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उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 का पहला चरण 7 मई से, पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया
सेल्फ एन्यूमरेशन से होगी शुरुआत, मोबाइल ऐप और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी नई सुविधाएं शामिल
उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 का पहला चरण 7 मई से शुरू होगा। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें मोबाइल आधारित डेटा कलेक्शन और सेल्फ एन्यूमरेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 का पहला चरण 7 मई से शुरू होगा, जिसमें 7 से 21 मई तक सेल्फ एन्यूमरेशन (स्वयं गणना) की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 22 मई से 20 जून तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना की गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
जनगणना संचालन, उत्तर प्रदेश की निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि राज्य अपनी पहली डिजिटल जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भारत की 16वीं जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद 8वीं।
इस बार जनगणना में कई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनमें मोबाइल आधारित डेटा संग्रह, Census Management & Monitoring System (CMMS) पोर्टल के जरिए रियल-टाइम निगरानी, वैकल्पिक सेल्फ एन्यूमरेशन सुविधा और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग शामिल है।
उन्होंने बताया कि जनसंख्या गणना चरण, जो 9 फरवरी 2027 से शुरू होगा, में व्यापक जाति गणना भी की जाएगी।
हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना के लिए उत्तर प्रदेश, जिसमें 18 मंडल, 75 जिले, 350 तहसील, 17 नगर निगम, 745 शहरी निकाय, 21 कैंटोनमेंट बोर्ड/औद्योगिक टाउनशिप, 57,694 पंचायतें और लगभग 1.4 लाख राजस्व गांव हैं, को 3.89 लाख हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) में विभाजित किया गया है।
प्रत्येक गणनाकर्मी को एक HLB आवंटित किया जाएगा, जिसमें लगभग 200 घर शामिल होंगे, जबकि कुछ मामलों में यह संख्या 300 तक हो सकती है।
सबसे अधिक HLB वाले पांच जिलों में प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, आजमगढ़ और लखनऊ शामिल हैं, जबकि सबसे कम HLB वाले जिलों में महोबा, चित्रकूट, श्रावस्ती, हमीरपुर और बागपत हैं।
HLB के नक्शों की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए वेब मैपिंग एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें सैटेलाइट इमेजरी के जरिए क्षेत्रों का डिजिटल निर्धारण किया गया है, ताकि राज्य का कोई भी हिस्सा जनगणना से छूट न जाए।

