- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- CM भगवंत मान की तस्वीर वाले स्कूल बैग बांटने पर विवाद, शिक्षकों ने सरकार पर छात्रों के राजनीतिक इस्त...
CM भगवंत मान की तस्वीर वाले स्कूल बैग बांटने पर विवाद, शिक्षकों ने सरकार पर छात्रों के राजनीतिक इस्तेमाल का लगाया आरोप
सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले बैग और लिफाफे बांटे जाने पर शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति, कहा- स्कूल प्रचार का माध्यम नहीं।
पंजाब के सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले स्कूल बैग और लिफाफे वितरित किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षक संगठनों ने इसे छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल बताते हुए सरकार की आलोचना की है, जबकि आम आदमी पार्टी के विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने अमृतसर में विद्यार्थियों को नए बैग वितरित किए।
मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले स्कूल बैग पर शुरू हुआ विवाद
पंजाब के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले स्कूल बैग वितरित किए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्यभर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि छात्रों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसी बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के अमृतसर दक्षिण से विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने बुधवार को गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कोट बाबा दीप सिंह (बॉयज) के विद्यार्थियों को नए स्कूल बैग वितरित किए।
बैग पर CM की तस्वीर और पीला रंग बना विवाद का कारण

बताया गया कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए ये बैग स्कूलों में भेजे गए हैं।
कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को भी भेजे गए विशेष लिफाफे
शिक्षकों का कहना है कि कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए भी मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले पॉलीथीन लिफाफे ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) कार्यालयों के माध्यम से स्कूलों में भेजे गए हैं।
शिक्षक संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला अध्यक्ष अश्विनी अवस्थी ने कहा कि सरकारी स्कूल किसी भी राजनीतिक दल के प्रचार का माध्यम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दिए जाने वाले बैगों या अन्य सामग्री पर मुख्यमंत्री की तस्वीर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
शिक्षकों और अधिकारियों की कमी का भी उठाया मुद्दा
अश्विनी अवस्थी ने दावा किया कि पंजाब के करीब 60 प्रतिशत सरकारी स्कूल, यानी 1,100 से अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सैकड़ों हाई स्कूल आज भी नियमित प्रिंसिपल और हेडमास्टर के बिना संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 100 से अधिक ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) के पद खाली हैं और शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, राज्य सरकार अपने कार्यकाल के दौरान आवश्यकता के अनुरूप नियमित शिक्षकों की भर्ती पूरी करने में भी विफल रही है।
Key Highlights:
- सरकारी स्कूलों में CM भगवंत मान की तस्वीर वाले बैग बांटे जाने पर विवाद।
- AAP विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने अमृतसर में विद्यार्थियों को बैग वितरित किए।
- शिक्षक संगठनों ने छात्रों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया।
- कक्षा 11-12 के लिए बैग और कक्षा 1-10 के लिए मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले लिफाफे भेजे गए।
- शिक्षकों ने स्कूलों में प्रिंसिपल, हेडमास्टर और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया।
- सरकार से शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं पर ध्यान देने की मांग।
FAQ Section
Q1. विवाद किस बात को लेकर है?
उत्तर: सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले स्कूल बैग और लिफाफे वितरित किए जाने को लेकर विवाद हुआ है।
Q2. बैग किसने वितरित किए?
उत्तर: आम आदमी पार्टी के अमृतसर दक्षिण से विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने अमृतसर के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को बैग वितरित किए।
Q3. शिक्षक संगठनों ने क्या आपत्ति जताई है?
उत्तर: उनका कहना है कि सरकारी स्कूल किसी राजनीतिक दल के प्रचार का माध्यम नहीं होने चाहिए और छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
Q4. शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या दावा किया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि राज्य के 1,100 से अधिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और कई हाई स्कूल आज भी नियमित प्रिंसिपल और हेडमास्टर के बिना चल रहे हैं तथा शिक्षकों की भारी कमी है।
Q5. सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
उत्तर: शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं के समाधान के बजाय प्रचार पर अधिक ध्यान दे रही है।
Conclusion:
मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले स्कूल बैगों के वितरण को लेकर पंजाब में राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। जहां शिक्षक संगठन इसे सरकारी स्कूलों के राजनीतिक इस्तेमाल के रूप में देख रहे हैं, वहीं इस मुद्दे ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की कमी जैसे गंभीर सवालों को भी एक बार फिर सामने ला दिया है।
खबरें और भी हैं
Advertisement

