पानीपत बना कंबल उत्पादन का ग्लोबल हब, निर्यात पर युद्ध का असर

हर दिन 4,000 टन उत्पादन, पश्चिम एशिया को होता है बड़ा निर्यात

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टेक्सटाइल के लिए प्रसिद्ध पानीपत अब कंबल उत्पादन में विश्व स्तर पर अग्रणी बन चुका है, हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है।

पानीपत, जो अपने हैंडलूम और टेक्सटाइल उत्पादों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, ने मिंक, फ्लैनो और पोलर कंबलों के उत्पादन में एक खास पहचान बना ली है।

पहले जहां 98 प्रतिशत कंबल चीन से आयात किए जाते थे, वहीं अब पानीपत में लगभग 150 यूनिट प्रतिदिन करीब 4,000 टन कंबल का उत्पादन कर रही हैं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक माना जा रहा है।

पानीपत के कंबल निर्माता न केवल देश की लगभग 99 प्रतिशत मांग को पूरा कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया के देशों को भी निर्यात कर रहे हैं। हालांकि, ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण कंबलों के निर्यात पर असर पड़ा है।

पानीपत के निर्यातकों का लगभग 700 करोड़ रुपये का कंबल निर्यात कारोबार है, जिसमें से 80 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों के साथ जुड़ा हुआ है।

जिले में कुल 160 कंबल निर्माण इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से 125 मिंक कंबल, 12 फ्लैनो कंबल और करीब 30 यूनिट पोलर कंबल का उत्पादन करती हैं। ये सभी मिलकर रोजाना लगभग 4,000 टन (40 लाख किलोग्राम) कंबलों का उत्पादन करती हैं।

घरेलू बाजार में इस वर्ष कंबल उद्योग को अच्छा प्रतिसाद मिला है। वर्ष 2016-17 में जिले में केवल 12 कंबल निर्माण इकाइयां थीं, जो पिछले 10 वर्षों में बढ़कर 150 से अधिक हो गई हैं।

प्रश्न का उत्तर:

पानीपत से कंबलों का निर्यात मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों—जैसे ईरान, इराक, यमन, जॉर्डन और सीरिया—को किया जाता है।

कुल मिलाकर कंबल निर्यात का वार्षिक कारोबार लगभग 600–700 करोड़ रुपये का है, जो पिछले 4–5 वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है।

यह उद्योग न केवल स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

 
 
Edited By: Karan Singh

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