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यूपी में 39 ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षण, लखनऊ का मूसा बाग भी होगा विकसित
सरकार का विरासत बचाने पर जोर, मूसा बाग को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने 39 ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षण देने का फैसला लिया है। इनमें लखनऊ का जर्जर हो चुका मूसा बाग भी शामिल है, जिसे अब संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 39 ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षण देने की मंजूरी दी है। इन स्थलों में लखनऊ के बाहरी इलाके में स्थित लंबे समय से उपेक्षित पड़ा मूसा बाग भी शामिल है।
यह निर्णय मंगलवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई राज्य पुरातत्व सलाहकार समिति की उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने बताया कि कुल 41 स्थलों की पहचान की गई थी, जिनमें से 39 को संरक्षण के लिए मंजूरी मिल गई है।
मूसा बाग, जो काफी समय से खंडहर अवस्था में है, इस संरक्षण अभियान का प्रमुख केंद्र होगा। अधिकारियों का कहना है कि इसे संरक्षित कर शहर की सांस्कृतिक पहचान में फिर से शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
रेनू द्विवेदी के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। इसके लिए पारंपरिक तकनीकों और सामग्री जैसे चूना गारा, गुड़, दाल, बेल फल और लाखौरी ईंटों का उपयोग किया जाएगा।
दूसरे चरण में इस स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां बैठने की सुविधा और आगे चलकर लाइट एंड साउंड शो भी शुरू किया जाएगा।
फिलहाल राज्य पुरातत्व विभाग 278 स्मारकों की देखरेख करता है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक इस संख्या को बढ़ाकर 300 करने का है।
अधिकारियों के अनुसार, चयनित स्थलों में प्राचीन मंदिर, किले, ऐतिहासिक इमारतें और पुरातात्विक टीले शामिल हैं, जिनमें से कुछ की उम्र 3,000 साल तक पुरानी है। इनमें से कई स्थल नॉर्दर्न ब्लैक पॉलिश्ड वेयर (NBPW) काल, यानी करीब 2,500 वर्ष पुराने हैं।
अन्य प्रमुख स्थलों में कानपुर नगर का पंचमुखी मंदिर, हरदोई का नागेश्वर मंदिर, उन्नाव का महेपासी टीला, झांसी का गोंडवानी मंदिर, रामपुर का टूटी का मकबरा, वाराणसी का शिव मंदिर और महोबा का श्री वासुदेव मंदिर शामिल हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “कुषाण ट्रेल” विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसके तहत कुषाण काल के स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा। साथ ही, कुछ स्थानों पर लाइब्रेरी, इंटरप्रिटेशन सेंटर और छोटे कैफे जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
गौरतलब है कि मूसा बाग का बाग़ नवाब आसफ-उद-दौला ने बनवाया था, जबकि इसकी कोठी अवध के छठे नवाब सआदत अली खान ने निर्मित कराई थी।

