लुधियाना में 1500 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को नहीं मिल रहे ठेकेदार, चौथी बार भी टेंडर फेल

कचरा प्रबंधन और सड़क सफाई योजनाओं पर सवाल, नगर निगम ने फिर बढ़ाई अंतिम तारीख

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लुधियाना नगर निगम के 1500 करोड़ रुपये से अधिक के दो बड़े प्रोजेक्ट—ठोस कचरा प्रबंधन और मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग—लगातार चौथी बार भी ठेकेदारों को आकर्षित करने में असफल रहे हैं। अब टेंडर दोबारा जारी कर 18 मई तक की नई डेडलाइन तय की गई है।

लुधियाना नगर निगम (MC) अपने दो बड़े प्रोजेक्ट—इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग—के लिए लगातार चौथी बार भी कोई बोलीदाता (बिडर) नहीं जुटा पाया है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये से अधिक है।

अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम ने दो दिन पहले फिर से टेंडर जारी किए हैं और बोली जमा करने की अंतिम तारीख 18 मई तक बढ़ा दी गई है।

बार-बार बिडर न मिलने से परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि शहर पहले से ही खराब कचरा प्रबंधन और गंदी सड़कों की समस्या से जूझ रहा है।

सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर शाम लाल गुप्ता ने कहा,
“पहले कोई बोली नहीं मिली थी, इसलिए कुछ छोटे बदलाव करके टेंडर फिर से जारी किए गए हैं और 18 मई तक की समयसीमा दी गई है।”


🔹 कचरा प्रबंधन परियोजना

यह परियोजना शहर में उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक संग्रह, छंटाई, परिवहन और निपटान को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इसमें कचरा प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करना, पुराने कचरे का निपटान और समग्र सिस्टम में सुधार शामिल है।

लुधियाना में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है, जिसका अधिकांश हिस्सा बिना उचित प्रक्रिया के डंप किया जाता है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ISWM) परियोजना इसका सबसे बड़ा हिस्सा है। पहले इसे 3,300 रुपये प्रति टन की दर से जारी किया गया था, लेकिन कोई बोली नहीं आई। बाद में इसे बढ़ाकर 4,221 रुपये प्रति टन किया गया, जिससे आठ साल की कुल लागत 1400 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।


🔹 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग परियोजना

इस परियोजना के तहत शहर की प्रमुख सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाना है, जिससे सफाई व्यवस्था में सुधार और धूल प्रदूषण में कमी लाई जा सके।

आंतरिक सड़कों (लगभग 2,500 किमी) की सफाई के लिए दर 867 रुपये प्रति किमी से बढ़ाकर 1,800 रुपये प्रति किमी कर दी गई, जिससे तीन साल की लागत लगभग 70 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, मुख्य सड़कों (697 किमी) के लिए दर 827 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति किमी कर दी गई, जिससे कुल खर्च करीब 80 करोड़ रुपये आंका गया है।

यह तब है जब नगर निगम के पास पहले से अपनी मशीनरी मौजूद है और 153 किमी सड़कों की सफाई पहले से एक निजी कंपनी को दी जा चुकी है।


🔹 लगातार विफलता पर सवाल

इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्वच्छता अभियानों के तहत शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए अहम माना जा रहा था। हालांकि, कई बार टेंडर जारी होने के बावजूद निजी कंपनियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

सूत्रों के अनुसार, टेंडर की कुछ शर्तें भी बिडर्स को आकर्षित नहीं कर पा रही हैं, जिसके चलते यह स्थिति बनी हुई है।

 
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Edited By: Karan Singh

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