नियमित लाभ और नई प्रोत्साहन नीति वापस लेने समेत कई मांगें उठाईं।
पंजाब में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों (CHO) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है। सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और 2 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया।
लंबित मांगों को लेकर CHO का आंदोलन हुआ तेज
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों (CHO) ने सोमवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एसोसिएशन पंजाब और नोवल इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ CHOs के आह्वान पर राज्यभर में आयोजित आंदोलन का हिस्सा था।
आंदोलन के तहत CHO ने सोमवार से अपने कार्यों का बहिष्कार करने का भी ऐलान किया है।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी, प्रतीकात्मक पुतला जलाकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए और सरकार की नीतियों के विरोध में प्रतीकात्मक पुतला जलाकर अपना रोष व्यक्त किया।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
2 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के बाहर होगा राज्यस्तरीय प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 2 जुलाई को संगरूर स्थित मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के निकट राज्यस्तरीय विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आगामी आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में CHO शामिल होंगे।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ. बलवीर सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कई बार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की तथा अपनी मांगों को लेकर अनेक ज्ञापन सौंपे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई दौर की बैठकों और आश्वासनों के बावजूद सरकार ने उनकी किसी भी प्रमुख मांग का समाधान नहीं किया।
ये हैं CHO की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार के समक्ष कई अहम मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं—
- 'समान कार्य, समान वेतन' के सिद्धांत को लागू किया जाए।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों को समान वेतन का लाभ मिले।
- लॉयल्टी बोनस दोबारा शुरू किया जाए।
- नई इंसेंटिव (प्रोत्साहन) प्रोफार्मा व्यवस्था वापस ली जाए।
- CHO कैडर और स्थायी पदों को स्वीकृति दी जाए।
- इंसेंटिव राशि को मूल वेतन में शामिल किया जाए।
- BAMS योग्यता वाले CHO को नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (NPA) दिया जाए।
- बंद किए गए हार्डशिप अलाउंस को बहाल किया जाए।
- रिक्त CHO पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
Key Highlights:
- CHO ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन।
- सोमवार से कार्य बहिष्कार शुरू।
- सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रतीकात्मक पुतला दहन।
- 2 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़े प्रदर्शन का ऐलान।
- समान वेतन, लॉयल्टी बोनस और NPA सहित कई मांगें उठाईं।
- सरकार पर लंबे समय से मांगों की अनदेखी करने का आरोप।
FAQ Section:
Q1. CHO ने प्रदर्शन क्यों किया?
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों ने अपनी लंबित मांगों जैसे समान वेतन, लॉयल्टी बोनस, CHO कैडर और नई इंसेंटिव नीति को लेकर प्रदर्शन किया।
Q2. क्या CHO ने कामकाज बंद कर दिया है?
हाँ, यूनियन के आह्वान पर CHO ने सोमवार से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।
Q3. अगला बड़ा प्रदर्शन कब होगा?
यूनियन ने 2 जुलाई को संगरूर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राज्यस्तरीय प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
Q4. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
समान कार्य के लिए समान वेतन, लॉयल्टी बोनस की बहाली, CHO कैडर की मंजूरी, NPA, हार्डशिप अलाउंस और रिक्त पदों पर भर्ती उनकी प्रमुख मांगें हैं।
Q5. यूनियन ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
यूनियन का आरोप है कि कई बार बातचीत और ज्ञापन देने के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
Conclusion:
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो आगामी दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए सभी की नजर अब सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर है।

