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शिक्षक बच्चों की सुरक्षा की पहली ढाल, अमृतसर में Teachers’ Day पर DLSA ने चलाया कानूनी जागरूकता अभियान
शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA), अमृतसर ने कानूनी साक्षरता और संवेदनशीलता अभियान चलाया। शिक्षकों को बच्चों के शोषण और दुर्व्यवहार के संकेत पहचानने तथा कानून के तहत रिपोर्टिंग की जानकारी दी गई।
अमृतसर में DLSA के कानूनी जागरूकता अभियान के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को POCSO समेत बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाला बताया।
शिक्षक केवल बच्चों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ बच्चों को दुर्व्यवहार और शोषण से बचाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर अमृतसर में आयोजित कानूनी साक्षरता एवं संवेदनशीलता अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने यह बात कही।
जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA), अमृतसर की ओर से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को बाल अधिकारों तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना था।
कई स्कूलों में आयोजित हुए जागरूकता सत्र
यह अभियान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरपर्सन, DLSA, जतिंदर कौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। न्यायिक अधिकारियों, कानूनी सहायता अधिवक्ताओं और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स ने जिले के विभिन्न स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता सत्र आयोजित किए।इन सत्रों के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी दी गई।
BBK DAV College for Women में भी हुआ कार्यक्रम
BBK DAV College for Women में शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए DLSA के सचिव अमरदीप सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा के माध्यम से आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों को विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सुधारों को वास्तविक सामाजिक बदलाव में बदलने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे चरित्र निर्माण और नागरिक अनुशासन विकसित करने में भी योगदान देते हैं।
इन स्कूलों में भी हुए कानूनी जागरूकता सत्र
DLSA की ओर से जिले के कई अन्य शिक्षण संस्थानों में भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें शामिल रहे:
- सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर गर्ल्स, वेरका
- सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मॉल रोड
- सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, महान सिंह गेट
- सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कोट बाबा दीप, सुल्तानविंड रोड
- बेदी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पुतलीघर
इन संस्थानों में अधिवक्ताओं और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स ने शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को बच्चों से संबंधित कानूनों की जानकारी दी।
POCSO समेत इन कानूनों पर दी जानकारी
जागरूकता सत्रों में Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2009 के साथ-साथ बच्चों के नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम और Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों को बताया कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी संदिग्ध स्थिति में समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
बच्चों में दिखने वाले संकेतों पर नजर रखने की सलाह
सत्रों के दौरान बताया गया कि शिक्षक अक्सर उन लोगों में शामिल होते हैं, जो बच्चों के व्यवहार में बदलाव सबसे पहले देख सकते हैं।
बच्चे के अचानक व्यवहार बदलने, अलग-थलग रहने, शरीर पर बिना स्पष्ट कारण चोट के निशान दिखाई देने, घर से जुड़ी परेशानियों या बार-बार और बिना स्पष्ट कारण स्कूल से अनुपस्थित रहने जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई गई।
POCSO के तहत रिपोर्टिंग की जानकारी
शिक्षकों को POCSO Act के तहत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और रिपोर्टिंग प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों में दुर्व्यवहार, उपेक्षा या मानसिक परेशानी के संकेत नजर आने पर शिक्षक संवेदनशीलता के साथ स्थिति को समझें और कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित मामले की जानकारी दें।
Key Highlights:
- शिक्षक दिवस पर DLSA अमृतसर ने कानूनी जागरूकता अभियान चलाया।
- अभियान जतिंदर कौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
- शिक्षकों और विद्यार्थियों को POCSO Act की जानकारी दी गई।
- Right to Education Act और Juvenile Justice Act पर भी जागरूक किया गया।
- शिक्षकों को बच्चों में abuse और distress के संकेत पहचानने की जानकारी दी गई।
- अचानक व्यवहार परिवर्तन, चोट के निशान और बार-बार अनुपस्थिति जैसे संकेतों पर ध्यान देने को कहा गया।
- POCSO के तहत रिपोर्टिंग प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
FAQ Section:
सवाल: अमृतसर में कानूनी जागरूकता अभियान किसने आयोजित किया?
जवाब: अभियान जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA), अमृतसर की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।
सवाल: अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जवाब: इसका उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा तथा दुर्व्यवहार और शोषण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना था।
सवाल: शिक्षकों को किन कानूनों की जानकारी दी गई?
जवाब: शिक्षकों और विद्यार्थियों को POCSO Act, Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 और Juvenile Justice Act के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।
सवाल: बच्चों में किन संकेतों को गंभीरता से लेने की सलाह दी गई?
जवाब: अचानक व्यवहार में बदलाव, अलग-थलग रहना, बिना स्पष्ट कारण चोट के निशान, घर से जुड़ी समस्याएं और बार-बार या अस्पष्ट कारणों से स्कूल से अनुपस्थित रहना जैसे संकेतों पर ध्यान देने को कहा गया।
सवाल: POCSO Act के संबंध में शिक्षकों को क्या बताया गया?
जवाब: उन्हें POCSO के कानूनी प्रावधानों और बच्चों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के लिए निर्धारित तंत्र के बारे में जानकारी दी गई।
निष्कर्ष:
अमृतसर में DLSA का यह अभियान शिक्षकों को बाल सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। शिक्षकों को बच्चों में दुर्व्यवहार या परेशानी के शुरुआती संकेत पहचानने के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों को समय रहते सुरक्षा और सहायता मिल सके।
