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क्लाइमेट चेंज पर मंथन: करनाल में वैज्ञानिकों, किसानों और छात्रों का जुटान
200 से अधिक प्रतिनिधि कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभावों पर कर रहे चर्चा
करनाल में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक, किसान और छात्र जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समाधान पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
करीब 200 प्रतिनिधि, जिनमें वैज्ञानिक, शोध सहयोगी, छात्र और किसान शामिल हैं, जलवायु परिवर्तन की प्रकृति और इसके कृषि, मानव व पशु स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को समझने के लिए अपने नवीनतम शोध प्रस्तुत कर रहे हैं।
यह दो दिवसीय चर्चा सात उप-विषयों और दो पैनल चर्चाओं के तहत आयोजित की जा रही है। इनमें क्लाइमेट स्मार्ट रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर, एकीकृत खेती आधारित खाद्य प्रणाली, जलवायु सहनशील फसलें और किस्में, मिट्टी और जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, खाद्य एवं पोषण, मानव और पशु स्वास्थ्य, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल समाधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. गुरबचन सिंह ने की, जो GSFRED के संस्थापक अध्यक्ष हैं और कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड तथा भारत सरकार में कृषि आयुक्त रह चुके हैं।
रिबन काटने और दीप प्रज्ज्वलन समारोह बाबा कश्मीर सिंह (गुरुद्वारा नानकसर, सेक्टर 6, करनाल) और बाबा जसवंत सिंह (निर्मल कुटिया, जरीफा फार्म, करनाल) द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जे.एस. समरा, डॉ. एम.एल. मदान, डॉ. एस.के. मल्होत्रा और डॉ. आर.के. यादव उपस्थित रहे।
डॉ. गुरबचन सिंह ने कहा कि GSFRED ने पिछले आठ वर्षों में क्लाइमेट स्मार्ट रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर से जुड़े कई मॉडल और तकनीकें विकसित की हैं। सम्मेलन के प्रतिभागियों को इनका प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को GSF शोध फार्म में विकसित एकीकृत खेती प्रणाली मॉडल से भी परिचित कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य किसानों की आय दोगुनी करना और कृषि को जलवायु के अनुकूल बनाना है।
यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

